अगर ऐसे ही रहा तो कांग्रेस का नाम लेने वाला शायद ही कोई मिले

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नई दिल्ली :-  132 साल पुरा नी पार्टी कांग्रेस अस्तित्व की लड़ाई लड़ रही है। 1947 से लेकर करीब 20 साल तक देश के सभी हिस्सों में राज करने वाली कांग्रेस अब सिमट चुकी है। भारतीय लोकतंत्र के मंदिर (संसद) में अकेले दम पर कभी जादुई आंकड़े को हासिल करने वाली कांग्रेस आज दहाई के आंकड़े में सिमट गई है। हमेशा बड़े भाई की भूमिका में रहने वाली कांग्रेस की वैचारिक धारा को इस तरह से चोट पहुंची कि सियासत में बने रहने के लिए शिमला संकल्प के जरिए गठबंधन के विचार पर भी काम करना पड़ गया। मौजूदा समय में कांग्रेस कराह रही है। एक मशहूर लेखक की मानें तो उनका कहना है कि अगर ऐसे ही चलता रहा तो शायद ही कोई कांग्रेस का नाम लेने वाला बचे।

कांग्रेस की वापसी है मुश्किल

वरिष्ठ लेखक रामचंद्र गुहा का कहना है कि अगर यदि ऐसे ही चलता रहा तो एक बात साफ है कि कांग्रेस की भारतीय राजनीति में वापसी करना मुश्किल होगा। उन्होंने कहा कि ये हो सकता है कि कांग्रेस अपनी गिरावट को रोक ले लेकिन अपने दम पर सत्ता में वापसी करना सपना देखने जैसा होगा।

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कांग्रेस का भविष्य अंधकारमय

रामचंद्र गुहा ने सोमवार को कोलकाता में नेताजी ओरेशन 2017 में शिरकत करते हुए कहा कि कांग्रेस का भविष्य अंधकार से भरा हुआ है। ये हो सकता है कि वो लोग किसी की मदद से कुछ हदतक अपनी पकड़ बना लें। लेकिन सच ये है कि 2019 या 2024 तक वो राष्ट्रीय राजनीति में अपनी दमदार मौजूदगी दर्ज कराने में नाकाम रहेंगे। रामचंद्र गुहा ने मजाक में कहा कि इसके लिए वो अपने स्मार्टफोन को भी दांव पर लगाने के लिए तैयार हैं।

‘100 से ज्यादा सांसद नहीं मिलेंगे’

नेताजी रिसर्च ब्यूरो द्वारा आयोजित द लांग लाइफ एंड लिंगरिंग डेथ ऑफ इंडियन नेशनल कांग्रेस विषय पर बोलते हुए गुहा ने कहा कि 132 साल पुरानी शानदार कामयाबियों से भरी पार्टी की वापसी आसान नहीं है। इसके पीछे तर्क देते हुए उन्होंने कहा कि मौजूदा समय में कांग्रेस के पास सिर्फ महज 44 सांसद हैं, अगर कांग्रेस के लोग जीतोड़ मेहनत करें तो भी 100 या 200 से ज्यादा हासिल नहीं कर सकेंगे।

कांग्रेस क्यों रहेगी पीछे ?

रामचंद्र गुहा ने 100 और 200 के आंकड़ों को समझाते हुए कहा कि कांग्रेस की मौजूदा अध्यक्ष सोनिया गांधी की उम्र 70 साल है। 2024 तक वो करीब 80 साल की हो जाएंगी, इसके अलावा उनकी सेहत शायद ही सक्रिय राजनीति में बने रहने की इजाजत देगी। इसके अलावा राहुल गांधी, नेहरू खानदान के वो शख्स हैं जिनके नाम पर पार्टी में आम सहमति नहीं है। शायद राहुल गांधी वो पहले शख्स होंगे जिन्हें कांग्रेस के कद्दावर नेता मानसिक तौर पर उन्हें अपना नेता नहीं स्वीकार कर पाते हैं।

गठबंधन में संजीवनी खोजती कांग्रेस

रामचंद्र गुहा ने कहा कि कभी कांग्रेस के पीछे खड़ी होने वाली पार्टियों के पीछे लगकर कांग्रेस अपनी जमीन तलाश रही है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस को अब अपनी हकीकत के बारे में पता चल चुका है लिहाजा कांग्रेस के नेता सोच रहे हैं कि अब कुछ ऐसा किया जाए ताकि लोगों के जेहन से कांग्रेस का लोप न हो जाए।इसके लिए कांग्रेस ने बिहार में शुरुआत की। जेडीयू और राजद के साथ मिलकर वो चुनावी मैदान में उतरे और थोड़ी बहुत कामयाबी हासिल की। ठीक वैसे ही वो देश के सबसे बड़े सूबे में समाजवादी पार्टी के साथ मिलकर अपने अस्तित्व को बचाने की कोशिश में लगे हैं।

source(dainik jagaran)..

 

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