वैलेंटाइन डे स्पेशल सप्ताह में शादीशुदा जोड़े के दैनिक जीवन मे परवान चढ़ते इश्क़ में प्रगतिशील इश्क़ : प्रदीप चौहान

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प्रदीप चौहान/दक्षिणी दिल्ली : प्रगतिशील विचारों से ताल्लुक़ रखने वाले शादीशुदा जोड़े के दैनिक जीवन मे परवान चढ़ते इश्क़ को विभिन्न रूपों व विभिन्न हालातों में व्यक्त करने की कोशिश की गई है।
शादी के बाद की

वो पहली डेट

कई जोड़ो के बाद लगा

मनमाफिक सेट

गांव की कली

शहरी रंगों में रंगी थी

दिल्ली दर्शन अभिलाषी

बन ठन कर चली थी

किया छल ले चला था देने धरना

कराया रूबरू क्या होता जनाक्रोश

‘निर्भया कांड’ से आहत

आंदोलनकारियों का जोश

संघर्षित हुजूम में

पकड़ हांथ-साथ चलना

पग-पग संभलना

ये ही तो है मेरा…

प्रगतिशील इश्क़।

हुई आक्रोशित थी तुम

सुन मिर्मम अत्याचार

पुरूष प्रधान समाज का

देख उदंड चेहरा बारम्बार

आयी आंखों में नमी तेरे

थे लबों पे कई सवाल

कर हाँथ खड़े

मेरे साथ खड़े

भरी थी तूमने भी हुंकार

गूंजी थी फ़िजा में

अन्याय के खिलाफ हर आवाज़

पल दर पल नजरों का मिलना,

नयनों ही नयनों में

सबकुछ कहना

ये ही तो है मेरा…

प्रगतिशील इश्क़।

 

 चांदनी रात में भोर तक जगना

चर्चाओं के दौर पे दौर का चलना

तथ्यांत्मक प्रहारों से

तेरा मुझसे झगड़ना

तर्क-वितर्क की सवारी कर

तेरा मुझपर चढ़ना

नासमझी को भी तेरे,

समझदारी में बदलना

शिद्दत से तुझे सुनना

तेरी आंखों को तकना

तेरी लबों पे भटकना

ये ही तो है मेरा…

प्रगतिशील इश्क़।

नही मलाल की न दे पाया

तुझे बंगला या गाड़ी

नही किया तूने कभी

सफ़ारी की सवारी

हर कदम किया कोशिश

की बने तू एक सबल नारी

कुंठिक मर्यादावों को पटक

दिया बराबरी का हक़

जीवन के उतार चढाव में

तेरे संग-संग चलना

हर पल-हर कदम

तेरे ही रंग में रंगना

ये ही तो है मेरा…

प्रगतिशील इश्क़।

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