आरक्षण आंदोलन के नाम पर बांग्लादेश से हिंदुओं को भगाने की जिहादी साजिश – दीपेन मित्रा

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दिल्ली/ढाका, संवाद न्यूज| 

बांग्लादेश के छात्रों का आंदोलन बांग्लादेश की प्रधानमंत्री और वहाँ के सभी हिंदुओं को देश से भगाने के लिए रची गई एक पूर्वनियोजित जिहादी साजिश है। हिंदुओं पर हो रहे हमलों के पीछे पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आई.एस.आई.’, चीन और अमेरिका का हाथ है। यह बांग्लादेश को अस्थिर करने का प्रयास है। इसलिए हम भारतीय सरकार से बांग्लादेश के हिंदुओं को तुरंत बचाने की अपील करते हैंऐसा ढाकाबांग्लादेश स्थित ‘वर्ल्ड हिंदू फेडरेशन बांग्लादेश और यूरोपियन यूनियन चैप्टर’ के प्रधान सचिव दीपेन मित्रा ने कहा। वे हिंदू जनजागृति समिति की ओर से ‘चर्चा हिंदू राष्ट्र की…’ इस विशेष संवाद में ‘फिर एक बार बांग्लादेश में हिंदुओं का नरसंहार?’ इस विषय पर बोल रहे थे।

     इस अवसर पर दीपेन मित्रा ने आगे कहा कि आज बांग्लादेश में 2.5 करोड़ हिंदू हैंलेकिन हिंदू सुरक्षित नहीं हैं। हिंदुओं को किसी भी प्रकार का न्याय नहीं मिलता। बांग्लादेश सरकारनेता या सेना की ओर से हिंदुओं को कोई सहायता नहीं मिलती। अन्य घटनाओं में मानवता पर अत्याचार होते हैंतो संयुक्त राष्ट्र संघमानवाधिकार संगठन बहुत शोर मचाते हैंलेकिन यहाँ बांग्लादेश के हिंदुओं पर अत्याचार हो रहे हैंतब हिंदुओं के लिए कोई कुछ नहीं बोलताक्योंकि उनके लिए हिंदू इंसान नहीं हैं। इसलिए हम भारतीय सरकार से बांग्लादेश के हिंदुओं को तुरंत बचाने की अपील करते हैं।

अगर बांग्लादेश के हिंदुओं को बचाना हैतो भारत को ठोस और आक्रामक भूमिका अपनानी चाहिए!

    पश्चिम बंगेर जन्य’ के संस्थापक सचिव प्रकाश दास ने कहा कि 1972 में जिस इस्कॉन मंदिर ने बांग्लादेश के लोगों को छह महीने तक भोजन दियाउन्हीं लोगों ने इस आंदोलन में उस इस्कॉन मंदिर को जला दिया। 1971 में भारत ने सैन्य कार्रवाई करके बांग्लादेश को स्वतंत्रता दिलाई थी। उस समय 25 लाख हिंदू मारे गए थे और हजारों महिलाओं पर अत्याचार हुआ था। आज वही स्थिति दोबारा हो रही है। छात्र आंदोलन केवल एक मुखौटा है। असल में इस आंदोलन के पीछे जिहादियों की साजिश है। बांग्लादेश के हिंदुओं को न्याय दिलाने के लिए भारत को मजबूत और आक्रामक भूमिका अपनानी चाहिए। जैसे इज़राइल अपने देश और धर्म के लिए लड़ता हैवैसे ही हमें भी आत्मरक्षा के लिए हथियार उठाने की जरूरत है। अगर भारत को बांग्लादेश के हिंदुओं को बचाना हैतो ठोस और आक्रामक कदम उठाने होंगे। ‘दुनिया क्या कहेगी?’ यह विचार छोड़कर ठोस कार्रवाई करनी आवश्यक हैऐसा उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा।

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