सद्भावना सम्मेलन की तैयारी युद्ध स्तर पर, भक्तिरस का आनंद लेने देश-विदेश से आ रहे हैं श्रद्धालु

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संवाददाता/सिलीगुड़ी 24 दिसंबर : मानव उत्थान सेवा समिति के तत्वावधान में प्रतिवर्ष होने वाले अंतर्राष्ट्रीय सद्भावना सम्मेलन की तैयारी युद्धस्तर पर जारी है। इस सम्मेलन का आयोजन 31 दिसंबर व 1 जनवरी को सालुगाड़ा बाजार के समीप उत्तर पलास के मझुवा गांव स्थित मानव धर्म मंदिर परिसर में होने जा रहा है। इसको लेकर एक विशाल सत्संग पंडाल बनाने का कार्य जारी है। सद्भावना सम्मेलन में दार्जिलिंग, सिक्किम, डुआर्स, बिहार के अलावे भूटान, नेपाल समेत अन्य देशों से श्रद्धालुगण पहुंच रहे हैं। उनके रहने के लिए विशाल अस्थायी आवास बनाए जा रहे हैं। इसके अलावा विभिन्न कार्यालयों व स्वागत कक्ष का निर्माण कार्य किया जा रहा है। इस सम्मेलन स्थल के भंडारे में एक बार में पांच सौ लोग भोजन कर सकते हैं, जो बिल्कुल निःशुल्क होगा। भंडारा सुबह 10 बजे से रात 8 बजे तक लगातार चलेगा।

यह जानकारी निर्माण कार्य के प्रभारी लक्ष्मण राई ने दी है। मानव सेवा दल के प्रधान प्रवीण गुरुंग ने बताया कि मानव सेवा दल के दार्जिलिंग, सिक्किम, डुवार्स, सिलीगुड़ी, भूटान मंडल के स्वयंसेवक बारी-बारी से अपनी सेवा दे रहे हैं। इस पारी में भारत के विभिन्न प्रांतों से भी श्रद्धालुओं के आने की संभावना बढ़ गई है। कार्यक्रम में अमेरिका, कनाडा, अर्जेंटीना, कोरिया, दक्षिण अफ्रीका, ऑस्ट्रेलिया, मॉरीशस, दुबई, इजराइल आदि देशों से श्रद्धालु आएंगे। मानव धर्म के प्रणेता श्री सतपाल जी महाराज व उनका परिवार कोलकाता और असम में सद्भावना सम्मेलन समाप्त होने के बाद सिलीगुड़ी आ रहे है।

इस बार 108 कलाकार जातीय संस्कृति को प्रदर्शित करने के लिए नृत्य करेंगे। विभिन्न जातियों और भाषाओं के सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत करने के लिए 110 बाल कलाकार तैयार हैं। संस्कृति विभाग प्रमुख बिमल राई के अनुसार इस बार उत्तर पलास के स्थानीय कलाकार भी अपनी प्रस्तुति देंगे। यहां राष्ट्रीय एकता और सौहार्द का अभूतपूर्व जमावड़ा देखने को मिलेगा।

समिति के अध्यक्ष महात्मा अदीना बाई जी ने बताया कि पिछले दो वर्षों से कोरोना महामारी के कारण कार्यक्रम नहीं हो पाने के चलते इस बार विशेष उत्साह के साथ आयोजित किया जा रहा है। प्रधान सचिव प्रकाश हाँखिम ने सभी आध्यात्मिक उत्साही लोगों से इस सम्मेलन में भारत के विभिन्न प्रांतों के तीर्थयात्रियों से आने वाले संतों और महात्माओं के प्रवचनों से लाभान्वित होने का अनुरोध किया।

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