संवाददाता/नई दिल्ली/मुंबई। राजनीति में ऐसा कम होता है कि लोग दुश्मनी भूल जाएं, लेकिन ये अक्सर होता है कि लोग अच्छी बातें और एहसान भूल जाते हैं| हालांकि शरद पवार ऐसे नहीं निकले. वे 13 वर्ष पहले बाल ठाकरे के किए एहसान को चुकाने के लिए भतीजे अजीत पवार के खिलाफ अड़ गए और उद्धव ठाकरे की सियासी राह में आ रहे सारे कांटों को हटा दिया| पवार ने शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे को महाराष्ट्र का मुख्यमंत्री बनाकर बाल ठाकरे के कर्ज को अदा कर दिया है|
दरअसल वर्ष 2006 में भी राजनीतिक हालात कुछ ऐसे ही थे| उस वक्त एनसीपी की तरफ से पवार की बेटी सुप्रिया सुले पहली बार राज्यसभा का चुनाव लड़ी थीं| तब बाल ठाकरे ने सुप्रिया के खिलाफ कोई उम्मीदवार खड़ा नहीं किया था. ठाकरे का कहना था कि ये गर्व की बात है कि महाराष्ट्र की बेटी दिल्ली जा रही है| वह हमारे सामने ही बड़ी हुई है, ऐसे में हम उसके सामने प्रत्याशी नहीं उतारेंगे| इस तरह सुप्रिया राज्यसभा के लिए चुनी गई थीं|
बाल ठाकरे ने इस तरह से राजनीति की उस स्वस्थ परंपरा का निर्वहन किया था, जो कि आज के दौर में बहुत कम दिखाई देती है| पवार के पास 13 वर्ष बाद राजनीतिक हालातों के चलते एक मौका आया तो उन्होंने भी ऐसी ही नजीर पेश की है| उन्होंने उद्धव को सीएम बनाकर उस एहसान का बदला चुका दिया है|
महाराष्ट्र के चुनावी नतीजे आने के बाद सियासी हालात कुछ ऐसे बने कि बीजेपी से शिवसेना का तालमेल नहीं बैठ सका| इसका नतीजा हुआ कि शिवसेना और बीजेपी अलग हो गईं| कांग्रेस-एनसीपी के साथ उद्धव ने नया गठबंधन महाविकास आघाड़ी बनाया| इसी बीच अजीत की बगावत ने सियासी संकट पैदा कर दिया, जिसके बाद पवार ने मोर्चा संभाला और इस तरह से उद्धव ठाकरे की सियासी राह की सारी मुश्किलों को आसान कर दिया|
अब खुद पवार ने उद्धव ठाकरे को पूरे पांच वर्ष के लिए सीएम पद दे दिया, वो भी तब जब उनके विधायकों की संख्या शिवसेना से महज दो कम है| इस तरह से 13 वर्ष बाद बने राजनीतिक हालात में पवार ने उस कर्ज को जबरदस्त अंदाज में चुकाया है, जिसे बाल ठाकरे ने 2006 में सुपिया सुले को राज्यसभा भेजने के लिए किया था|






























