सफदरजंग अस्पताल में नाकाफ़ी व्यवस्था, ठिठुरती ठंड में सड़क पर सोने को मजबूर परिजन

0
993

प्रदीप चौहान/दक्षिणी दिल्ली : देश के बड़े अस्पतालों में शुमार दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल, जहाँ दिल्ली व आसपास के राज्यों के दूरदराज़ इलाक़ों से मरीज़ अपने परिजनों के साथ इलाज कराने आते हैं लेकिन यहाँ ठहरने का उचित प्रबंध न होने की वजह से सैकड़ों लोग हड्डियों को कंपकंपाती ठंड में भी सड़क, फुटपाथ व गलियों में सोने को मजबूर हैं।
औरतों, बच्चों व बुज़ुर्गों का इमेरजेंसी व विभिन्न वार्डों के बाहर एक चटाई पर लेटे और एक कम्बल ओढ़े ठंड से कांपते परिजनों की ठिठुरती आँखें, अंदर भर्ती किसी अपने के बेहतरी को तकती हैं और सरकार के तमाम झूठे दावों की पोल खोलतीं हैं। जिसमे कहा जाता है की दिल्ली के अस्पताल सम्पूर्ण सुविधा संपन हैं।

             ओखला से आयी किरण जिनके परिवार का एक सदस्य डिलिवरी वार्ड में भर्ती है, ने बताया की अंदर का इंतज़ाम भी नाकाफ़ी है। वार्ड में बेड ख़ाली नहीं हैं जिसकी वजह से एक बेड पर दो या दो से ज़्यादा मरीज़ इलाज करवाने को मजबूर हैं।

            इसके अलावा उन्होंने बताया की हर मरीज़ के साथ इजाजतन रुके एक परिजन के बैठने व सोने का कोई उचित प्रबंध भी नहीं है। परिजनों को बेड के नीचे बैठना पड़ता है। जहाँ कोकरेच भी घुमते रहते हैं। और इसी वजह से परिवार के कई सदस्य बरी बारी से मरीज़ के पास रहते हैं। उन्होंने बताया की परिजनों के बिस्तर, ओढ़ने व ठहरने का कोई प्रबंध अस्पताल की तरफ़ से नहीं किया हुआ है। हमें अपना प्रबंध ख़ुद करना पड़ता हैं। और कहीं जगह नहीं मिलने पर खुले फुटपाथ पर सोना पड़ता हैं।

             देश के बड़े अस्पतालों में शुमार दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल, जहाँ दिल्ली व आसपास के राज्यों के दूरदराज़ इलाक़ों से मरीज़ अपने परिजनों के साथ इलाज कराने आते हैं लेकिन यहाँ ठहरने का उचित प्रबंध न होने की वजह से सैकड़ों लोग हड्डियों को कंपकंपाती ठंड में भी सड़क, फुटपाथ व गलियों में सोने को मजबूर हैं।
औरतों, बच्चों व बुज़ुर्गों का इमेरजेंसी व विभिन्न वार्डों के बाहर एक चटाई पर लेटे और एक कम्बल ओढ़े ठंड से कांपते परिजनों की ठिठुरती आँखें, अंदर भर्ती किसी अपने के बेहतरी को तकती हैं और सरकार के तमाम झूठे दावों की पोल खोलतीं हैं। जिसमे कहा जाता है की दिल्ली के अस्पताल सम्पूर्ण सुविधा संपन हैं।
ओखला से आयी किरण जिनके परिवार का एक सदस्य डिलिवरी वार्ड में भर्ती है, ने बताया की अंदर का इंतज़ाम भी नाकाफ़ी है। वार्ड में बेड ख़ाली नहीं हैं जिसकी वजह से एक बेड पर दो या दो से ज़्यादा मरीज़ इलाज करवाने को मजबूर हैं।

           इसके अलावा उन्होंने बताया की हर मरीज़ के साथ इजाजतन रुके एक परिजन के बैठने व सोने का कोई उचित प्रबंध भी नहीं है। परिजनों को बेड के नीचे बैठना पड़ता है। जहाँ कोकरेच भी घुमते रहते हैं। और इसी वजह से परिवार के कई सदस्य बरी बारी से मरीज़ के पास रहते हैं। उन्होंने बताया की परिजनों के बिस्तर, ओढ़ने व ठहरने का कोई प्रबंध अस्पताल की तरफ़ से नहीं किया हुआ है। हमें अपना प्रबंध ख़ुद करना पड़ता हैं। और कहीं जगह नहीं मिलने पर खुले फुटपाथ पर सोना पड़ता हैं।

           देश के बड़े अस्पतालों में शुमार दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल, जहाँ दिल्ली व आसपास के राज्यों के दूरदराज़ इलाक़ों से मरीज़ अपने परिजनों के साथ इलाज कराने आते हैं लेकिन यहाँ ठहरने का उचित प्रबंध न होने की वजह से सैकड़ों लोग हड्डियों को कंपकंपाती ठंड में भी सड़क, फुटपाथ व गलियों में सोने को मजबूर हैं।
औरतों, बच्चों व बुज़ुर्गों का इमेरजेंसी व विभिन्न वार्डों के बाहर एक चटाई पर लेटे और एक कम्बल ओढ़े ठंड से कांपते परिजनों की ठिठुरती आँखें, अंदर भर्ती किसी अपने के बेहतरी को तकती हैं और सरकार के तमाम झूठे दावों की पोल खोलतीं हैं। जिसमे कहा जाता है की दिल्ली के अस्पताल सम्पूर्ण सुविधा संपन हैं।

            ओखला से आयी किरण जिनके परिवार का एक सदस्य डिलिवरी वार्ड में भर्ती है, ने बताया की अंदर का इंतज़ाम भी नाकाफ़ी है। वार्ड में बेड ख़ाली नहीं हैं जिसकी वजह से एक बेड पर दो या दो से ज़्यादा मरीज़ इलाज करवाने को मजबूर हैं।

          इसके अलावा उन्होंने बताया की हर मरीज़ के साथ इजाजतन रुके एक परिजन के बैठने व सोने का कोई उचित प्रबंध भी नहीं है। परिजनों को बेड के नीचे बैठना पड़ता है। जहाँ कोकरेच भी घुमते रहते हैं। और इसी वजह से परिवार के कई सदस्य बरी बारी से मरीज़ के पास रहते हैं। उन्होंने बताया की परिजनों के बिस्तर, ओढ़ने व ठहरने का कोई प्रबंध अस्पताल की तरफ़ से नहीं किया हुआ है। हमें अपना प्रबंध ख़ुद करना पड़ता हैं। और कहीं जगह नहीं मिलने पर खुले फुटपाथ पर सोना पड़ता हैं।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here