तीन माह की सरकार पर अपनों के साथ गैरों का प्रहार

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देहरादून :  उत्तराखंड सरकार को शपथ लिए भले ही अभी तीसरे माह में प्रवेश किया हो लेकिन अभी से इस सरकार को अस्थिर करने की योजनाएं प्रारंभ हो गई है। सचिवालय के शौचालय में भारी मात्रा में शराब की खाली बोतलों का मिलना इस बात का प्रमाण है कि सरकार शासन सचिवालय प्रशासन को सुधारने की ठोस कार्य प्रणाली अपना रही है, तो कुछ कर्मचारी इसे धता बताने पर आमदा हैं। एक लंबे अरसे से सचिवालय में ऐसे लोगों का जमावाड़ा रहा है, जो कार्य संस्कृति के पोषक नही हैं।

पूर्व मुख्यमंत्री डॉ रमेश पोखरियाल निशंक, मेजर जनरल भुवन चंद्र खंडूरी ने सचिवालय की कार्य संस्कृति को सुधारने का प्रयास किया था और सरकार का यह प्रयास रंग भी लाया था, लेकिन भाजपा सरकार के जाते ही स्थिति जस की तस हो गई। एक लंबे अरसे से व्यवस्था सुधारने के लिए मंत्रियों ने छापे तक मारे और अधिकारियों को निर्देश भी दिया गया, लेकिन बात जहां की तहां ही रही। आज भी सचिवालय में शराबनोशी हो रही है। इस बात से इंकार नहीं किया जा सकता, लेकिन सचिवालय प्रशासन की कार्यप्रणाली भी इससे स्पष्ट होती है। एक ही दिन सचिवालय के शौचालय में शराब की बोतलों का मिलना। उसी दिन भाजपा के एक पूर्व प्रवक्ता द्वारा मुख्यमंत्री को झोलाछाप कह देना इस बात का संकेत है कि कहीं न कहीं कुछ लोग नहीं चाहते थे कि वर्तमान सरकार स्थिरिता से अपना कार्यकाल पूरा करे। इसी कड़ी में वरिष्ठ मंत्री डॉ हरक सिंह रावत के बयान को भी देखा जा सकता है। डॉ हरक सिंह अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के उत्पाद हैं, जो नाराजगी के कारण कांग्रेस में चले गए थे, लेकिन उन्होंने कांग्रेस में उनकी कार्यशैली से नाराजगी जताई और पार्टी छोड़ दी और आज भाजपा के वरिष्ठ नेताओं में हैं। उनकी मुखरता भी पार्टी के लिए समस्या का कारण बन सकती है। डा. हरक सिंह तेज-तर्रार मंत्रियों में हैं और उनकी कार्यशैली भी चटख मंत्रियों जैसी है।

वरिष्ठ मंत्री एवं दिग्गज नेता सतपाल महाराज पर्यटन विभाग के कुछ अधिकारियों के कार्यशैली से नाराज हैं। नागरिक उड्डयन विभाग की मनमानी से सतपाल महाराज अपने को उपेक्षित महसूस कर रहे हैं। सतपाल महाराज ने इस बात की जानकारी मुख्यमंत्री को दी है तथा उनसे नागरिक उड्डयन विभाग की मनमानी दूर करने का आग्रह किया है।

महाराज का कहना है कि नागरिक उड्डयन विभाग के मनमानेपन के कारण दो बार वे कार्यक्रमों में नहीं पहुंच पाए। महाराज के अनुसार यह इस बात का संकेत है कि कुछ लोग उन्हें पिछड़ा साबित करने पर आमदा हैं। इसके लिए उन्होंने मुख्यमंत्री को चिट्ठी भी लिखी है। दूसरी ओर कुछ मंत्रियों का अति उत्साह भारी पड़ रहा है,जो आचरण और सेवा नियमावली के संदर्भ में बहुत ज्यादा सचेत नहीं हैं। यह सब कुछ महज तीन माह में ही हो रहा है, जबकि मुख्यमंत्री ने धीरे-धीरे विकास की गति बढ़ाने के साथ-साथ नौकरशाही को चुस्त-दुरुस्त करने का काम किया है। इसी बीच में यह सबकुछ घटनाक्रम एक साथ घटने लगे हैं। कहा तो यहां तक जा रहा है कि कांग्रेस से आए विधायकों को ज्यादा महत्व देने के कारण भाजपा के भी कुछ विधायक असंतुष्ट हैं, लेकिन कोई भी विधायक इस संदर्भ में मुंह खोलने को तैयार नहीं हैं। मात्र तीन माह में ही मंत्रियों की नाराजगी तथा मुख्यमंत्री को घेरने का प्रयास कहीं न कहीं किसी साजिश का अंग लग रहा है। निश्चित रूप से यह उन लोगों का कारनामा हो सकता है, जो मुख्यमंत्री को कुर्सी पर नहीं देखना चाहते।

भाजपा प्रदेश अध्यक्ष अजय भट्ट का कहना है कि सचिवालय में बोतलें मिलना दुर्भाग्यपूर्ण है। जिसने यह कार्य किया है वह बख्शा नहीं जाएगा। मुख्यमंत्री सचिवालय की कार्यप्रणाली सुधारने में जुटे हुए हैं। भाजपा पूर्व प्रवक्ता शादाब शम्स के बयान की चर्चा करते हुए कहा कि अजय भट्ट ने कहा कि यह मुख्यमंत्री के पक्ष में दिया गया बयान है। मुख्यमंत्री सत्ता की चिंता नहीं करते और संघ के प्रचारक के रूप में अपना काम करते रहते हैं। यह मुख्यमंत्री के श्रेष्ठ कार्यप्रणाली का प्रतीक है। इस बयान को मीडिया ने तोड़ामरोड़ा जिसके कारण यह चर्चा में आ गया।

 

साभार : वेबवार्ता

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