एजेंसी| नरेंद्र मोदी सरकार-2 में सुषमा स्वराज शामिल नहीं हुईं। सुषमा स्वराज को लेकर उनके शुभचिंतक लगातार उनके बारे में यह जानना चाहते हैं कि वह आजकल क्या कर रही हैं? चूंकि 2014 से 2019 तक मोदी सरकार पार्ट-1 में विदेश मंत्री रहीं सुषमा स्वराज ने खराब स्वास्थ्य की वजह से 2019 का लोकसभा चुनाव नहीं लड़ा था। वह 2009 और 2014 में मध्यप्रदेश के विदिशा से चुनाव जीतकर सांसद बनीं थी। उन्होंने 2009 से 2014 तक लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष की भी भूमिका अदा की थी। सुषमा स्वराज भाजपा की वरिष्ठ नेताओं में से एक हैं और अपनी अनूठे भाषण शैली की वजह से वह हरदिल अज़ीज भी हैं। चलिए आपको बताते हैं कि सुषमा स्वराज आजकल क्या कर रही हैं।
पूर्व विदेश मंत्री और भाजपा की दिग्गज नेता सुषमा स्वराज आजकल संघ के कार्यक्रमों में सक्रिय हो गई हैं। गुरुवार को सुषमा स्वराज विश्व हिंदू परिषद के एक कार्यक्रम में शामिल हुईं।
पूर्व विदेश मंत्री और भाजपा की दिग्गज नेता सुषमा स्वराज आजकल संघ के कार्यक्रमों में सक्रिय हो गई हैं। गुरुवार को सुषमा स्वराज विश्व हिंदू परिषद के एक कार्यक्रम में शामिल हुईं। विश्व हिंदू परिषद ने यह कार्यक्रम संस्कृत में शपथ लेने वाले सांसदों के सम्मान में आयोजित किया था। हालांकि यह बात भी सच है कि वह फिलहाल राजनीतिक गतिविधियों से दूर रह रही हैं। भाजपा संसदीय बोर्ड की वह प्रमुख सदस्य जरूर हैं पर सरकार गठन के बाद वह सिर्फ एक बार ही एक बार ही इस बैठक में शामिल हुई हैं जब जेपी नड्डा को कार्यकारी अध्यक्ष बनाया जाना था। सुषमा को पार्टी नेताओं से भी कम ही मुलाकात करते हुए देखा गया है। हां, उनकी एक-एक तस्वीर राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति से मिलते हुए जरूर आई थीं। लेकिन एक बात जरूर है कि वह संघ की पसंदीदा नेताओं में से एक हैं और हो सकता है मोदी सरकार भविष्य में इन्हें कोई नई जिम्मेदारी दे दे।
सुषमा स्वराज वर्तमान के वरिष्ठ नेताओं में से एक हैं। वह राज्यसभा और लोकसभा दोनों सदनों की समय-समय पर सदस्य रही हैं। बहुत दिनों के बाद यह पहला मौका आया है जब वह किसी भी सदन की सदस्य नहीं हैं। ऐसे में उनकी कमी सदन में लगातार खल रही है। पक्ष है या विपक्ष, सभी नेता यह मानते हैं कि सुषमा स्वराज की सदन में कमी है। सुषमा नए सांसदों के लिए मार्गदर्शक साबित तो होती हीं, इसके अलावा उनके वक्तव्य और उसके अंदर निहित सूचना अन्य सांसदों को एक नई दिशा भी देती। फिलहाल इस बात की संभावना कम ही है कि वह अभी किसी भी सदन की सदस्य बनें।































