मन की चंचलता परमात्मा के नाम सुमिरन से समाप्त होती है -महात्मा जतनानन्द

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संवाददाता/साहिबाबाद l स्थानीय प्रेमपुरी आश्रम में मानव उत्थान सेवा समिति के तत्वावधान में एक सदभावना पदयात्रा और विशाल सदभावना सत्संग समारोह का आयोजन किया गया l सदभावना यात्रा का आश्रम से शुभारम्भ होकर राजेंद्र नगर, लाजपत नगर, श्यामपार्क एक्सटेंशन से होते आश्रम पर समापन हुआ l स्थानीय लोगों द्वारा संत महात्माओं व पदयात्रिओं का स्वागत व जलपान कराया गया l यात्रा का शुभारम्भ क्षेत्रीय पार्षद सचिन डागर ने हरी झंडी दिखाकर किया l
सदभावना यात्रा के समापन अवसर पर विशाल सदभावना सत्संग समारोह का भी आयोजन हुआ l समारोह के मुख्य अतिथि स्थानीय विधायक सुनील शर्मा ने दीप प्रज्ज्वलित कियाl इस अवसर पर विधायक ने कहा कि आज समाज में सदभावना की अत्यन्त आवश्यकता है l उन्होंने कहा कि संस्था के महात्माओं द्वारा सदभावना से ओतप्रोत कार्यक्रम करना बहुत सराहनीय कार्य हैl
आश्रम प्रभारी महात्मा जतनानन्द जी ने उपस्थित जनसमुदाय को सम्बोधित करते हुए कहा कि जब-जब व्यक्ति का मन विषय वासनाओं से ग्रसित होता है, तो उसका मन चंचल हो जाता है l जब-जब मन की चंचलता बढ़ती है, तब-तब मानव का मन अशांत होता हैl उन्होंने कहा कि मन की चंचलता परमात्मा के नाम सुमिरन से समाप्त होती हैl उसके लिए समय के सद्गुरु तत्वेत्ता महापुरुष की शरण में जाकर आत्मज्ञान की दीक्षा लेनी चाहिए l जब व्यक्ति सद्गुरु द्वारा दिये गए ज्ञान की साधना करता है तो वह अपना ही कल्याण नहीं करता, वह व्यक्ति समाज में भी सदभावना और प्रेम का सन्देश देता है l
 समारोह में महात्मा योगानंद जी, महात्मा भास्करानन्द जी, महात्मा संजीवनी बाई जी, महात्मा रानीबाई जी व नरेन्द्र जी ने अपने विचार व्यक्त किये l
कार्यक्रम में मुख्य रूप से लाला ताराचंद, पुनीत चौधरी, राजबीर शर्मा, चयन पाल, मदनसिंह, भीम सिंह,खुशहाल सिंह, सुनील ( काकू ), अशोक शर्मा, धर्मपाल, अनुज शर्मा, अशोक वर्मा, किरनपाल, गौरव, शिवेश, दीपक, दिनेश, अजय, वैरागी,अवधेश मित्तल, शारदा, राजवती, कमलेश, बीना, रजनी, रीना आदि थे l
मंच संचालन मोहित कसाना ने किया l

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