असत्य पर सत्य की विजय का प्रतिक है होली -सतपाल महाराज

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संवाददाता /मुरादनगर| मानव उत्थान सेवा समिति द्वारा आयोजित स्थानीय सतलोक आश्रम के श्री हंस इंटर कॉलेज के मैदान में  दो दिवसीय होली महोत्सव के दूसरे दिन भक्त समुदाय को सम्बोधित करते हुए समाज सेवी श्री सतपाल महाराज  ने कहा कि जब तक भगवान के प्रति सच्ची लगन व  निष्ठा नहीं होगी तब तक समाज के अंदर शांति कि स्थापना होना असंभव है | इसके लिए संत महात्मा, तत्वज्ञानी बार – बार यही कहते हैं कि असत्य पर सत्य की विजय का प्रतिक है होली और अध्यात्म के द्वारा ही समाज में शांति की स्थापना संभव है |
        उन्होंने कहा कि परमपिता परमात्मा की कृपा से हमें यह देव दुर्लभ मानव शरीर प्राप्त हुआ है| इसके माध्यम से हम संसार के हर कार्य को करते हैं| यह शरीर बड़ा ही बेशकीमती है पर भौतिक जगत में हम इतना अत्यधिक रम जाते कि इस मनुष्य शरीर के महत्त्व को और उसके उद्देश्य को ही भूल जाते हैं| इसीलिए बार-बार संत महात्माओं व ज्ञानीजनों  का इस धराधाम पर आना होता है| वह मनुष्य को अध्यात्म ज्ञान देकर मनुष्य जीवन को सार्थक कर देते हैं |
       श्री महाराज जी ने कहा कि जब मनुष्य को सद्गुरु महाराज जी की कृपा से आत्मज्ञान की अनुभूति होती है तो व्यक्ति भजन-सुमिरन करता है| जब मन एकाग्र होता है तो मन की शक्ति ध्यान सुमिरन करने से केन्द्रित हो जाती है| उसका हमारे जीवन में प्रभाव होता है| महाराज जी ने उदाहरण देते हुए कहा कि जैसे सूरज की किरणें धरती पर पड़ती हैं| उन्होंने कहा कि यदि आप सूरज की कीरणों को मेग्निफ़ाइन्ग ग्लास, दूरबीन के शीशे से एक कागज पर केन्द्रित कर दो, जैसे ही सूरज की किरने केन्द्रित होंगी, वहां पर आग जलने लगती है |इसी प्रकार से जब हम किसी चीज को केन्द्रित (फोकस ) करते हैं तो अंतर्जगत में शक्ति जागृत हो जाती है| इसीलिए संतों द्वारा मन को प्रभु के सच्चे नाम में एकाग्र करने की बात कही गई| संतों ने कहा कि अगर आपका मन प्रभु के ध्यान में केन्द्रित हो जायेगा, जैसे भक्त प्रह्लाद के सामने भगवान नरसिंह जी प्रगट हो गए, ऐसे ही आपका मन एकाग्र हो गया तो भगवान भी आपके सामने प्रकट हो जायेंगे|
         कार्यक्रम में श्री विभुजी महाराज व संत-महात्माओं ने भी अपने विचार रखे| मंच संचालन महात्मा हरिसंतोषानंद ने किया |

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