मणिपुर हिंसाचार द्वारा भारत को अस्थिर करने का विदेशी शक्तियों का षड्यंत्र ! – जनपीस, डिजिटल सनातन योद्धा

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नई दिल्ली| मैतेई (हिन्दूसमाज का दो हजार वर्षाें का इतिहास है तथा वे राजाओं के वंशज हैं। मणिपुर की स्थापना वर्ष 1949 में हुईतब से मैतेई समाज एवं कुकी (ईसाईसमाज के मध्य संघर्ष चल रहा है। मैतेई समाज के अनेक हिन्दू बंधुओं का धर्मांतरण हो रहा है। मणिपुर स्थित चुरचंदपुर में अब मैतेई शेष नहीं रह गए हैं। मणिपुर में ‘सांस्कृतिक नरसंहार’ हो रहा है। मणिपुर के लोगों में अलगाववाद की भावना उत्पन्न कर मणिपुर सहित भारत को अस्थिर करने का प्रयत्न राजकीय दृष्टि से प्रेरित ‘यूरोपियन यूनियन’ एवं विदेशी शक्तियां कर रही हैं। भारत को वैश्विक महासत्ता बनने से रोकने के लिए यह चल रहा हैऐसा प्रतिपादन ‘डिजिटल सनातन योद्धा’ के श्रीजनपीस ने किया। वे हिन्दू जनजागृति समिति द्वार आयोजित विशेष संवाद ‘मणिपुर की हिंसा के पीछे कौन ?’ में बोल रहे थे।

इस समय श्रीजनपीस ने आगे कहा किवर्ष 2008 में कांग्रेस के कार्यकाल में मणिपुर में ‘सस्पेंशन ऑफ ऑपरेशन्स अनुबंध’ लागू किया गया। इसमें केवल कुकी समाज के विद्रोही दलों को शस्त्रास्त्र रखने की अनुमति थीपरंतु मार्च 2023 में यह कानून भाजपा सरकार ने निरस्त कर दिया तथा मैतेई समाज को अनुसूचित जनजाति में समाविष्ट करने के संदर्भ में न्यायालय ने निर्णय लेने का आदेश दिया। इसके साथ ही मणिपुर में बडी मात्रा में अफीम की खेती करनेवाले कुकी समाज की अफीम की खेती भी सरकार ने नष्ट कर दी। ये मणिपुर की हिंसा के प्रमुख कारण हैं। जिस प्रकार मध्य पूर्व आफ्रिका के देश रवांडा में 1994 में चर्च की प्रेरणा से लाख लोगों का नरसंहार किया गयाउसी प्रकार के प्रयत्न मणिपुर में हो रहे हैं क्यायह देखने की आवश्यकता है ।

इस समय ‘सुदर्शन न्यूज’ चैनेल की पत्रकार जोजो नाक्रो नागा ने कहा कि, मणिपुर में मैतेई समाज बहुसंख्यक नहीं है तथा भौगोलिक दृष्टि से भी उनके पास कम प्रदेश है। मणिपुर की वर्तमान परिस्थिति का भारत विरोधी शक्तियों ने लाभ उठाया है। विदेशी शक्तियों ने कुकी समाज को भडकाकर उनसे दंगे करवाए हैं। इसलिए मणिपुर में अनेक स्थानों पर मैतेई समाज के लोगों ने पलायन किया है। मणिपुर में मई महीने में महिलाओं को निर्वस्त्र कर घुमाया गया थापरंतु इसका वीडियो जुलाई में संसद का कामकाज चल रहा थातब सोशल मीडिया पर प्रसारित किया गया। इससे स्पष्ट होता है कि यह सब राजनीतिक दृष्टि से प्रेरित था। मणिपुर में इस घटना के दोषियों को कठोर दंड मिलना ही चाहिए। इसके द्वारा जानबूझकर मैतेई समाज और सरकार को बदनाम किया जा रहा है। 

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