*समय के सद्गुरु के शरणागत होकर ही मनुष्य का उद्धार सम्भव -महात्मा दर्शनी बाई*

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*मिश्रिख/सीतापुर,29 अगस्त।* अखिल भारतीय धार्मिक और सामाजिक संस्था मानव उत्थान सेवा समिति के तत्वावधान और पूज्य श्री सतपाल जी महाराज की प्रेरणा से ग्राम सरवा, थाना थाना-संदना में संत ने अविरल सत्संग की ज्ञानगंगा में भक्तों को गोता लगवाया। भक्त, भक्ति और भगवान जीवन का सबसे महत्वपूर्ण विषय है। संसार के सभी मनुष्य भक्ति कर रहे है, नाना प्रकार से साधन, तप, तप, यज्ञ-हवन, व्रत और उपवास कर रहे है जो सब निरर्थक है। बिना भगवान के नाम को जाने भगवान की भक्ति संभव नहीं है। भगवान के साकार रूप में सद्गुरु ही होते हो जो भटके जीव को भगवान के सच्चे नाम का बोध कराकर व्यक्ति को सन्मार्ग पर लगाते है। कार्यक्रम के प्रथम दिन उक्त बातें मानव उत्थान सेवा समिति जिला सीतापुर प्रभारी महात्मा दर्शनी बाई जी ने कही।
तीन दिवसीय सदभावना संत सम्मेलन के प्रथम दिन नैमिष धाम से पधारे महात्मा सुदासानंद जी ने भक्त समुदाय को सम्बोधित करते हुए कहा कि यह संत समागम कलयुग में दुर्लभ सम्पदा है जो हमें ईश्वर की कृपा से सुलभ हो रहा है। संत-समागम और हरि-कथा हमें दोनों ही प्राप्त हो रहा है। हम बड़े भाग्यशाली है। महात्मा जी ने कहा कि अगर आपको भक्ति करनी है तो समय के सद्गुरु के सानिध्य में जाकर सेवा और सत्संग सुनकर सद्गुरु के बताएं हुए मार्ग पर चलना है और अपना कल्याण करना है।

शाहजहांपुर से पधारी मंचासीन महात्मा निधी बाई जी ने अपने सत्संग विचारों और भजन के माध्यम से बताया कि- नाम सदा सुखदायी हरि को। अर्थात भगवान का नाम हर स्थिति और परिस्थिति में सुख को प्रदान करने वाला है। भगवान का नाम चाहे सुख में ले या दुःख में ले वह सदा सुखकारी ही होता है। जिस प्रकार मीठा खाने पर चाहे हम सुख में खाये या दुःख में वह हमेशा मिठास ही प्रदान करता है।

अनेक तीर्थ स्थलों से पधारे आत्म अनुभवी संत-महात्माओं का स्वागत श्री दिनेश सिंह, उत्तम सिंह, सुंदर सिंह, कठिलेराय, हीरालाल वर्मा, नन्हकू, बिहारीलाल, पंकज कुमार, प्रमोद कुमार (एलआईसी एजेंट) सहित अनेक सम्मानित लोगों ने मंचासीन संत महात्माओं और गायक कलाकारों का फूल-मालाओं से स्वागत किया।कार्यक्रम में दिल्ली से पधारे भजन गायक कलाकार अमर दास जी और उनकी टीम ने अपने सुमधुर भजनों से सबको लाभान्वित किया और आसपास के सभी भक्तों ने सत्संग और हरि भजनों का पूरा लाभ उठाया। आरती-प्रसाद के साथ कार्यक्रम को विश्राम किया गया।

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