पश्चिम सिक्किम राज्य के दरामदिन में साधना शिविर का आयोजन

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हिम बहादुर सोनार/सिलीगुड़ी : मानव उत्थान सेवा समिति पश्चिम सिक्किम दरामदिन कार्यालय में बृहस्पतिवार शाम जोरथांग/दरामदिन तहसील प्रभारी महात्मा सुमति बाईजी के उपस्थिति में आत्मा ज्ञान (गुरुदीक्षा) प्राप्त करने  वाले भक्तों के बीच प्रथम साधना शिविर का आयोजना किया गया।
प्राप्त जानकारी के अनुसार प्रत्येक सप्ताह के बृहस्पतिवार को साधना शिविर रखा गया है। जब एक बीज को जमीन पर बोया जाता है उसे सुरक्षित रखने के लिए बाड़, पानी, खाद्य, पशुओं से सुरक्षित रखने का कार्य होता है ठीक इसी तरह एक आत्मा ज्ञानी भक्त को सत्संग, संत-महात्माओं का सानिध्य, भजन-सुमिरण,सेवा आदि का आवश्यक होता है। इसी के मध्यनजर यह साधना शिविर रखा गया है। गौरतलब हो कि शुद्ध खान-पान, रहन-सहन, अचारण-व्योवहार,बोली-वचन,आदर-सत्कार, इत्यादि  ध्यान-साधन से वश में किया जाता है। केवल ज्ञान लेने मात्र से परिपूर्ण नही होता है उसे नित्य पालन करना पड़ता है। तब जाकर मनुष्य का जीवन मे निखार आता है। प्रभारी महात्मा सुमति बाईजी के अनुसार साधना शिविर दरामदिन साखा पश्चात सोम्बारे, सीकताम, टिम्बुरबुंग, जोरथांग, केराबारी, माबोंग पक्कीगांव, थरपु,गेजिंग तहसील के विभिन्न शाखाओं में साधना शिविर का आयोजन किया जाएगा।

            इस साधना शिविर में प्रेमी-भक्त, शाखाओं के कार्यकर्ता, तहसील के कार्यकर्ता,  जिल्ला सचिव, जिल्ला प्रमुख, केंद्रीय कार्यकर्तागण भाग लेंगे।भक्त के जीवन में समस्या का समाधान केवल भजन सुमिरण, सत्संग, सेवा ही एकमात्र निदान है। आगे बाईजी ने बताया कि प्रत्येक ज्ञानी भक्त प्रातः एक घण्टा तथा संध्या एक घण्टा ध्यान-साधना में बैठना अनिवार्य बताया तथा घर में नियमित आरती-पूजा होना चाहिए। समिति के उत्तरपुर्वांचल द्वारा मानव धर्म प्रचार-प्रसार के पचासवाँ वर्ष पूरे होने पर स्वर्ण जयंती के रूप में मनाने जा रही है।इसकी जानकारी सागर मोहरा ने दी।

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