सत्संग ही बच्चों को संस्कारित करने का एकमात्र स्कूल:साध्वी दर्शनी बाई

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मेरठ कैण्ट, 01 जनवरी। आध्यात्मिक और सामाजिक संस्था मानव उत्थान सेवा समिति की शाखा वेस्ट एण्ड रोड (मंदिर मार्ग) मेरठ कैण्ट पर स्थित मानव धर्म मंदिर में आज नव वर्ष और श्रीयांस जी का पावन जन्मोत्सव बड़े धूमधाम से मनाया गया। संस्था की जिला मेरठ प्रभारी साध्वी दर्शनी बाई जी ने अपने विचार रखते हुए कहा कि आज हमारा सौभाग्य है कि हम सभी सही सलामत नये वर्ष में प्रवेश कर रहे है।

समाजसेवी श्री सतपाल जी महाराज की प्रेरणा से इस कार्यक्रम में अपने विचार रखते हुए दर्शनी बाई जी ने कहा कि सत्संग ही हमारे बच्चों को संस्कारित करने का एकमात्र स्कूल है। आज जिस दिशा में समाज और समाज के लोग जा रहे है उस पर हमें बहुत बहुत गहराई से चिंतन करना होगा। समाज को आज दिषा निर्देशन की अत्यंत आवश्यकता है। आज लोग नया साल मनाने के लिए घर से निकल कर बहुत दूर-दूर तक जाते है और कितने जीवों को मारकर अपना आहार बनाते है। लेकिन इसका विपरीत प्रभाव देखने को मिलता है। गलत आहार की वजह से बच्चों में अच्छे संस्कार नही बन पाते है। इसलिए सबसे अच्छा पिकनिक और त्योहार सत्संग है, बच्चों में अच्छे संस्कार का बीजारोपड़ किया जाता है, एवं व्यक्ति मानव से महामानव बनता है।

सत्संग की महिमा सुनाते हुए कहा कि नन्दा नाई ने सत्संग सुनने के चक्कर में दुर्योधन की रात्रि सेवा करने नही पहुँचा तो स्वयं भगवान को भेष बदल कर उसकी सेवा करने जाना पड़ा था। सेवा से प्रसन्न होकर दुर्योधन ने सुबह जब नन्दा को बुलाया तब नन्दा को संदेह हुआ के मेरे बदले स्वयं भगवान ने सेवा किया तो दुर्योधन की सेवा से मुक्त होने की प्रार्थना की और सेवा से प्रसन्न दुर्योधन ने नन्दा नाई को हमेशा के लिए मुक्त कर दिया। यह होता है एकाग्र मन से सत्संग सुनने का प्रभाव। हम लोग भी मीरा, द्रोपदी,, विदुरानी, भक्त ध््रुाव और प्रहलाद जैसी सच्ची निष्ठा और सच्चे भाव के द्वारा अपना उद्धार कर सकते है। नये साल में प्रतिज्ञा करके अपना भजन साधना करे और अपना कल्याण करे। नये साल की और श्रीयांस जी के जन्मोत्सव की सबको शुभकामना और मंगलकामना दी।

साथ में साध्वी धनिष्ठा बाई जी ने भी अपने सत्संग विचार रखते हुए प्रेरणादायक भजन सुनाये। प्रातःकालीन विशाल शोभा यात्रा भी निकाली गयी।  साथ में शाखा प्रधान देवेन्द्र सिंह, बी.एस.गुप्ता, राकेश गोयल, नेपाल सिंह, चन्द्रशेखर, नेपाल चैहान, मानव सेवा दल के स्वयं सेवक और शाखा के समस्त कार्यकर्ताओं ने कार्यक्रम को सफल बनाने में अपना योगदान दिया। आरती-प्रसाद और भण्डारे के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ।

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