नागरिक कानून राष्ट्र हित में, सभी देशवासी करें सम्मान -सुशीला रोहिला

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नागरिकता कानून संशोधन
नागरिक कानून हम सब देशवासियों के लिए नागरिकों के लिए सुरक्षा कवच है जो लोग इसका विरोध कर रहे है वह अपने देश की सबसे बड़ी हानि कर रहे है। जो इसके विरोध प्रदर्शन में कर रहे है वह अपने देश का नुकसान कर रहे है अपनी ही हानि कर रहे है क्योंकि हम राष्ट्र से बने है। राष्ट्र हम से नहीं। हम होंगे या ना होंगे राष्ट्र तभी भी रहेगा।  हमें राष्ट्र के हित में नागरिकता कानून का सम्मान करना चाहिए और अपनी दूषित भावनाओं पर नियंत्रण कर परमार्थ के कार्य में सहयोग देना चाहिए|
क्योंकि जो भी कार्य राष्ट्र हित में होता है वह परमार्थ ही है। प्यारे भाई बहनों अपनी आतकीवादी प्रवृत्ति का त्याग करो और अपने राष्ट्र की हानि को अपने दूषित मन की दूर्भावना से रोक कर मानवता का संहार होने बचाकर महामानव के श्रेणी में अपना नाम अंकित करने का भरसक प्रयत्न करना चाहिए   ।
गृह मंत्री अमित शाह ने 20 नवंबर को सदन को बताया कि उनकी सरकार दो अलग-अलग नागरिकता संबंधित पहलुओं को लागू करने जा रही है, एक सीएबी और दूसरा पूरे देश में नागरिकों की गिनती जिसे राष्ट्रीय नागरिकता रजिस्टर या एनआरसी के नाम से जाना जाता है|
अमित शाह ने बताया कि ‘सीएबी’ में धार्मिक उत्पीड़न की वजह से बांग्लादेश, पाकिस्तान, अफ़ग़ानिस्तान से 31 दिसंबर 2014 से पहले भारत में आने वाले हिंदु, सिख, बौद्ध, जैन, पारसी और ईसाइयों को नागरिकता प्रदान करने का प्रावधान है|
उन्होंने बताया कि एनआरसी के जरिए 19 जुलाई 1948 के बाद भारत में प्रवेश करने वाले अवैध निवासियों की पहचान कर उन्हें देश से बाहर करने की प्रक्रिया  की कार्य प्रणाली है ।
अब सवाल उठता है कि आख़िर इस क़ानून में क्या है, जिसे लेकर विवाद इतना बढ़ गया है| इस क़ानून के मुताबिक़ पड़ोसी देशों से शरण के लिए भारत आए हिंदू, जैन, बौद्ध, सिख, पारसी और ईसाई समुदाय के लोगों को भारतीय नागरिकता देने का प्रावधान है| यह कानून हमें जाति धर्म समुदाय से ऊपर उठकर हमें भारतमाता की गोद में बिठा रहा है। इसके प्रति हमारी दूषित भावनाओं नहीं होनी चाहिए और सबको भारतमाता के हित में सद्भावना रखनी होगी ।
सच्चा नागरिक
सच्चा नागरिक वही होता है जो अपने विवेक को नहीं लुप्त होने देता। वह अपने देश की भलाई के लिए त्याग करता है। देश का नुकसान नहीं। जापान के छोटे देश हमें बहुत बड़ी प्रेरणा मिलती है जो हर पल हर क्षण अपने देश की सरकारी और गैर सरकारी वस्तुओं का अपनी जान से भी ज्यादा हिफाजत करते है। भारत जैसे राष्ट्र में जन्म लेने का गौरव हमें मिला लेकिन इसकी हिफाजत करने की बजाय हम इसको नष्ट करने पर अपने आप को दाँव पर लगा रहे है। जापान में प्रेत्यक नागरिक को अल्प आयु से ही राष्ट्र के प्रति सद्भावना के जल से सींच कर बड़ा किया जाता है। नागासाकी हिरोशिमा में परमाणु बम की इतनी बड़ी त्रासदी होने पर भी वैज्ञानिकों की भविष्यवाणी को चुनौती मान कर  स्वीकार करते हुए अपनी मेहनत और सच्ची लग्न से यही भविष्यवाणी गलत साबित कर दी थी। कुछ वर्षों बाद वह पुन: एक विकसित राष्ट्र उबर कर दुनिया के सामने खड़ा हो गया है ।
वह सच्चे नागरिक होने की भूमिका को सच्चे हदृय से निभाते है। भारतमाता को विश्व की गुरू का गौरव फिर से प्राप्त  हो तो हम भारतवासियो को कर्तव्यनिष्ठ बन कर सच्चे नागरिक की भूमिका अदा करना चाहिए।

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