संवाददाता/नई दिल्ली : उत्तराखंड सीएम के लिए सतपाल महाराज का दावा सबसे अधिक मजबूत माना जा रहा है| वे हर कोण से फिट बैठ रहे है। उनका राजनीति कैरियर काफी लम्बा रहा।1989 में आध्यात्म की दुनिया के साथ राजनीति में इसलिये आये थे ताकि व्यापक स्तर पर जनता की सेवा कर सकें।
वे दो बार गढ़वाल सीट से सांसद रहे। केन्द्र में रेल राज्य मन्त्री व वित्त राज्य मन्त्री के तौर पर ढाई साल तक रहे। रेल राज्य मन्त्री के अल्प काल उन्होंनें बहुत से काम किये। ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल लाइन की बात हो देहरादून कालसी रेल लाइन का सर्वे रहा हो, टनकपुर-बागेश्वर, देहरादून- सहारनपुर के मध्य, रामनगर से आगे भी रेल लाइन के सर्वे विभिन्न रेलवे स्टेशनों का आधुनिकीकरण रहा हो उनकी देन रहा। इसी प्रकार से उन्होंने कई सीधी रेलसंवाओं को लगवाया। रेल मन्त्री के बतौर उन्होंनें यहां के बच्चो के लिये रेल सुरक्षा बल में भर्ती के द्वारा खोले। सांसद के रूप में उन्होंनें यहाँ की लोकभाषाओं को आठवीं अनुसूची में रखवाने के लिये संसद में मांग रखी। उनके बार-बार मसले को उठाने के बाद राज्य में आशा का संचार हुआ।
2014 के लोकसभा चुनाव से पहले सतपाल महाराज ने उत्तराखंड लोकसभा के पांचो सीटें जीताकर भाजपा की झोली में डालने का वादा पूरा किया| विधानसभा चुनाव से पहले पूरे राज्य में किये गये 3 दिसम्बर 2016 को महापरिवर्तन रैली के दौरान कुल 70 सीटों में से 55 सीटें जीताकर लाने और भाजपा कि सरकार बनाने का वादा भी पूरा किया है| इसके बावजूद भाजपा ने महाराज जी का कद और परिश्रम देखते हुए भाजपा के राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य से नवाजा| जिससे महाराज के पूरे देश में फैले असंख्य भक्तों और समर्थको का लाभ भाजपा को मिल रहा है| जिस प्रकार महाराज ने कांग्रेस को छोड़ा और भाजपा का दामन थामा उससे भाजपा को विकास के नई उड़ान की पंख लगी है और कांग्रेस का पतन के पीछे कोई दैवीय शक्ति काम कर रही है, ऐसा प्रतीत हो रहा है| पूरे उत्तराखंड की जनता में महाराज सबसे लोकप्रिय नेता को मुख्यमंत्री के रूप में देखने का सपना भी साकार होता दिख रहा है| सूत्रों के मुताबिक महाराज का मुख्यमंत्री बनना लगभग तय माना जा रहा है| केवल औपचारिक घोषणा बाकि है|
संसद में लोकसभा अध्यक्ष की अनुपस्थिति में कई बार संसद की कार्यवाही का संचालन भी उन्होंने कई बार किया। संसद की कई उपसमितियों में रहे। सांसद के रूप में सेना की अनेक भर्ती रैलियां उत्तराखण्ड में करवाई। उत्तराखण्ड राज्य आन्दोलन में उनका अविस्मरणीय योगदान रहा। उनकी गैरसैण से दिल्ली तक की पद यात्रा चर्चित रही थी। मुजफ्फरनगर का शहीद स्मारक को बनाने में उनका येागदान रहा। उन्होंने ही सरकार से गैरसैण में विधान भवन बनवाने के लिये पहल की और उसकी आधार शिला रखवाई। दो बार सांसद रहने के बाद वे पहली बार विधायक के रूप में चुने गये है। चुनाव में सभी जगह यही चर्चा थी वे दल से राज्य में सीएम के उम्मीदवार हैं हालांकि दल ने कोई नाम घोषित नहीं किया।
कोश्यारी, खण्डूरी एवं निशंक जी इस समय संसद में रह कर यहां का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं। यदि केन्द्र से किसी को यहां भेजा जाता है तो राज्य को फिर से दो चुनावों को झेलना होगा। निसन्देह भाजपा में समस्त चयनित नेताओं में उनके कद को कोई नेता नहीं है। क्योकि वे ही वही सारे विधायकों में सबसे अधिक प्रभावशाली व काम करने वाले है। आज तक उन पर कोई आक्षेप नहीे है। न उनकी कोई मण्डली ही है। एक साफ छवि वाले नेता की उनकी पहचान है।
दल को जनता ने एक अवसर दिया है। इसलिये इस पर एक विजनरी नेता को ही होना चाहिये। दल के अन्दर महाराज एक विजनरी नेता भी रहे हैं जो कि उनके भाषणों से पता चलता रहता है। भाजपा को भी देखना होगा जिस प्रचण्ड बहुमत से उसे जीत मिली उसको पूरा करने के लिये नेता को वैसा ही व्यक्तित्व भी चाहिए। जब से वे भाजपा में तब से लगातार पार्टी के लिये काम में लगे हैं बीते चुनाव में भी कांग्रेस में हरीश रावत से मतभेद के कारण उन्हानें तकल इस्तीफा दे दिया था तबसे पार्टी को मजबूत करने में लगे हुये थे। बिहार, असम, झारखण्ड, हरियाणा तक उन्हानें मोदी जी के साथ कंधे से कन्धा मिलाकर भाजपा पुरे देश में मजबूत किया। पलायन, रोजगार, खेती, पर्यटन और शिक्षा , स्वास्थ्य जैसे मसलों पर बेहतर रणनीति बनने की उम्मीद है। इसलिए प्रदेश भर के लोग भाजपा नेतृत्व की ओर आशा भरी नज़रों से देख रहे।

































