भगवान की भक्ति की और सत्य मार्ग पर चले उनका नाम अमर हो गया-साध्वी दर्शनी बाई

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कोटपुतली,जयपुर(राजस्थान),26 अक्टूबर। श्री हंस सत्संग भवन, पुतली द्वारा आयोजित श्री राम मंदिर, लक्ष्मीनगर के प्रांगण में संगीतमय सात दिवसीय श्रीमद्भागवत आत्म-कथा महायज्ञ के तीसरे दिन कथा व्यास साध्वी दर्शनी बाई जी ने भक्त ध्रुव के जीवन चरित्र को समझाते हुए कहा कि भक्तों में सबसे कम उम्र में भक्ति करके ध्रुव ने जो मिशाल प्रस्तुत किया ओ अतुलनीय है। यह इतिहास के पन्नों सदैव लिए अमर हो गया। जिन भक्तों ने भगवान की भक्ति की और सत्य मार्ग पर चले उनका नाम अमर हो गया। आज हम उन्हीं भक्तों की पूजा करते है। सत्संग है मानसरोवर सुखों की खान बन्दे, सत्संग से ही मिलते है सचमुच भगवान बन्दे। जो कण-कण में विधमान परमात्मा है, जो दीनबन्धु भगवान है उसी के आधार पर हमारी नैया पार हो सकती है।
मानव धर्म के प्रणेता और आध्यात्मिक गुरू श्री सतपाल जी महाराज की परम शिष्या कथा व्यास साध्वी जी ने भक्तोें को समझाते हुए कहा कि कपिल भगवान अपनी माता को भक्ति के बारे में समझाते हुए कहते है कि अध्यात्म-ज्ञान से जीव का कल्याण होता है। यह सुनकर माता देवहूती ने कपिल भगवान से उस आत्म-ज्ञान जानने की इच्छा ब्यक्त की, तब कपिल भगवान ने अपनी माँ को आत्म-ज्ञान को जनाकर भगवान का दर्शन उनके जीवन में कराया। तब भगवान का भजन करके अपना जीवन सार्थक बनाया।
आज के यजमान श्री दीलिप सैनी़ धर्मपत्नी श्रीमती सुनीता देवी ने कथा व्यास साध्वी दर्शनी बाई जी और विभिन्न स्थानों से पधारें हुए अनेक भजन गायक कलाकारों का फूल-माला और राधे-कृष्ण के पट्टे पहनाकर स्वागत किया। कथा व्यास साध्वी जी ने भगवान की छवि पर पुष्प माला पहनाकर आज के कार्यक्रम का शुभारम्भ किया।
साथ ही दिल्ली व अनेक स्थानों से पधारें हुए धुरन्धर चैहान, अमर रंगीला, प्रसिद्ध भजन गायिका सरगम गायत्री ने-राजस्थानी भजन चाल्यों सखिरा आपा हरि गुण गावा, भजन विना चैन ना आये राम,फिर से जहाँ में आये है दुनिया बनाने वाले, झूठी दुनिया से घबरा रहा हूँ, तेरे चरणों में मै आ रहा हूँ, कैसा जादू डाला रे, अरे सांवरे जैसे सुमधुर भजनों द्वारा सबको नाचने पर मजबूर कर दिया।
कथा में दिलकौर देवी, सावित्री देवी, विधा देवी, कान्ता, ललिता, मीना, सुलोचना, संतोष देवी, उर्मिला, कौशल्या, गोवर्धन, जगदीश सैनी, लक्ष्मन, हिरालाल, घनश्याम, रामकुमार, शम्भू दयाल, रामजी लाल, सीताराम, सुणाराम, रामप्रताप, देवनारायण, प्रहलाद, आदि उपस्थित रहे। आरती-प्रसाद के साथ आज के कथा का विश्राम किया गया। कथा दोपहर 1 से 4 बजे तक चला।

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