मानव धर्म ही सनातन धर्म है, उसको जानना ही भगवान को जानना है – महात्मा हरीशा बाई 

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21 मार्च, सुग्रीव कॉलोनी, भरतपुर। सभी धर्मों का आधार मानव धर्म है और मानव धर्म को जानना ही सनातन धर्म को जानना है। धर्म का अभिप्राय अंतर्गजगत से है, भगवान से है। धर्म जानने के बाद आपस के झगड़े समाप्त हो जाते है, ईर्ष्या-द्वेष की भावना समाप्त हो जाती है। आपस में सद्भावना आ जाती है। और इसी सद्भावना से देश में शांति और एकता आती है, देश का समग्र विकास भी इसी सद्भावना से आती है। हमारा उदेश्य भी देश में सद्भावना लाना है। यही संदेश हमारे सदगुरुदेव श्री सतपाल जी महाराज देते है। श्री महाराज जी की प्रेरणा से हमारे जैसे हजारों संत-महात्मागण अध्यात्म ज्ञान का प्रचार-प्रसार कर रहे है।

उक्त बातें उज्जैन से पधारी साध्वी हरीशा बाई जी ने कहा। दो दिवसीय सद्भावना संत सम्मेलन के दूसरे दिन महात्मा हरीशा बाई जी ने भक्त समुदाय को सम्बोधित करते हुए कहा कि ज़ब हमारे जीवन का उदेश्य मिल जायेगा तब हम सभी भगवान के प्रिय बन जाएंगे। क्योंकि मानव जीवन का उद्देश्य भी भगवान की प्राप्ति है। इसलिए हम सभी अपने उद्देश्य को अर्थात भगवान के पावन-पवित्र नाम को जानकर भजन साधना करेंगे तो हमारे जीवन में सुख-शांति आएगी।

सुग्रीव कालोनी स्थित मानव धर्म आश्रम के अंतर्गत टावर के पास दो दिवसीय सम्मेलन के समापन दिवस पर क्षेत्रीय आश्रम प्रभारी महात्मा सिद्धांतानंद जी ने कहा कि आज इस कॉलोनी का परम सौभाग्य है कि हमारे बीच आत्म-ज्ञानी संत आये हुए है। जिनके दर्शन और सत्संग मात्र से जीवन का कल्याण हो जाता है। इस ज्ञान की अमृत वर्षा में सभी गोता लगावे और अपना जीवन धन्यवाद बनायें।
ग्वालियर से पधारे महात्मा सावित्री बाई जी ने सुमधुर भजनों सहित अपने सत्संग विचार रखें। दिल्ली से आये भजन गायक श्री अमर दास जी ने अपने सुमधुर और प्रेरणादायक भजनों पर अभी भक्तों को नाचने पर मजबूर कर दिया।
समिति के कार्यकर्ताओं और सहयोगी संस्था मानव सेवा दल के सदस्यों के सहयोग से आस पास के क्षेत्रों में प्रातः कालीन शोभायात्रा निकाली गयी। सैकड़ो की संख्या में भक्तों ने सम्मिलित होकर शोभायात्रा में प्रेरणादायक उद्घोष किये और श्री महाराज जी संदेश को जन-जन तक पहुंचाने का प्रयास किया।

कार्यक्रम के दौरान मंच पर उपस्थित संत महात्माओं का फूल-मालाओं से स्वागत किया गया। इस दौरान वी.के.राणा, राजकुमार, गोपीचंद मास्टर, भरत सिंह, रमेश चंद्र जी, रामदयाल मीणा, बाबू राम, भरत लाल, भूरे सिंह, मास्टर वीरेंद्र सिंह, रतन सिंह, शिव चरण सहित अनेक भक्त उपस्थित रहे। आरती और प्रसाद के साथ कार्यक्रम सम्पन्न हुआ। मंच संचालन धुरन्धर चौहान ने किया।

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