भगवान को जाने बिना हृदय में बदलाव और शांति संभव नहीं – म.अम्बालिका बाई

0
1178

शिवम गुप्ता/कोथावां/हरदोई| मानव उत्थान सेवा समिति श्री हंस योग आश्रम हरदोई की शाखा संडीला में दो दिवसीय ‘सद्भावना सन्त सम्मेलन’ 9 व 10 दिसम्बर को उन्नाव रोड स्थित बाबा विश्वनाथ मन्दिर के प्रांगण में धूमधाम से संपन्न हुआ|

      इस कार्यक्रम में परम्पूज्य सद्गुरु देव श्री सतपाल जी महाराज जी की शिष्या महात्मा अम्बालिका बाई जी ने बताया कि तुमने बड़ी-बड़ी डिग्रियां भी प्राप्त कर ली, लेकिन भगवान को नहीं जाना उनके पावन नाम को नहीं जाना तो तुम्हें शांति नहीं मिल सकती| तब यह सब किसी काम की नहीं है यह सब यही छोड़कर जाना पड़ेगा| इस तरह भौतिकवाद से कभी मनुष्य को शांति नहीं मिल सकती| इसलिए उस ज्ञान के संबंध में समय के सच्चे सद्गुरु की तलाश कर आत्मज्ञान प्राप्त करे और प्रकाशमय जीवन व्यतीत करे| ह्रदय में वह ज्ञान होना चाहिए| 

      उन्होंने भक्तसमुदाय को सम्बोधित करते हुए कहा कि बहुत से लोगों की बाइबिल में श्रद्धा नहीं है, रामायण वाले की बाइबिल में श्रद्धा नहीं है, बाइबिल वाले कुरान में श्रद्धा नहीं रखते, पर ज्ञानी के लिए ऐसा नहीं है| जैसे पानी को वाटर तो कोई जल कहता है, कोई आब कहता है, कोई नीर कहता है | परन्तु पानी एक ही है जो सबकी प्यास को बुझाती है| ऐसे ही भगवान का नाम सबके लिए एक है जो सबका कल्याण करता है| भगवान जाति की मोहर नहीं लगाता, वह धर्म की मोहर नही लगाता| पर धर्म के ठेकेदारों ने वास्तविक धर्म की परिभाषा ही बदल दी है धर्म की आड़ में सबको नष्ट कर दिया है, समाज को गलत दिशा दे दी है| इसलिए उन शास्त्रों को उन इतिहासों में लिखी हुई बातों को अपने आचरण में लाओ|

      महात्मा सुमन बाई जी ने उदाहरण देते हुए कहा कि रामबोला अपनी पत्नी की एक चेतावनी से संत तुलसीदास हो गए | उसकी पत्नी उसे वासनाओ के लिए धिक्कारती थी और कहती है कि जितना प्यार तू मुझसे करता है इतना यदि भगवान से करता तो सीधे भगवान के पास चला जाता| आप लोग इस बात पर विचार करे, इस मूल्यवान शरीर को भोग में न लगाकर भगवान की प्राप्ति में लगाना चाहिए| इसलिए हमें सत्संग में जाना चाहिए और वहां बैठकर संतो के विचार सुनने चाहिए| यह नहीं है इधर से सुनो और उधर दूसरे कान से निकाल दिया, आप सभी लोगो से मैं यही कहना है कि गुरु ऐसा करे जो अन्धकार रूपी जीवन में प्रकाश कर दे और हमारा जीवन प्रकाशमय बन जाये और हम अपने जीवन में परम प्रकाश और शांति को प्राप्त हो| भगवान कि प्राप्ति ही हमारे जीवन का उदेश्य है|  

       कार्यक्रम हरदोई से महात्मा सुदासानन्द जी, झांसी से महात्मा अंबालिका बाई जी व ग्वालियर मध्यप्रदेश से महात्मा सुमन बाई जी की अध्यक्षता में सण्डीला में सम्पन्न हुआ| संत-महात्माओं सहित अन्य वक्ताओं ने भी अपने-अपने विचार रखे| इस मौके पर यूथ विंग के मिशन एजुकेशन टीम हरदोई से दीपा, प्रतिमा मिश्रा, शिल्पी, रूबी, गीता कुशवाहा, संगीता, नीरज, मानव सेवा दल लखनऊ से रामराज यादव, बिहारी लाल, नंदराम, रामदीन, ज्योती सिंह, शिवचक्कर सिंह, शंकर, रामसिंह, रामस्वरूप सहित तमाम श्रोता/भक्त मौजूद रहे

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here