
हिम बहादुर सोनार/सिलीगुड़ी। रवि की रूहानी बदलेगी, सतलज का मुहाना बदलेगा,
शौक में यह जोश रहा तकदीर का जामा बदलेगा।
बेज़ार न हो बेज़ार न हो, यह सारा फसाना बदलेगा,
कुछ तुम बदलो कुछ हम बदले, तब तो यह जमाना बदलेगा।
सदभावना सम्मेलन में अपार जनसमूह को संबोधित करते हुए प्रथम दिन मानव धर्म के प्रणेता सतपाल जी महाराज ने कहा कि पहले स्वच्छता अपने आप में लाना होगा फिर दुसरो पर ला सकते है। जब अंग्रेज आये तो हमारे दार्जीलिंग, डुवार्स, आसाम के चाय बागानों को बनाया। उसमे हमारे आदिवासी लोग कार्य करते थे। अंग्रेज ने चाय बागानों के दरवाजे पर शराब की दुकान खोल रखी थी।मज़दूर पैसे लेकर शराब पीने में पैसे को समाप्त करते थे। इससे उनके घरों में पैसे को लेकर मारपीट, घर पर अशांत, बच्चे को स्कूल नही भेज पाना बहुत बड़ी समस्या थी। हम कई चाय बागानों में गए। उन क्षेत्रों में ज्ञान का प्रचार हुआ। लोग अब धीरे धीरे समझने लगे है। ज्ञान का विकसित होने से उनका जीवन मे रहन-सहन बदल गया। उनका जीवन में परिवर्तन को देख कर चाय बागान के लोग हमे आश्रम बनाने के लिए जमीन तक दे रहे है। आश्रम निर्माण से मजदूर आगे बढ़ेंगे।इससे चाय बागानों की स्थिति भी सुधरेगी। इसलिए स्वच्छता अपने अंदर आना जरूरी है। हम अपने परिवार को लंका भी बना सकते है या फिर विभीषण का कुटिया भी।
श्री महाराज जी ने कहा कि सिलीगुड़ी, दरर्जीलिंग तथा पूरे भारत को स्वच्छ रखना है तो पहले हमें अपने आप को स्वच्छता को लाना होगा। पहले हम बदले, फिर घर बदलेगा उसले बाद गांव, मोहल्ला, जिल्ला, प्रान्त, देश तब दुनिया बदलेंगी। इसके लिए हमे सदभावना का आवश्यकता है। लोग दार्जीलिंग, सिक्किम में बर्फ देखने जा रहे है । लेकिन श्रद्धालु लोग सदभावना सम्मेलन में आ रहे है। यहाँ तो बर्फ भी नही है फिर लोग आध्यात्मिक प्रचार का परिचायक बनने आ रहे है। यहाँ से ज्ञान प्रचार का प्रसारण हो रहा है। इसलिए शांति का संदेश, एकता को समझना चाहिए। एक ही शक्ति ने हम सब को बनाया है। बगीचे को संवारना व बिगाड़ना आपका काम है। यह बगीचा परमपिता परमात्मा का है। चाहे किसी भी नाम से पुकारो। इसलिए इस बगीचे को संवारना है।सदभावना सम्मेलन से यही प्रेरणा सबको लेना चाहिए।
यहाँ पर अपार जनसमूह ऊर्जा को प्राप्त करने के लिये सदभावना सम्मेलन में सम्मिलित है।सद्भावना का मतलब होता है दुर्भावना को समाप्त करना। कुवृत्ति समाज को बांट रही है। लड़ाई तथा विभाजन ला रहा है ऐसे कुभावनाओं को समाप्त कर सद्भवना लाना होगा। अक्सर लोग श्री महाराज जी से पूछते है कि आप ज्यादातर पूर्वोत्तर क्षेत्रों को ध्यान देते है। पूर्वोत्तर आसाम, सिलीगुड़ी, सिक्किम में अधिक सदभावना कार्यक्रम का आयोजन होता है। भारत देश के प्रत्येक हिस्से में साधु-संतों का आगमन होना चाहिए तांकि लोगो को सदभावना का संदेश मिले। जब जगत् जननी माता श्री राजेश्वरी दार्जीलिंग के पहाड़ो में आती थी तो माता जी के लिए भक्तों ने ठहरने के लिए व्यवस्था किया था। श्री माता जी को लोग लाल रोली चढ़ाते थे। “लाली तेरे लाल की जिन देखो तित लाल, लाली देखन मैं गई हो गई लाल। श्री महाराज जी बीते दिनों को याद करते हुऐ श्रद्धालुओ को बताया कि मुझे आज भी वो दिन याद है जब श्री माता जी टियोक, मिरिक में भीम दाजु के साथ धीरे धीरे प्रचार को बढ़ाया इन क्षेत्रों से विशेष प्रेम व लगाव रहा। आज भीम दाजु हमारे बीच नही है। लोग श्री माता जी से विशेष प्रेम करते थे माता जी भी उनको उतना ही प्रेम देती थी। गुरु महाराज जी को लोग प्रेम करते है गुरु महाराज जी भी उतना ही प्रेम करते है। भगवान का भक्ति प्रेम का विषय है।
श्री गुरु महाराज जी ने संबोधन में उदाहरण देते हुए बताया कि एक व्यक्ति के आँख में जलन और पेट मे दर्द हुआ। वह वैध के पास गया अपनी समस्या बताया। डॉक्टर ने दो पुरिया दी। एक में पेट दर्द का तो दूसरी में आखों के जलन का। गलती से पुड़िया बदल गया। जिसमे काजल आँखों के जलन में लगाना था उसे पेट मे डाल दिया और जिसको पेट मे डालना था उसे आखों में लगा लिया। अब परेशानी होने लगी फिर डॉक्टर के पास गया। गलती थी कहा डॉक्टर भी सही है दवा भी सही था । गलती उसका उपयोग करने में हुआ।यही घटना हम सब के साथ हो रहा है हमे भगवान से दिल लगाना चाहिए वहाँ पर माया से दिल लगा रहे है। जहाँ भौतिकवादी माया का विचार करना चाहिए। एक सज्जन व्यक्ति ने कहा कि भगवान को जब तक देखेंगे नही तो मानूँगा भी नही। यह तो अच्छी बात है। अगर जहर दे दिया जाए तो आप खाओगे क्या ? नही, क्योकि जहर खाने से मर जाएंगे। जहर को खाकर अनुभव करके तो देखो ? अनुभव करने के लिये जिंदगी बचेगी ही नही।अब बिना खाएं कैसे अनुभव करोगे। किसी बोतल में कंकाल का फोटो है उस पर जहर लिखा है। इसे खाएंगे तो मर जायेंगे। बिना खाये जहर को हम मान लिया। हम भगवान को विश्वास नही करते उन्हें नही मानते है।यह हमारा दुर्भाग्य है।जब महान् पुरुष आते है जहाँ भक्ति करनी चाहिए और विचार करना चाहिए। जैसे ड्राइवर गाड़ी चलाता है। उसके गाड़ी से हवा निकल जाता है वह पूछता है कि हवा कहा है। लोग उन्हें समझाने लगे कि हवा ऊपर, निचे, दाएं, बाएं, मुझमे, तुझमे सब जगह है। मान लेने से गाड़ी चलेगी नही। गाड़ी का टायर में हवा साकार रूप से भरेगा तो ही आगे बढ़ेगी।जब-जब नकारात्मक सोच बढ़ता है तो सकारात्मक प्रवेश करता है। श्री महाराज जी ने कहा कि मेघालय के शिलांग में माइनिंग के दौरान मजदूर फंसे हुए है। भगवान से प्रार्थना करते है कि सभी लोग वहां से सुरक्षित बाहर निकल जाए। वहाँ पर विपदा आई है। बचाव दल के साथ एन डी एफ के टीम वहाँ पहुँच चुका है। जहाँ समस्या होता है वहाँ समाधान पहुँचता है।
जब जब होई धर्म की हानि, बढाई असुर अधम अभिमानी। तब-तब प्रभु धर मानुष शरीर, हरे कृपानिधि सज्जन पीड़ा। जो सदभावना का बात करता है उसका सोच उच्चा होता है। सिलीगुड़ी के महानंदा नदी के किनारे जंगल में मंगल हो रहा है। नदी के किनारे शांत वातावरण है। यहाँ पर पुलिस भी नही है। पुलिस भी बैठकर सत्संग सुन रहे है। यहाँ पर लोग अनुसाशन में रहते है।स्वतः नियंत्रण है, शांति है। जब मन मे शांति होती है तो बाहर का वातावरण भी शांति होगी। सदभावना सम्मेलन में सर्वोपरि भाव सेवा करने का होता है। यह प्रत्येक व्यक्ति सेवा कर रहा है। सेवा की भावना से ही स्वर्ग बनता है।
इसके बाद माता अमृता जी ने संत-महात्माओं एवं श्रद्धालुओं भक्तगण को अपने आशीर्वचन में कहा ही भक्त को गुरु महाराज जी के आज्ञा में चलना चाहिए। तब जाकर जीवन कल्याण हो सकता है। जगह जगह ज्ञान का प्रचार हो रहा है इसमें सभी भक्तों का सहयोग जरूरी है। आज सदभावना सम्मेलन में गुरु दरबार में आप लोग आए है अगर आपको आत्मा ज्ञान न मिलता तो नववर्ष में न जाने पार्टी पिकनिक में जाकर मदिरा इत्यादि का सेवन करके लड़ाई झगड़ा होता। इससे आप सभी भक्तगण मुक्त है। नववर्ष सभी भक्तों को अपना जीवन को कल्याण का मार्ग में लगाना चाहिए।
इसके बाद विभुजी महाराज ने अपना अमृतमय प्रवचन सुनाया। कार्यक्रम के दौरान सुमधुर भजन से पूरा पंडाल भक्तिमय हो गया था। लोग अपने गुरुदेव के आने से भजनों में खुशी से झूम रहे थे।
दो दिवसीय सदभावना सम्मेलन में भाग लेने यूनाइटेड किंगडम, सुर्जलैंड, अर्जेंटीना, हांगकांग, अमेरिका, पड़ोसी देश नेपाल, भूटान, उत्तराखण्ड, दिल्ली, गुजरात, उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड, कोलकत्ता, आसाम, सिक्किम सहित देश विदेशों के भक्तगण श्री महाराज जी का आशीर्वचन सुनने सिलीगुड़ी पहुँचे हुए थे। श्री महाराज जी के जेष्ठ पुत्र विभुजी महाराज द्वारा उठाये गए गरीब बच्चों के लिए सरकार से मदद लिए बिना ‘मिशन एजुकेशन’ पूरे देश भर में कार्यक्रम चल रहा है। श्री महाराज जी ने बताया कि हालही में सूरत, गुजरात में सत्रह टन कॉपिया, पेन्सिल, रब्बर इत्यादि निःशुल्क वितरण किया गया है। इससे गरीब बच्चों के पास कॉपिया नही रहने से स्कूल नही जा पाते थे। मिशन एजुकेशन के तहत जिनके घर मे उपयोग किया हुआ कॉपियों में से खाली बचे पन्ने को निकाल कर उसे बाइंडिंग किया जाता है। हर स्कूल से इस तरह का कॉपी कलेक्शन कर गरीब बच्चों को मदद किया जा रहा है जो कि भारत में तकरीबन लाखो बच्चों को लाभ मिल रहा है। इस तरह का आयोजन सिलीगुड़ी सहित पूरे उत्तर पूर्वांचल में होना चाहिए।श्री महाराज जी, माता अमृता जी, विभुजी महाराज, आराध्या माता जी, सुयश जी महाराज जी, श्रीयांश जी महाराज ने प्रेमी भक्तों को दर्शन देकर कृतार्थ किया। नववर्ष के आगमन में अपने गुरुदेव का दर्शन पाकर भक्तगण भावविभोर हो उठे।
श्रीयांशजी का पावन जन्मोत्सव
सालूगाड़ा के मानव धर्म आश्रम में आयोजित दो दिवसीय सद्भावना सम्मेलन का समाप्ति के बाद एक जनवरी को श्री श्रीयांशजी के पावन जन्मोत्सव बड़े धूमधाम से मनाया गया। सुबह 10 बजे से सत्संग पण्डाल में यज्ञ-हवन एवं पूजन प्रारम्भ हुआ ! हजारों की संख्या में भक्तगण जन्मोत्सव को मनाने आश्रम परिसर में ठहरे हुए थे। पूजन के दौरान मंच पर श्री श्रीयांशजी बाललीला करके भक्तों के मन को लुभाते रहे थे। सत्संग पंडाल और मंदिर परिसर को रंगबिरंगे फूलों और बैलूनों से सजाया गया था ! सदगुरुदेव श्री सतपालजी महाराज ने श्रीयांशजी को जन्मदिन की शुभकामना देते हुए कहा कि महापुरुषो के घर महान आत्मा का जन्म होता है जो उनके आध्यात्मिक कार्यों को आगे बढ़ाते है ।
उन्होंने कहा कि जो गुरु की आज्ञा में रह कर भजन करता है उसे ही भक्ति मार्ग में सफलता मिलती है l उन्होंने सद्भावना मंच से सभी देशवासियो को सत्य और धर्म के मार्ग पर चलते हुए अपने देश को मजबूत करने की सलाह दी । उत्तराखंड के संस्कृति-मन्त्री होने के नाते हाल ही में बनी फिल्म केदारनाथ को बैंड करने की बात का जिक्र करते हुए उन्होने कहा कि अभिव्यक्ति की स्वतन्त्रता का ये मतलब नहीं कि किसी धर्म और संस्कृति का मजाक उड़ाया जाय । हम दूसरे धर्म का सम्मान करते हैं तो हमारे सनातन धर्म का भी सम्मान होना चाहिए । फिल्म बनाने वाले को इसका ध्यान रखना चाहिए कि ऐसा फिल्म न बनाये जो वास्तविकता से दूर किसी के जाति धर्म और संस्कृति को गलत तरीकों से प्रस्तुत करे तथा जिससे देश में कानून व्यवस्था बिगड़े। पूज्य माता श्री अमृताजी सहित सभी दिव्य परिवार अपने छोटे श्रीयांशजी को जन्मदिन की शुभकामना दी । पूज्य माता श्री अमृताजी ने भक्तों को गुरु-आज्ञा रूपी किले में रहकर भजन भक्ति करने और आत्मज्ञान के प्रचार में संत-महात्माओं का सहयोग करने की सलाह दी। माता श्री आराध्या जी ने भक्तों को नये वर्ष की शुरुआत अध्यात्म और योग से करने की सलाह दी ।





























