
कुछ साल पहले अमरीका में आर्थिक मंदी अपने चरम पर थी, आम जनता के पास नौकरिया न होने का रोष था, सरकारी नीतियों के खिलाफ नाराजगी थी, असंतोष का माहौल था। अलग अलग विद्वान अपने अपने तर्क पेश कर रहे थे की कैसे इस मंदी से उबरा जाये। कुछ पहुंचे हुए विद्वानों का मानना था की अमरीका को इंटरनेट क्रांति जैसी किसी क्रांति की ज़रूरत पड़ेगी इस मंदी से उबरने के लिए।
स्टेट की तरफ से अनेकों नीतिगत फैसले लिए गए और परिणामस्वरुप एक नई क्रांति सामने आयी। इस क्रांति का असर भी धीरे धीरे सामने आने लगा। लोगों की नाराजगी और असंतोष तेज गति से समाज से गायब होता गया। सत्ता पक्ष के नजरिये से सब कुछ ठीक हो गया। इस क्रांतिकारी बदलाव को लोगों ने गांजा क्रांति का नाम दिया।
हम इंडिया में है, वेस्टर्न साजो–सामान और कल्चर हमें पसंद आता है। बहुत जल्दी हम अपना भी लेते है। हमने इंटरनेट क्रांति को भी अपनाया और कुछ दशकों में गांव–गांव हर घर में पहुंचा दिया। और अब गांजा क्रांति को भी पसंद करने के संकेत दिख रहे है।
आप कहीं भी किसी कम आवागमन वाले रास्तों से गुजरिये तो आपको एक अलग से धुंए की महक महसूस होगी। पलट कर देखेंगे तो, अपने ही धुन में मग्न कुछ युवावों का ग्रुप नजर आएगा। जिनमे 10 -12 साल के बचे भी दिख जाते है। इन्हे देखिये पर चिंतित मत होइए। ये आम नज़ारा है, आपको दिल्ली की झुग्गी बस्तियों से लेकर पॉश कॉलोनियों तक हर जगह ये महक महसूस करने का सौभाग्य मिल जायेगा। आप खुश होइए की ये क्रांतिकारी रफ़्तार से बढ़ रहा है, ये एक अलग क्रांति है। गांजा क्रांति है।
आज देश जिस मुकाम पे खड़ा है जिस तरह कानून व्यवस्था में बदलाव किये जा रहे हैं। नीतिगत फैसले लिए जा रहे हैं। जिस तरह के निजीकरण, मंदी और बेरोजगारी का असर भारत का यंग माइंड महसूस कर रहा है। इसका प्रभाव अपने और अपनों की जिंदगियों में महसूस करने लगा है। युवा चिंतित है, विचलित है। और धीरे धीरे विरोध करेगा। सत्ता में बैठे लोगों के खिलाफ खड़ा होगा। अन्याय के खिलाफ अपनी आवाज बुलंद करेगा। धरने प्रदर्शन होंगे। नारेबाजियां होंगी, सरकारों और उनके पीछे के आकाओं पर असर पड़ेगा। लोगों की सुननी पड़ेगी। बदलाव आएगा, युथ बदलाव लाएगा। लेकिन ठहरिये ये ख्याली पोलाव सा प्रतीत हो रहा है। बदलाव तो तब आएगा न जब देश के नौजवां का मस्तिष्क तेज होगा, चालक होगा अच्छे और गलत को समझने के शक्ति बची रहेगी।
आज बदलाव की क्रांति की जगह गांजा क्रांति ने ले लिया हैं। तेजी से नशे का व्यापर और उपयोग बढ़ रहा है, सबको फायदा दे रहा है। पुलिस मालामाल हो रही है। नारकोटिक डिपार्टमेंट भी आराम मोड में है। प्रशासन के पास और काम भी है। राजनीती अपनी चमक बिखेर रही है। सबका धंधा फल फूल रहा है। सबकी चांदी है। ये गांजा क्रांति है।
हमारी राष्ट्रीय राजधानी का युवा अपने कैरियर, परिवार और जीवन को पीछे छोड़ते हुए, नशीली दवाओं के सेवन की आदत में डूब रहा है। दिल्ली एड्स कंट्रोल सोसाइटी के एक हालिया सर्वेक्षण में, यह कहा गया है कि पिछले तीन वर्षों में, शहर में गांजा, कोकीन और हीरोइन की मांग बढ़ी है। डेढ़ साल पहले ही दिल्ली और मुंबई को दुनिया के शीर्ष 10 शहरों में शुमार किया गया था, जिनमें सबसे अधिक गांजा की खपत है। हमारी दिल्ली तीसरा स्थान पाकर गांजा क्रांति की राजधानी बनने की ओर अग्रसर है। जबकि मुंबई इस दौड़ में छठे नंबर पर है।
गोवा व हिमाचल जैसे मशहूर पर्यटक स्थल भी गांजा क्रांति में अगुआ भूमिका निभा रहे है। कश्मीर में गांजा का व्यापर लगातार बढ़ रहा है। असम व मध्य प्रदेश भी किसी से कम नहीं हैं और पंजाब को उडता पंजाब की संज्ञा दिया जाना ये स्पष्ट बयां करता है की पुरे देश में गांजा का कारोबार बहुत फल फूल रहा है। अब ये गांजा क्रांति नहीं तो क्या है? इस क्रांति का जश्न मनाइये।
गांजा और भांग का नशा करने वालों की बुद्धि का सही तरीके से विकास नहीं हो पाता। इनका सेवन करने पर अक्ल मंद पड़ जाती है। और ये अच्छा भी है क्योंकि इन्हे न रोटी चाहिए, न रोजगार चाहिए, ठेला खींचो, गांजा पियो और सो जाओ।
जानकार बताते हैं की गांजा पर्यावरण के लिए भी खतरनाक है। पश्चिमी देशों में इसके एक पाउंड को उगाने से लगभग 4,600 पाउंड कार्बन डाइ आक्साइड (CO2) वायुमंडल में फैलता है। लेकिन चलो अच्छा है की कम से कम अपने देश में फैले प्रदुषण से तो कम है। आखिर ये गांजा क्रांति के फायदे ही तो हैं।
इस नशे का सेवन करने वाला युवा परिवार व समाज से कटने लगता है। रचनात्मक सोच व समस्या सुलझाने की क्षमता धीरे धीरे खत्म हो जाती है। एकांत व अकेलापन को पसंद करने लगता है चलिए अच्छा है। एकांत में रहेगा तो सडकों पर भीड़ कम हो जाएगी। नौकरी मांगने वालों की लाइन छोटी हो जाएगी। और निति निर्माताओं की नौकरी देने की चिंता तो ख़त्म होगी।
राष्ट्र की विफलताओं और क्रुरतत्वों से नाखुश लोग विरोध करते हैं, सवाल पूछते हैं, बदलाव के लिए आगे आते हैं, अपनी मांग बुलंद करते हैं। लेकिन चिंता की कोई बात नहीं। खुश होइए की गांजा क्रांति आयी है। न मांगें, न विरोध, न प्रदर्शन। अब कोई बुलंद आवाज नहीं। देश में गांजा क्रांति आयी है। सब मस्त हैं। खुशहाल हैं। देश तरक्की पर है।
































