खाद्य पदार्थों के साइड इफैक्ट्स

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एलर्जी का भले ही कोई स्थायी इलाज न हो, लेकिन जिन खाने पीने की चीजों से एलर्जी हो उन से बच कर त्वचा की एलर्जी से बचा जा सकता है. खाद्य एलर्जी के लक्षण बच्चों और शिशुओं में बड़ी आम बात है, लेकिन ये किसी भी उम्र में दिख सकते हैं. संभव है कि जिन खाद्य पदार्थों को आप वर्षों तक बिना किसी समस्या के खाते रहे हों, अचानक ही अब उन से आप को एलर्जी हो जाए. आप के शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली आप के स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचाने वाले सभी संक्रमणों व अन्य खतरों से लड़ कर आप को स्वस्थ रखती है. जब आप की प्रतिरक्षा प्रणाली किसी खाद्य पदार्थ या उस में मौजूद किसी तत्त्व की पहचान किसी खतरे के रूप में कर उस के लिए सुरक्षात्मक प्रतिक्रिया करती है तो खाद्य एलर्जी प्रतिक्रिया का मामला सामने आता है. खाद्य पदार्थों से एलर्जी:- भारत में करीब 3 प्रतिशत वयस्क और 6-8 प्रतिशत बच्चे खाद्य पदार्थ यानी फूड एलर्जी के शिकार हैं. वैसे, किसी को किसी भी चीज से एलर्जी हो सकती है, लेकिन कुछ विशेष खाद्य पदार्थों जैसे गेंहू, राई, बाजरा, मछली, अंडे, मूंगफली, सोयाबीन दूध से बने उत्पाद, सूखे मेवे प्रमुख हैं. कई लोगों को बैगन, खीरा, भिंडी और पपीता से भी एलर्जी होती है. लक्षण… -उलटी व दस्त होना. भूख न लगना. -मुंह, गले, आंखों, त्वचा व शरीर के दूसरे हिस्सों में खुजली होना. -पेट में दर्द और मरोड़ होना. -रक्त का दबाव कम हो जाना. -श्वासमार्ग अवरुद्ध हो जाना. -दिल की धड़कनें तेज होना. हल्के में न लें:- खाद्य एलर्जी के लक्षण हलके से ले कर गंभीर तक हो सकते हैं. सिर्फ इसलिए यह मान लेना कि शुरुआत में छोटीमोटी समस्या हुई थी तो बाद में वही खाद्य एलर्जी बड़ी समस्या खड़ी नहीं करेगी, गलत है. हो सकता है कि जिस खाद्य पदार्थ की वजह से पहली बार हलके लक्षण ही दिखें, अगली बार उस के गंभीर दुष्प्रभाव भी देखने को मिल सकते हैं. एनाफाइलैक्सिस सभी एलर्जी की प्रतिक्रियाओं में सब से गंभीर है. पूरे शरीर में होने वाली एलर्जी की प्रतिक्रिया जान को जोखिम में डालने वाली होती है. यह आप के श्वसन तंत्र को नुकसान पहुंचा सकती है. इस में रक्तचाप में अचानक बहुत कमी आ सकती है तथा यह आप की हृदय गति को भी प्रभावित कर सकती है. एलर्जी वाले खाद्य पदार्थों के सेवन के चंद मिनटों में ही एनाफाइलैक्सिस की स्थिति सामने आ सकती है. इस में मौके पर इपिनैफ्रिन (एंड्रेनालाइन) की सूई के जरिए तुरंत इलाज किया जाना चाहिए. यद्यपि र्कोई भी भोजन ऐसी प्रतिक्रिया का कारक सिद्घ हो सकता है. 90 प्रतिशत ऐसी प्रतिक्रियाओं के लिए मुख्यतया 8 प्रकार के भोज्य पदार्थ जिम्मेदार माने जाते हैं जिन में अंडा, दूध, मूंगफली, मेवे, मछली, शेलफिश या सीपियां, गेहूं, सोया आदि शामिल हैं. एलर्जी की प्रतिक्रिया के परिणामस्वरूप त्वचा, गैस्ट्रोइंटस्टाइनल ट्रैक्ट (पेट की नलियां व आंत), हृदय प्रणाली व श्वसन तंत्र प्रभावित हो सकते हैं. इस का असर हलके से गंभीर तक हो सकता है. खाद्य पदार्थ पेट में पहुंचने के 2 घंटे के भीतर ज्यादातर खाद्य संबंधी लक्षण सामने आ जाते हैं, कई बार ये चंद मिनटों में दिखने लग जाते हैं. कुछ बहुत ही दुर्लभ मामलों में ऐसी प्रतिक्रियाएं 4 से 6 घंटों में होती हैं या उस से भी ज्यादा समय ले सकती हैं. देरी से होने वाली ऐसी प्रतिक्रियाएं ज्यादातर बच्चों में देखने को मिलती हैं, जिन में खाद्य एलर्जी के परिणामस्वरूप एक्जिमा जैसे लक्षण नजर आते हैं. एक अन्य प्रकार की देरी से सामने आने वाली खाद्य एलर्जी फूड प्रोटीन-इंड्यूस्ड एंटेरोकोलाइटिस सिंड्रोम की वजह से होती है. यह पेट व आंत में होने वाली एक घातक प्रतिक्रिया है, जो सामान्यतया दूध, सोया, कुछ खास अनाज व अन्य ठोस खाद्य पदार्थों के सेवन के 2 से 6 घंटों के बाद सामने आती है. दूध छुड़ाने के क्रम में या पहली बार उपरोक्त खाद्य के संपर्क में आने के बाद अकसर छोटे शिशुओं में ऐसी एलर्जी देखने को मिलती है. इस एलर्जी की स्थिति में बारबार उलटी आती है. यह निर्जलीकरण यानी डीहाइड्रेशन का रूप ले सकती है|

एक ही समूह के विभिन्न पदार्थों के लिए एलर्जी की जांच नहीं होती. कई बार जांच के परिणाम पौजिटिव आते हैं, इन से सिर्फ इस बात का ही पता लग पाता है कि एक समूह के अलगअलग खाद्य पदार्थ किसी खास जांच के परिणाम को कैसे प्रभावित करते हैं. जांच का नैगेटिव परिणाम एजर्ली को नकारने के लिए काफी महत्त्वपूर्ण सिद्घ हो सकता है. संभव है कि आप ने कोई ऐसी चीज न खाई हो, जिस के प्रति आप की जांच के परिणाम पौजिटिव आए हैं, लेकिन ऐसे परिणाम की वजह उस से बनी हुई या संबंधित अन्य चीज हो सकती है, जिसे आप ने किसी न किसी रूप में लिया हो. कोई खाद्य पदार्थ आप के लिए खतरनाक है या नहीं, ओरल फूड चैलेंज इस का पता लगाने का सब से बेहतरीन तरीका है. जांच जरूर करवाएं:- जितनी बार एलर्जी के लिए जिम्मेदार संभावित खाद्य पदार्थ का सेवन किया जाता है, खाद्य एलर्जी को उत्प्रेरित करने वाली प्रतिक्रिया सामने आती है. इस के लक्षण अलगअलग व्यक्तियों में भिन्न हो सकते हैं. यह भी जरूरी नहीं है कि आप में भी हर बार एकजैसे लक्षण ही दिखें. खाद्य एलर्जी का असर आप की त्वचा, श्वसन तंत्र, जठरांत्र (पेट व आंत) संबंधी मार्ग व हृदय प्रणाली पर दिख सकता है. हालांकि किसी भी उम्र में खाद्य एलर्जी की समस्या सामने आ सकती है, लेकिन अधिकतर मामलों में बचपन में ही इस के लक्षण नजर आ जाते हैं. अगर आप खाद्य एलर्जी को ले कर आशंकित हैं तो किसी एलर्जी विशेषज्ञ के पास जाएं, जो आप के परिवार के इतिहास से अवगत होने के बाद जरूरी जांच की सलाह देंगे और परिणाम के आधार पर खाद्य एलर्जी के बारे में फैसला लेंगे. स्किन प्रिक टैस्ट के जरिए 20 मिनट में परिणाम का पता लगाया जा सकता है. थोड़ी मात्रा में खाद्य एलर्जी (फूड एलर्जन) युक्त तरल को आप के हाथ या पीठ की त्वचा पर रखा जाता है. अब आप की त्वचा में एक छोटी व जीवाणुरहित सूई चुभोई जाती है ताकि उस तरल का त्वचा में रिसाव हो सके. दर्दरहित यह जांच आप के लिए कुछ हद तक असहज हो सकती है. संभावित एलर्जन वाले स्थान पर, जहां पर सूई चुभोई गई थी, मच्छर के काटने जैसी सूजन विकसित होने की स्थिति में यह माना जाता है कि जांच में एलर्जी के संकेत मिले हैं. पुष्टि के लिए अब ऐसे तरल का इस्तेमाल करते हुए स्किन प्रिक जांच की जाती है, जिसमें एलर्जन मौजूद न हो व इस स्थिति में उस स्थान पर कोई प्रतिक्रियात्मक असर नहीं दिखता है तथा दोनों स्थानों से प्राप्त परिणामों की तुलना संभव होती है. एलर्जी विशेषज्ञ इन जांचों के परिणामों का इस्तेमाल निदान के क्रम में करते हैं. पौजिटिव परिणाम का आना निश्चित तौर पर यह संकेत नहीं देता है कि एलर्जी की समस्या है, जबकि नैगेटिव परिणाम एलर्जी नहीं होने की पुष्टि करता है. एक गंभीर प्रतिक्रिया की संभावना बनी रहने की वजह से किसी अनुभवी एलर्जिस्ट द्वारा उन के क्लीनिक या उस स्थान पर ओरल फूड चैलेंज कराया जाना चाहिए, जहां आपात्कालीन सुविधाएं व चिकित्सकीय उपकरण उपलब्ध हों. प्रबंधन व इलाज:- खाद्य एलर्जी से निबटने का मुख्य तरीका उन खाद्य पदार्थों से परहेज है, जिन से समस्या होती है. खाद्य उत्पादों में मौजूद सामग्रियों की सूची को ध्यानपूर्वक पढ़ें और यह भी जानने की कोशिश करें कि आप को जिन से परहेज है, वे किसी और नाम से तो सूचीबद्घ नहीं हैं. डब्बाबंद खाद्य पदार्थों के उत्पादकों को हमेशा ही एलर्जी के कारक (एलर्जन), इन 8 सब से आम चीजों -दूध, अंडा, गेहूं, सोया, मूंगफली, मेवे, मछली व जलीय शेलफिश (सीपियों) की पहचान कर अपने उत्पादों में उन की मौजूदगी के बारे में सरल व स्पष्ट भाषा में जानकारी देनी चाहिए. वैसी स्थिति में भी इन एलर्जन की मौजूदगी के बारे में जरूर बताया जाना चाहिए जब वे पदार्थ उत्पादों में एडिटिव (उत्पाद की गुणवत्ता में सुधार या उन्हें परिरक्षित करने के लिए) या फ्लेवरिंग (स्वादिष्ठ या सुगंधित बनाने के लिए) के तौर पर इस्तेमाल किए जा रहे हों. एलर्जन से परहेज, कहना आसान लगता है परंतु बहुत मुश्किल काम है. हालांकि सामग्रियों की सूची से इस मामले में कुछ हद तक मदद मिली है, परंतु कुछ खाद्य पदार्थ इतने आम हैं कि उन से बच पाना चुनौतीपूर्ण कार्य है. खाद्य एलर्जी से ग्रसित बहुत लोग सोचते हैं कि क्या उन की यह स्थिति हमेशा ही बनी रहेगी. इस का कोई निश्चित जवाब नहीं है. संभव है कि दूध, अंडे, गेहूं व सोया से होने वाली एलर्जी की समस्या समय के साथसाथ खत्म हो जाए, जबकि मूंगफली, मेवे, मछली व सीपियों से होने वाली एलर्जी की समस्या पूरी जिंदगी बनी रह सकती है. बाहर खानापीना:- बाहर रैस्टोरैंट आदि में खाते वक्त अतिरिक्त सावधानी बरतें. जरूरी नहीं है कि सूची में मौजूद हर पकवान में मौजूद सभी सामग्रियों की जानकारी वेटर को हो. हालांकि यह पूरी तरह आप की संवेदनशीलता पर निर्भर करता है. हो सकता है कि आप ने रसोई या रैस्टोरैंट में प्रवेश किया और आप एलर्जी के शिकार हो गए. एनाफाइलैक्सिस:- खाद्य एलर्जी की वजह से उभरने वाले लक्षण हलके से ले कर जान को जोखिम में डालने वाले तक हो सकते हैं, किसी भी ऐसी प्रतिक्रिया की भविष्यवाणी कर पाना संभव नहीं है. हो सकता है कि जिस खाद्य पदार्थ की वजह से किसी व्यक्ति में पहली बार हलके लक्षण ही दिखें, अगली बार उस के गंभीर दुष्प्र्रभाव, एनाफाइलैक्सिस भी देखने को मिल सकते हैं. इस दौरान अन्य समस्याओं के साथ श्वास में परेशानी व रक्तचाप में औचक गिरावट देखने को मिल सकती है. एनाफाइलैक्सिस का सब से पहला इलाज इपिनैफ्रिन (एड्रीनालीन) है. एलर्जन के संपर्क में आने के बाद एनाफाइलैक्सिस के लक्षण दिखने में सिर्फ चंद सैकंड या मिनट का समय लगता है, पलभर में स्थिति इस कदर बिगड़ सकती है कि यह आप के लिए घातक सिद्ध हो सकती है. नैदानिक जांच में एक बार एलर्जी की पुष्टि होने के बाद, आप के एलर्जी विशेषज्ञ आप को इपिनैफ्रिन औटो-इंजैक्टर की सलाह देते हैं तथा इसे इस्तेमाल करने का तरीका बताते हैं. अगर आप सांस में तकलीफ, बारबार खांसी, नब्ज की गति में बदलाव, गले में जकड़न, निगलने में समस्या जैसे गंभीर लक्षण या शरीर के भिन्नभिन्न हिस्सों में चकत्ते, त्वचा पर सूजन के साथसाथ उलटी, दस्त या पेटदर्द का अनुभव करते हैं तो शीघ्र ही इपिनैफ्रिन का इस्तेमाल करें. मां का दूध सर्वोत्तम:- वर्ष 2013 में, अमेरिकन अकेडमी औफ पीडियाट्रिक्स ने एक अध्ययन प्रकाशित किया और पहले किए गए शोध के नतीजे का समर्थन करते हुए बताया कि जितने लंबे वक्त तक संभव हो, मां का दूध दिया जाना चाहिए. जो खाद्य एलर्जी की संभावनाओं में कमी लाता है. कुछ देशों में लोगों के बीच इस बात की आदत सी डाल दी गई है कि 3 साल तक की उम्र तक के बच्चों के मामले में उच्च एलर्जी वाले भोज्य पदार्थों, जैसे मूंगफली, मेवे, समुद्री खाद्य पदार्थ के समावेश में अधिक से अधिक देरी की जाए. (पीडियाट्रीशियन, प्राइमस सुपर स्पैशलिटी अस्पताल, नई दिल्ली )

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