सन्तों के सानिध्य और सत्संग से ही भगवान की प्राप्ति संभव- स्वामी ज्ञानशब्दानन्द 

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                                   तीन दिवसीय महान सत्संग समारोह का समापन
अजमेरी गेट, नई दिल्ली, 11 नवम्बर। अखिल भारतीय संत समाज के तत्वावधान में रामलीला मैदान, अजमेरी गेट, नई दिल्ली में आयोजित तीन दिवसीय महान सत्संग समारोह के तीसरे और अन्तिम दिन कार्यक्रम के प्रबन्धक स्वामी आनन्दातानन्द जी ने हजारों की संख्या में उपस्थित भक्त समुदाय को संबोधित और भक्त ध्रुव के जीवन चरित्र को समझाते हुए कहा कि भक्तों में सबसे कम उम्र में भक्ति करके ध्रुव ने जो भक्ति का मिशाल प्रस्तुत किया ओ अतुलनीय है। यह इतिहास के पन्नों में सदैव के लिए अमर हो गया। जिन भक्तों ने भगवान की भक्ति की और सत्य मार्ग पर चले, उनका नाम अमर हो गया। आज हम उन्हीं भक्तों की पूजा करते है। सत्संग है मानसरोवर सुखों की खान बन्दे, सत्संग से ही मिलते है सचमुच भगवान बन्दे। जो कण-कण में विधमान परमात्मा है, जो दीनबन्धु भगवान है उसी के आधार पर हमारी नैया पार हो सकती है।
            बैजनाथ धाम से पधारे स्वामी रामधनियानन्द जी ने भक्तोें को समझाते हुए कहा कि कपिल भगवान अपनी माता को भक्ति के बारे में समझाते हुए कहते है कि अध्यात्म-ज्ञान से जीव का कल्याण होता है। यह सुनकर माता देवहूती ने कपिल भगवान से उस आत्म-ज्ञान जानने की इच्छा ब्यक्त की, तब कपिल भगवान ने अपनी माँ को आत्म-ज्ञान को जनाकर भगवान का दर्शन उनके जीवन में कराया। तब भगवान का भजन करके अपना जीवन कितार्थ किया। आग लगे आकाश में, झड़-झड़ पड़े अंगार, संत न होते जगत में तो जल मरता संसार। हरिद्वार से पधारे स्वामी ज्ञानशब्दानन्द जी ने कहा कि सन्तों के सानिध्य और सत्संग से ही भगवान की प्राप्ति संभव है। साध्वी दर्शनी बाई जी ने बताया कि अब मोही भरोश भयो हनुमन्ता, बिन हरि कृपा मिले नही संता अर्थात जब सच्चे संत मिल जाये तो समझना चाहिए कि अब भगवान का दर्शन मिलने ही वाला है।
            स्वामी ध्वजानन्द और स्वामी अमरबेलानन्द जी ने भगवान की छवि पर पुष्प माला पहनाकर आज के कार्यक्रम का शुभारम्भ किया। साथ ही भारत के विभिन्न तीर्थ स्थानों से पधारे स्वामी हरिध्यानानन्द, स्वामी श्रोतानन्द, स्वामी प्रेमदर्शनानन्द, साध्वी सविता बाई, साध्वी संध्या बाई, साध्वी रोशनी बाई, साध्वी मणिका बाई, साध्वी व्योमा बाई, साध्वी वैशाली बाई व अनेकानेक संत उपस्थित रहे। मंच पर उपस्थित समस्त संत-महात्माओं का स्वागत संस्था के वरिष्ठ कार्यकर्ताओं व अनेक गणमाण्य लोगों ने फूल-माला पहनाकर किया।
           बाल कलाकारों के भी अनेक सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किये गये। साथ ही भजन गायक कलाकारों ने विना चैन ना आये राम, मेरा दिल तो दिवाना हो गया, मुरली वाले तेरा, राम-नाम के हीरे-मोती, संत विखेरे गली-गली, झूठी दुनिया से घबरा रहा हूँ, तेरे चरणों में मै आ रहा हूँ, कैसा जादू डाला रे, अरे सांवरे जैसे सुमधुर भजनों द्वारा सबको भाव विभोर कर दिया। कार्यक्रम को सफल बनाने में संस्था के कार्यकर्ताओं का विशेष योगदान रहा। आरती-प्रसाद और विशाल भण्डारे के साथ कार्यक्रम का समापन किया गया।

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