कब तक शहादतें होती रहेंगी -प्रदीप चौहान

0
580

कब तक शहादतें होती रहेंगी। 

भिगोकर ख़ून में वर्दीयां

माताओं के लाल सोते रहेंगे

लिए मुल्क की मोहब्बत सच्ची

कई बेटे खोते रहेंगे

क्या सिलसिले-ए-शहादत

कड़ियाँ यूँ ही संजोते रहेंगी

बताओ ये मुल्क के आकाओं

कब तक शहादतें होती रहेंगी।

माँ जिन्हें लोरियाँ सुनाती हैं

कलाई जिनकी बहनें सजाती हैं

पिता जिन्हें चलना सिखाते हैं

भाई जिनको हँसते हँसाते हैं

क्या पंचतत्व में हो विलीन

आँखें अपनों की यूँ ही रोती रहेंगी

बताओ ये मुल्क के आकाओं

कब तक शहादतें होती रहेंगी।

पत्निया जिनके लिए श्रिंगार करती हैं

बिन्दी सिंदूर से माँग सजती हैं

तीज करवाचौथ उपवास रखती हैं

देख टुकड़े शरीर बेआवाक घुटती हैं

क्या तोड़ मंगलसूत्र सुहाग चूड़ियाँ

बन विधवा यूँ ही विलापती रहेंगी

बताओ ये मुल्क के आकाओं

कब तक शहादतें होती रहेंगी।

नन्हे नौनिहालों की लंगोटिया जाती रहेंगी

छोटी छोटी बेटियों की चोटियाँ जाती रहेंगी

विस्फोटों से जिस्म की बोटियाँ जाती रहेंगी

दर्जनो घरवालों की रोटियाँ जाती रहेंगी

क्या यूँ ही इस हैवान सियासत में

अपनों की अनमोल क़ुर्बानियां जाती रहेंगी

बताओ ये मुल्क के आकाओं

कब तक शहादतें होती रहेंगी।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here