पानी की मांग को लेकर रैली,  गंदी राजनीति और भ्रष्टाचार पर रोक लगे

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01 दिसम्बर, 2018, नई दिल्ली: ‘अब अपमान नहीं सहेंगे, घर-घर पानी लेकर रहेंगे’ इस नारे को लेकर, संजय कालोनी (ओखला) के निवासियों ने लोक राज संगठन की अगुवाई में, दिल्ली सरकार से घर-घर पाइप के जरिए पीने का पानी उपलब्ध कराने की मांग को लेकर मंडी हाउस से लेकर संसद मार्ग तक मार्च किया। निवासियों ने अपने हाथों में प्लाकार्ड थे, जिन पर लिखा था – ‘सरकार तुम बताओ, टैंकर पर पानी भरें या पढ़ाई करें!’, ‘संजय कालोनी वर्षों से सूखी है, चुनावी पार्टियां सिर्फ सत्ता की भूखी हैं!’, ‘‘जैसे है, बिजली कनेक्शन, वैसे हो हर घर में पानी कनेक्शन!और ’दिल्ली सरकार ने दिया धोखा, जल अधिकार कनेक्शन को रोका!’। इस प्रदर्शन में महिलाओं, पुरुषों और छात्रों ने भाग लिया।
               आम आदमी पार्टी द्वारा 2015 में जारी घोषणापत्र कहती है कि ‘आम आदमी पार्टी एक अधिकार के रूप में पानी उपलब्ध कराएगी। पार्टी किफायती मूल्य पर दिल्ली के सभी नागरिकों को स्वच्छ पेयजल की सुविधा देगी। पानी को अधिकार बनाने के लिए आम आदमी पार्टी दिल्ली जल बोर्ड के अधिनियम में भी संशोधन करेगी। एक समयबद्ध योजना के तहत दिल्ली को दिल्ली जल बोर्ड के पाइप कनेक्शन व सीवेज नेटवर्क से जोड़ा जाएगा। पानी सप्लाई व वितरण प्रणाली को सुचारू बनाया जाएगा।’
              रैली में शामिल संगम विहार निवासी ललित कुमार ने बताया कि, खुद में संगम विहार एक विधानसभा है। यहां का विधायक, दिल्ली जल बोर्ड  का वाइस चेयरमैन है। यहां असुरक्षित पानी की सप्लाई अमूमन 15 दिन में एक बार होती है। वहीं, मदनपुर खादर पुनर्वास कालोनी के निवासी इकलाक इकलाक का कहना है कि सरकार ने कालोनी 20 साल पहले बसाया था। यहां के लोग भूमिगत जहरीला पानी पीने को मजबूर हैं। इस तरह की कालोनियां दिल्ली में सैकड़ों हैं। रैली जैसे ही जंतर-मंतर पहुंची एक प्रदर्शन में तब्दील हो गयी।
              प्रदर्शनकारियों को संबोधित करते हुए, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के दिल्ली सचिव धीरेन्द्र शर्मा ने बताया कि ‘पीने योग्य पानी’ पर हर शहरी का बुनियादी अधिकार है। 21वीं सदी चल रही है। दिल्ली देश की राजधानी है। ‘पानी’ के लिए यहां मां, बहनों व बच्चों को टैंकरों के पीछे दौड़ना पड़ता है। यह आधुनिक और सभ्य नागरिक समाज पर एक कलंक है। नागरिकों का अपमान है।
            प्रदीप कुमार ने कहा कि बिजली की भांति, बिना किसी भेदभाव के दिजेबी घर-घर पीने का पानी उपलब्ध कराए। उचित शुल्क लें। ऐसा करने से, न सिर्फ वोट बैंक की गंदी राजनीति रूकेगी, बल्कि पानी की बर्बादी, टैंकर पर अनावश्यक खर्च, भूमिगत पानी की अबाध चोरी, रुकेगी और भ्रष्टाचार पर रोक लगेगी। दिजेबी की आय बढ़ेगी। नए रोज़गार बढ़ेंगे। इस जायज़ मांग को लोक राज संगठन 2004 से उठाता आ रहा है। लोक राज संगठन के दिल्ली सचिव बिरजू नायक ने बताया कि संजय कालोनी (ओखला) के निवासी 41 साल से पानी के टैंकर के पीछे भाग रहे हैं। गांव, झुग्गी-झोपड़ी, पुनर्वासित व कच्ची कालोनी में रहने वाले नागरिकों को ‘दोयम दर्जे’ का कहकर, इनके घरों के अंदर पीने का पानी उपलब्ध कराने से सरकार इनकार करती है। घर-घर बिजली कनेक्शन है, लेकिन सबसे ज़रूरी ‘पानी’ का कनेक्शन नहीं है!
              संजय कालोनी (ओखला) के स्थानीय निवासी पिंटू भाई कहा कि दिजेबी कनेक्शन वाले घर में, 20 हजार लीटर तक पानी हर महीने फ्री में मिलता है। 14 लाख परिवारों के पास दिजेबी के कनेक्शन नहीं हैं! तो फ्री कैसा? 
स्थानीय निवासी लोकेश कुमार ने कहा कि, मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल इस मांग पर हमसे मिलने से इनकार करते रहे हैं। अतः इसी मुद्दे को लेकर, 27 जुलाई, 2016 को संसद मार्ग पर धरना देना पड़ा। इसके ठीक एक महीने बाद, सरकार ने 30 अगस्त, 2016 झुग्गी बस्तियों, कच्ची और पुनर्वास कालोनियों में घर-घर पानी पहुंचाने के लिए ‘जल अधिकार कनेक्शन’ योजना की घोषणा की। आज घोषणा हुए ढाई साल होने को आ रहा है, लेकिन जमीन पर लागू नहीं है।
प्रदर्शनकारियों का कहना है कि, दिल्ली सरकार ने घर-घर पीने का पानी नहीं पहुंचाया तो, हरेक कालोनी इस सरकार के खिलाफ़ प्रदर्शन करेगी।
               कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी से संतोष कुमार, पुरोगामी महिला संगठन से पूनम, स्थानीय निवासी पूजा, रौनिक साग, ओम प्रकाश, हरिओम, विरेन्द्र कुमार, संदीप कुमार, अकबर खान, राजू आदि। इस प्रदर्शन के उपरांत, हुसैन और प्रदीप कुमार दो सदस्य प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को एक ज्ञापन सौंपा।

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