ममता तिवारी/कुशीनगर : कुशीनगर जिले में स्वच्छ भारत की तस्वीर कागज से जमीन पर उतरे तो कैसे जब सरकारी योजनाओं को लाभ दिलाने वाले पलीता लगाने में जुटे हों। जिसमें शौचालय निर्माण न कराकर इस धनराशि 1,66 करोड़ खा गये। कुशीनगर जिले की सात नगर पंचायतों में शौचालय के लिए 1,66 करोड़ मिले। और शौचालय कही जमीन पर नही दिखा। हद तो यह है कि इस धांधली को रोकने के बजाए दूसरी किश्त भी जारी कर दी गई। सच्चाई तब सामने आई जब इस को लेकर जिलाधिकारी ने नकेल कसी। पता चला कि शौचालय तो कही बने ही नही हैं।
जिलाधिकारी ने सख्त कदम उठाते हुए शौचालय बनवा लेने तक या फिर सरकारी धन वापस कोष में जमा करने तक बिजली पानी रोक देने का आदेश जारी कर दिया है। स्वच्छ भारत के सपने को साकार करने के लिए विभाग ने जिले के कप्तानगंज, रामकोला, पडरौना, सेवरही, कसया, हाटा नगर पंचायत के शहरी पात्रों का चयन कर 2083 लोगों को शौचालय बनवाने के लिए धन आवंटित किया। पहली किस्त चार हजार रुपये दी गई और उपभोग करने का प्रमाण पत्र देने के बाद बिना जांच किए ही पुन चार हजार रुपये की दूसरी किस्त भी दे दी गई। दो वर्ष पूर्व मिले इस सरकारी धन का पात्रों ने शौचालय बनवाने की जगह खुद उपभोग कर लिया और जमीन पर कही शौचालय बना ही नही। शौचालय के नाम पर इतनी बड़ी धनराशि पात्रों द्वारा डकारने के बाद विभाग पूरी तरह से चुप्पी साधे रहा। वहीं जिलाधिकारी आन्द्रा वामसी ने गांवों के साथ शहरी पात्रों के शौचालय के सत्यापन कराई तो जांच में यह सामने आया कि 2083 में से एक भी शौचालय जमीन पर नही बने हैं। इस के बाद डीएम ने कार्रवाई का आदेश दिया। इस सम्बन्ध में जिलाधिकारी ने बताया कि काफी गंभीर मामला है।
सरकारी धन के गबन की बात कहते हुए कहा कि इतने बड़े घोटाले को लेकर विभाग ने कार्रवाई नही की इस की भी जांच होगी। कहा कि धन लेने वाले पात्र जब तक शौचालय नही बनवा लेते या धन वापस नही करते तब तक बिजली व पानी जैसी मूलभूत सुविधां रोक दी जाए।































