सिलीगुड़ी मानव धर्म आश्रम मे हर्सौल्लास के साथ मनाया होली

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हिमबहादुर/सिलीगुड़ी। स्थानीय सालूगाड़ा के मानव धर्म आश्रम में बृहस्पतिवार मानव उत्थान सेवा समिति के तत्वावधान में होली मिलन कार्यक्रम एवं सत्संग समारोह का आयोजन किया गया था। उत्तरपूर्वञ्चल क्षेत्र मे मानव धर्म प्रचार प्रसार का स्वर्ण वर्ष जयंती भी मना रहा है।  सद्गुरू के दरबार में आकर सन्त महात्माओं के सानिध्य में होली का पर्व मनाने एवं सत्संग प्रवचन सुनकर मन को प्रभु की भक्ति के रंग में रंगाने के लिए सिलीगुड़ी , बागडोगरा ,सुकना ,खपरैल , सिमलबाड़ी ,एनजीपी , पानीघाटा इत्यादि क्षेत्रों से भक्तगण पहुँचे थे। प्रेमी-भक्तगण सन्त-महात्माओं के चरणों में रंग एवं गुलाल लगाकर आशीर्वाद प्राप्त किया । आपसी भाईचारा को स्थापित करने वाला होली का पर्व को भक्तो ने हर्सौल्लास के साथ मनाया।

मानव धर्म के सद्गुरु सतपाल जी महाराज के साध्वी अखिलेश बाईजी ने दीप प्रज्वलन के साथ कार्यक्रम का शुरुआत किया।  महात्मा अखिलेश बाई जी सैकड़ों भक्तों को सम्बोधित करते हुए कहा कि पाप और अधर्म पर सत्य और धर्म का ,नफरत पर प्रेम का एवं अन्याय पर न्याय की जीत का पर्व है। प्रत्येक पर्व के पीछे आध्यात्मिक सन्देश छिपा होता है जिसे जानना जरूरी है। आज लोग होली के पर्व को रंग और गुलाल लगाकर मना तो लेते हैं पर इसके इतिहास को बहुत कम लोग जानते हैं। युवा पीढ़ी इस पर्व को सिर्फ मौज मस्ती का पर्व समझते हैं। उन्होंने होली के इतिहास का जिक्र करते हुए कहा कि राक्षस कूल में जन्म लेने के बावजूद भक्त प्रह्लाद नारद मुनि के संगति प्राप्त करने के कारण भगवान के परम भक्त बन गए जिन्हें बचाने के लिए भगवान को नरसिंह रूप में प्रगट होना पड़ा। महात्मा तारकेश्वरानन्द जी ने भगवान के अविनाशी नाम की महिमा बताते हुए कहा कि नारद मुनि प्रह्लाद को बचपन में ही भगवान के अविनाशी नाम एवं रूप का बोध कराया जिसका सुमिरण प्रह्लाद हर समय करता था इसीलिए उसकी रक्षा हो पाई। आज हमें भी सद्गुरु के शरण में जाकर भगवान के अविनाशी नाम को जानना चाहिए एवं स्वासों में सुमिरण करते हुए हर कार्य करना चाहिए।

पूज्य महात्मा अंकिता बाईजी ने कहा होली का पर्व हमें ये सन्देश देता है कि मनुष्य में भक्त प्रह्लाद की तरह भक्ति का नशा होना चाहिए जो कभी कम नहीं होता। शराब और भाँग की नशा थोड़ी देर में उतर भी जाता है और मनुष्य को दुनिया की नज़र में नीचे उतार भी देता है। भौतिक नशा मनुष्य को संकट में डाल देता है जबकि आध्यात्मिक नशा संकट से बाहर निकलने में मदद करता है। इसके बाद महात्मा तरीका बाईजी ने नेपाली भाषा में सारगर्भित सत्संग सुनाकर लोगों को बाहरी रंग से नहीं बल्कि आध्यात्मिक रंग से अपने मन को रंगने की सलाह दी।

प्रसिद्ध भजन गायिका वीणा सिंह तथा प्रह्लाद छेत्री ने मधुर भजन प्रस्तुत कर होली मिलन समारोह को और आनंदमय बना दिया। पाँच वर्षीय बच्ची वेदान्ती छेत्री एवं नेहा थापा ने सुन्दर नृत्य प्रस्तुत की। होली पर्व मे समिति के वरिष्ठ कार्यकर्तागण विष्णु प्रधान, मेघनाथ छेत्री, श्याम रतन साहू, श्याम गुरुङ, दामोदर पौडेल, जे एन शर्मा, खड्का बहादुर छेत्री, जीवन थापा,लक्ष्मण चौधुरी उपस्थित थे।

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