संवाददाता/हरिद्वार, 12अप्रैल : श्री सतपाल महाराज ने सम्मेलन में उपस्थित श्रध्दालुओं का आह्नान किया कि वे सभी तरह की संकीर्णताओं का त्याग करें तथा समाज में शान्ति, सद्भावना और भाईचारे का माहौल बनाने के लिए आगे आयें। उन्होंने कहा कि ध्रती सभी के लिए बनी है, आकाश सभी के लिए है, सूर्य की किरणें सभी पर समान रूप से चमकती हैं, अग्नि, जल तथा वायु जैसी ईश्वर की बनाई हुई चीजें किसी से भेदभाव नहीं करतीं।
उन्होने कहा कि आज समाज में चारों ओर वैमनस्यता, आतंकवाद, हिंसा, भ्रष्टाचार, अनैतिकता तथा साम्प्रदायिकता जैसी विसंगतियां बड़ी तेजी से बढ़ रही हैं। ये विसंगतियां मानव के मन व मस्तिष्क की उपज हैं जिन्हें केवल कानून बनाकर अथवा बाहरी साध्नों से दूर नहीं किया जा सकता बल्कि इसके लिए हमें अध्यात्मज्ञान का सहारा लेना होगा। जब व्यक्ति के मन में शांति होगी तभी उसके परिवार, गांव, शहर, देश व समाज में शांति फैलेगी।
महाराज जी नें कहा कि वे अपने अन्दर छिपी अध्यात्मज्ञान की शक्ति को जानें, आत्मबल को मजबूत करें तथा समाज में प्रेम, शान्ति व सद्भावना का वातावरण बनाने के लिए एकजुट होकर आगे आयें। उन्होंने कहा कि ईर्ष्या, वैमनस्यता तथा दुर्भावना से किसी भी राष्ट्र व समाज का भला नहीं होता। दुर्भावना जहां राष्ट्र को सांस्कृतिक व आर्थिक रूप से कमजोर करती है वहीं पारस्परिक प्रेम, शान्ति व सद्भावना से राष्ट्र मजबूत होता है। जब समाज में शान्ति होगी, सद्भावना होगी तभी देश आर्थिक रूप से खुशहाल हो सकेगा।































