संवाददाता/नई दिल्ली। भारतीय समाज की कई कुरीतियों में से एक है ‘दहेज प्रथा’। वर्तमान में बिना दहेज के किसी शादी की शायद कल्पना भी नहीं की जा सकती है लेकिन दिनांक 16/04/2019 को दिल्ली के फतेहपुर बेरी के रहने वाले धर्मेंद्र तंवर ने अपने दो बेटों आशीष और गौरव तंवर की शादी बिना दहेज करके न सिर्फ गुर्जर समाज बल्कि पूरे भारतीय समाज के सामने मिसाल पेश की है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ का जाे नारा दिया है, उसे सही मायने में पूरा किया गया है। अगर इस तरह समाज में सभी करेंगे तो किसी भी बेटी के पिता को उसकी शादी के लिए चिंता नहीं करनी होगी।

इतना ही नहीं इस शादी में शराब व आतिशबाजी का बिलकुल भी उपयोग नहीं किया गया और इसके साथ पर्यावरण का भी विशेष रूप से ख्याल रखा गया । उन्होंने अधिकतर निमंत्रण कार्ड के स्थान पर डिजिटल निमंत्रण पत्र वितरित किए। जिससे की कागज और समय की काफी बचत हुई जिसकी वजह से कई पेड़ कटने से बचे। हमें उम्मीद है कि धर्मेंद्र भाई की राह पर आगे भी लोग चलेंगे और अपने समाज को दहेज प्रथा, शादी में शराब /आतिशबाज़ी व कागज से बने कार्ड बांटने जैसी गलत परम्पराओं से मुक्त में अपना योगदान देंगे। कार्ड मुक्त हुआ शादी, डिजिटल इंडिया को दिया बढ़ावा|
धुरन्धर टाइम्स संवाददाता से हुई बातचीत में उन्होंने बताया कि यह प्रेरणा मुझे आध्यात्मिक गुरु परमपूज्य श्री सतपाल जी महाराज के सानिध्य से प्राप्त हुई।






























