नई दिल्ली| राष्ट्रध्वज राष्ट्र की अस्मिता है! 15 अगस्त और 26 जनवरी को ये राष्ट्रध्वज अभिमान के साथ फहराए जाते हैं; परंतु उसी दिन यही राष्ट्रध्वज सड़कों और नालों में फटी हुई अवस्था में पड़े मिलते हैं। इसलिए अनेक दिनों तक इन राष्ट्रध्वजों का अनादर देखना पड़ता है। आजकल तिरंगे के रंग के मास्क, राष्ट्रध्वज छपे हुए टी-शर्ट, टोपी आदि अन्य उत्पाद भी बेचे जाते हैं। इस प्रकार के विविध माध्यमों से राष्ट्रध्वज के होने वाले अपमान को रोकने के लिए सरकार कठोर कार्यवाही करे|
इसके लिए हिन्दू जनजागृति समिति की ओर से सेक्टर 31, फरीदाबाद के एस.एच.ओ.योगेश कुमार व सहयोगी उमेश कुमार को, पुलिस आयुक्त कार्यालय व एन.आई. टी.- 5 फरीदाबाद की एस.एच.ओ. श्रीमती सुनीता तथा फरीदाबाद जिला आयुक्त को सिटी मजिस्ट्रेट अमित मान के माध्यम से राष्ट्रध्वज का अपमान रोकने के संबंध में एक ज्ञापन दिया गया। नोएडा में नगर मजिस्ट्रेट के कार्यालय तथा मथुरा में सिटी मजिस्ट्रेट सौरव दुबे को ऑफिस में ज्ञापन दिया गया। इस समय फरीदाबाद में जनजागृति समिति के कार्यकर्ता सुरेश मुंजाल, गुलशन किंगर, विवेक कुमार,आजाद नरवत,सुरेंद्र कुमार,देवेंद्र जी,“सब का प्रयास” चैरिटेबल ट्रस्ट की ओर से राजेंद्र शर्मा, श्रीमती सुमन वर्मा और श्रीमती विजयलक्ष्मी, हिंदू जन जागृति समिति की रण रागिनी शाखा की ओर से श्रीमती संदीप कौर मुंजाल उपस्थित थे। नोएडा में हिन्दू जनजागृति समिति कार्यकर्ता हरि कृष्ण शर्मा,अरविंद गुप्ता व राष्ट्रप्रेमी मनोज कुमार शर्मा व दीपक दुबे उपस्थित थे।

मथुरा में सिटी मेजिस्ट्रेट को ज्ञापन देते समय डॉक्टर भूपेश शर्मा, डॉक्टर पूनम शर्मा, पूनम किंगर व अन्य पांच धर्मप्रेमी उपस्थित थे।
इसके अतिरिक्त दिल्ली में सनातन धर्म विद्या भवन, अलकनंदा की प्रधानाचार्या श्रीमती उषा वासुदेवा तथा मथुरा कैंट के आर्मी पब्लिक स्कूल में ‘स्वतंत्रता दिवस पर प्लास्टिक ध्वज का उपयोग ना हो एवं राष्ट्र ध्वज का सम्मान करें’ इस विषय पर विद्यार्थियों का उद्बोधन हो इस हेतु निवेदन दिया।
ध्वजसंहिता के अनुसार ‘राष्ट्रध्वज का इस प्रकार से उपयोग करना’ ध्वज का अपमान ही है। यह ‘प्रतीक और नाम (अनुचित उपयोग की रोकथाम) अधिनियम, 1950’ तथा ‘राष्ट्रीय गौरव अपमान निवारण अधिनियम 1971’ का उल्लंघन है। राष्ट्रध्वज का यह अनादर रोकने के लिए हिन्दू जनजागृति समिति द्वारा मुंबई उच्च न्यायालय में जनहित याचिका (103/2011) प्रविष्ट की गई थी। इस संबंध में सुनवाई करते हुए न्यायालय ने प्लास्टिक के राष्ट्रध्वज द्वारा होनेवाला अपमान रोकने का आदेश सरकार को दिया था। उसके अनुसार केंद्रीय और राज्य गृह विभाग तथा शिक्षा विभाग ने इससे संबंधित परिपत्रक भी निकाला था। इसके साथ ही केंद्र सरकार ने भी ‘प्लास्टिक बंदी’ का निर्णय लिया है। किंतु अभी भी अनेक जगह छुप-छुपकर राष्ट्रध्वज बेचे जाते हैं ऐसे ध्यान में आया है। अतः सरकार द्वारा राष्ट्रध्वज का अपमान करने वालों पर तत्काल कठोर कार्यवाही आवश्यक है।

इस संदर्भ में शासन से निम्नांकित मांगे की गई –
1. शासन राष्ट्रध्वज का अपमान रोकने के लिए उद़्बोधन करनेवाली कृति समिति स्थापित करें।
2. जनपद में कहीं भी प्लास्टिक के राष्ट्रध्वज का उत्पादन और बिक्री हो रही हो, तो संबंधितों पर तत्काल कार्यवाही करें।
3. विद्यालयों में ‘राष्ट्रध्वज का सम्मान करें!’ यह उपक्रम चलाया जाए, ऐसा निर्देश दे।































