सर्वब्यापक परमात्मा का केवल दिव्य नेत्र द्वारा दर्शन संभव -साध्वी दर्शनी बाई

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संवाददाता/शास्त्रीनगर,मेरठ,31मार्च | मानव उत्थान सेवा समिति के तत्वावधान और आध्यात्मिक गुरु परमपूज्य श्री सतपाल जी महाराज की प्रेरणा से शाखा मेरठ द्वारा शांति पैलेस, गुरुद्वारा रोड शास्त्रीनगर में चल रहे सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा के पांचवे दिन कथा व्यास साध्वी दर्शनी बाई जी ने कहा कि आततायी कंस ने यज्ञ कराने के बहाने श्रीकृष्ण को बुलाकर छल से मारने के लिए अक्रूर जी को गोकुल भेजा| अक्रूर जी ने किसी तरह से समझा बुझाकर श्रीकृष्ण जी को मथुरा लाने के लिए मना लिया| श्रीकृष्ण के जाने की बात जैसे ही गोप-गोपिकाओ को पता चला तो प्रेम के वसीभूत होकर रास्ते में श्रीकृष्ण के रथ के आगे लेट गये और बोले कि आप के बिना हम जीवित कैसे रहेंगे जैसे शरीर से प्राण निकल जाता है हमारा शरीर भी ठीक उसी तरह से हो जायेगा| फिर श्रीकृष्ण ने रथ से निचे उतर कर सभी ग्वालवालो को समझाया कि हे मेरे अंग-संग रहने वाले आप सभी मुझे अपने कार्य करने के लिए मत रोको क्योकि मेरा जन्म किसी विशेष कार्य करने के लिए हुआ है|

साध्वी दर्शनी बाई जी ने श्रीकृष्ण-बलराम मथुरा गमन प्रसंग को भावपूर्वक वर्णन करते हुए कहा कि श्रीकृष्ण ने मथुरा पहुंचकर सबसे पहले ऋषि के श्राप से कुपित परमभक्त कुब्जा का उद्धार किया| फिर भगवान ने कंस को मारकर उसका उद्धार किया और उसके प्रभाव से प्रभावित सभी मथुरावासियों को भयमुक्त किया| तत्पश्चात श्रीकृष्ण ने अपने माता-पिता वासुदेव और देवकी को कंस के कारागार से मुक्त किया और अपने नाना उग्रसेन को राजगद्दी पर बिठाया| साध्वी जी ने अपने आध्यात्मिक सत्संग विचारों से सबको लाभान्वित किया और उस परमात्मा के पावन नाम को जानने के लिए भी प्रेरित किया| भगवान सब जगह व्यापक है और भगवान का दर्शन केवल दिव्य नेत्र द्वारा ही संभव है| इन बाहरी नेत्रों से उनका दर्शन संभव नहीं है|

दिल्ली से आये हुए हंस भजन मण्डली के सुप्रसिद्ध भजन गायक कलाकार बालकिशोर, रवि टिकेकर, डी.डी.चौहान ने “कर गया कान्हा, मिलन का वादा, तारा है सारा जमाना, श्याम हमको भी तारो, कहो कैसे तुम्हारी बन जाऊ रसिया,यमुना किनारे मोरा गांव,कान्हा आ जइयो, मैं तो आन पड़ी सतगुरु की बस्ती में,अब तो जीवन गुजारुंगी मस्ती में” जैसे अनेक सुमधुर भजनों द्वारा समस्त भक्त समुदाय को भावविभोर कर दिया| आज के यजमान नेपाल सिंह धर्मपत्नी श्रीमती इन्द्रेश देवी ने कथा वाचक और सभी कलाकरों का राधे-कृष्ण के खता और फुल-मालाओ से स्वागत किया| संस्था के शाखा प्रधान देवेन्द्र सिंह, लटूर सिंह,अरुण, श्रीमती शारदा अत्री और अनेक कार्यकर्त्ता मौजूद रहे| आरती और प्रसाद वितरण के साथ आज के कथा को विश्राम किया गया| कथा दोपहर 1 बजे शुरू होकर सायं 5 बजे तक चला|

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