सतपाल जी महाराज ने महामहिम राष्ट्रपति को भेंट किया चारधाम माॅडल

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संवाददाता/नई दिल्ली। उत्तराखंड में संस्कृति और पर्यटन की दृष्टि से वास्तुकला का महत्वपूर्ण योगदान रहा है। आधुनिकता की अंधी दौड़ में यह पौराणिक और समृद्ध कला धीरे धीरे लुप्तप्राय होने लगी है। काष्ठ शिल्प के संरक्षण व संवर्धन को ध्यान में रखते हुए उत्तराखंड के पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री श्री सतपाल महाराज और पूर्व काबीना मंत्री श्रीमती अमृता रावत ने आज उत्तराखंड के काष्ठ शिल्पकारों को साथ लेकर महामहिम राष्ट्रपति से मुलाकात की और उन्हें उत्तराखंड के चारधाम का माॅडल भेंट किया। उत्तराखंड के पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री श्री सतपाल महाराज ने आज महामहिम राष्ट्रपति श्री रामनाथ कोविंद से राष्ट्रपति भवन में भेंट की। इस मौके पर उनके साथ लकड़ी से बने चारधाम माॅडल बनाने वाले पिथौरागढ़ के शिल्पकार अनिल कुमार और मुकेश कोली भी मौजूद थे। इन दोनों शिल्पकारों की काफी समय से इच्छा थी कि जब भी महामहिम राष्ट्रपति को उनके हाथ से बना यह माॅडल भेंट किया जाये वह स्वयं भी इस शुभ अवसर के भागीदार बने। उनकी इस प्रबल इच्छा को आज प्रदेश के पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री श्री सतपाल महाराज ने पूरा करते हुए महामहिम राष्ट्रपति श्री रामनाथ कोविंद जी को लकड़ी से बना यह चारधाम का माॅडल भेंट किया। महामहिम राष्ट्रपति श्री रामनाथ कोविंद ने कहा कि अब तक उन्हें उत्तराखंड के अलग अलग धामों के माॅडल प्राप्त हुए हैं, पहली बार महाराज जी के हाथों एक साथ बना चारों धामों का माॅडल उन्हें मिला है। महामहिम ने कहा कि वह इसे अपने संग्राहलय में रखेंगे।
उत्तराखंड में लकड़ी के ऊपर वास्तुकला का काम तो यहां घर घर होता रहा है। पुराने जमाने की तिबार, डिन्डालया, मोरी, छाज्जा, खम्ब और न जाने कितनी ही प्राचीन वास्तुकलायें आज विलुप्त होने के कगार पर हैं। लेकिन प्रदेश के पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री श्री सतपाल महाराज जी का प्रयास है कि इस प्रचीन कला को प्रोत्साहित कर इसका व्यापक प्रचार-प्रसार किया जाये। इसी बात को ध्यान में रखते हुए आज उन्होने महामहिम राष्ट्रपति से भेंट कर उत्तराखंड की समृद्ध शिल्पकला से उन्हें अवगत कराया।

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