टमकोली, ग़भाना, 28 मई।
ग़भाना के ग्राम-टमकोली में चल रहे श्रीमद्भगवत कथा महायज्ञ के सातवें दिन विश्व प्रसिद्ध आध्यात्मिकगुरु श्री सतपाल जी महाराज के परमशिष्य आचार्य संतोष भारद्वाज जी ने कंस वध का वर्णन करते हुए कहा कि कंस एक विचारधारा है जो हर समय अपने तमोगुण का प्रभाव बनाएं रखना चाहता है। कंस जैसे आतताई का मूल विनाश करने के लिए भगवान श्रीकृष्ण ने साकार रूप धारण कर कंस जैसे अत्याचारी, पापाचारी का बध करके धरती से बोझ हल्का किया।
भागवताचार्य संतोष भारद्वाज जी ने रुक्मिणी और श्रीकृष्ण विवाह का वर्णन करते हुए कहा कि माता रुक्मिणी को प्रेम का प्रतिक माना जाता है। अर्थात भगवान श्रीकृष्ण को जानने के लिए सबसे पहले हमारे अंदर प्रेम की अगाध श्रोत होना चाहिए। माता रुक्मिणी को प्रेम और भगवान श्रीकृष्ण को ब्रह्म का प्रतिक माना जाता है, यह सर्वविदित है। माता रुक्मिणी और श्रीकृष्ण विवाह के साथ सुदामा चरित्र की सुन्दर झांकी भी निकाली गयी जिसे देख भक्तगण फुले नहीं समाएं।
आचार्य संतोष भारद्वाज जी ने सुदामा चरित्र का वर्णन करते हुए कहा कि भक्त सुदामा और श्रीकृष्ण की मित्रता पूरी दुनिया में मिशाल है। कथा में उपस्थित श्रोताओं ने इस कथा को अद्भुत कथा की उपमा दी है। अर्थात पूरे जीवन में लोगों ने पहली बार ऐसी कथा सुनी है। ऐसा लोगों का कहना है। आचार्य जी ने राजा परीक्षित को मोक्ष के साथ-साथ कथा का सार सुनाया और कहा कि जीवन में कथा केवल सुनने का नहीं बल्कि उसे जीवन में अमल करने की बात कही।
कथा के दौरान गोपाल कृष्ण शर्मा, राजेश कुमार शास्त्री, मुकेश कुमार, परीक्षित श्री नरेंद्र कुमार शर्मा जी, चंद्रशेखर शर्मा, यज्ञपति अवधेश सिंह द्वारा कथाव्यास आचार्य श्री संतोष भारद्वाज जी का फूल-मालाओं और मुकुट सहित पटका पहना कर स्वागत किया गया। साथ ही मंच पर उपस्थित सभी गायक कलाकारों का फूल-मालाओ और तिलक लगाकर स्वागत किया गया।
प्रमोद महेश्वरी, डॉ.नेत्रपाल सिंह, डॉ. राम सिंह, डॉ. जयपाल सिंह, सुशील शर्मा, छत्रपाल शर्मा, पंडित विनोद शर्मा, दिवेंदु शर्मा, मुकेश शर्मा, कृपाल शिव शर्मा, ठाकुर बाबू सिंह(पूर्व ग्रामप्रधान), छवि शर्मा, प्रांजल शर्मा, इवान शर्मा, रामअवतार शर्मा, मनमोहन कश्यप, जितेंद्र भारद्वाज, छोटे सिंह, राज कुमार सिंह, संतोष शर्मा, माया देवी, शालू शर्मा, रेनू सिंह, लकी शर्मा, शिखा शर्मा, निधि शर्मा, निर्मल शर्मा, मोहिनी शर्मा, वर्षा शर्मा और आमयुक्त कौसिक अनेक भक्त उपस्थित रहे। पूजन-आरती के साथ कार्यक्रम समापन किया गया। कार्यक्रम दोपहर 12 से सायं 5 बजे तक चला। कल प्रातः 8 बजे से पूर्णाहुति होगी।

































