भगवान की प्राप्ति का सत्संग हरि-कथा ही एक माध्यम है-साध्वी दर्शनी बाई

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संवाददाता/टटीरी मण्डी, बागपत, 10 सित0।  मानव उत्थान सेवा समिति की शाखा श्री हंस सत्संग भवन, रेलवे रोड अग्रवाल मण्डी, टटीरी में स्थित अग्रवाल धर्मशाला के प्रांगण में संगीतमय सात दिवसीय श्रीमद्भागवत आत्म-कथा महायज्ञ केे सातवें दिन कथा व्यास साध्वी दर्शनी बाई जी ने भगवान और भक्त के बीच जो सम्बन्ध होता है वह अतुलनीय है। इसमें किसी नियम की आवश्यकता नही होती है। भक्त के मन की बात भगवान स्वयं जान लेते है। जब सच्चे संत मिल जाये तो भगवान की प्राप्ति संभव हो जाता है और सत्संग हरि-कथा ही ईश्वर प्रप्ति का एक माध्यम है। सत्संग है मान-सरोवर, सुखों की खान बन्दें, सत्संग से ही मिलते है, सचमुच भगवान बन्दे। अध्यात्म-ज्ञान से ही उस परमात्मा  को अपने हृदय में जानकर उसका भजन-सुमिरण करके अपना कल्याण करना है।

आध्यात्मिक गुरू परमपूज्य श्री सतपाल जी महाराज की अनुयायी कथा व्यास साध्वी दर्शनी बाई जी ने कहा कि राजा परिक्षित को सात दिन तक यही कथा सुनने के बाद आत्म-तत्व की प्राप्ति हुई थी। उन्होनें अपने जीवन में भगवान के सच्चे नाम को जानकर भजन-साधना किया और राजा परिक्षित को लेने भगवान के दूत स्वर्ग से विमान लेके आ गये। यही हमारे जीवन में भी होना चाहिए।

कार्यक्रम के यजमान ने कथा व्यास साध्वी दर्शनी बाई जी और सहयोगी साध्वी द्वितीया बाई जी, साध्वी धनिष्ठा बाई जी व भजन गायक कलाकारों ंका फूल-माला और श्री राधे-कृष्ण के पट्टे से स्वागत किया। साथ ही दिल्ली व अनेक स्थानों से पधारें हुए भजन गायक कलाकार अमर रंगीला, देवेद्र सिंह, डी.डी.चैहान ने हरि का भजन कर ले री मेेरी मतिया, कभी प्यासे को पानी पिलाया नही, बाद अमृत पिलाने से क्या फायदा, सद्गति चाहता है तु अपनी, संग संतों की करनी पड़ेगी जैसे अनेक सुमधुर भजनों द्वारा सबको भाव विभोर कर दिया। कथा के आखिरी दिन आज दोपहर 1 से प्रारम्भ होकर सायं 5 बजे तक चला। आरती-प्रसाद के साथ आज के कथा का विश्राम किया गया। कथा स्थल पर कल प्रातः 9 बजे से हवन किया जायेगा तत्पश्चात विशाल भण्डारे की व्यवस्था है।

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