भगवान का अवतार किसी विशेष उदेश्य के लिए होता है- साध्वी दर्शनी बाई

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संवाददाता/टटीरी मण्डी, बागपत, 05 सित0। धार्मिक और समाजिक संस्था मानव उत्थान सेवा समिति की शाखा श्री हंस सत्संग भवन, रेलवे रोड अग्रवाल मण्डी, टटीरी में स्थित अग्रवाल धर्मशाला के प्रांगण में संगीतमय सात दिवसीय श्रीमद्भागवत आत्म-कथा महायज्ञ के दूसरे दिन कथा व्यास साध्वी दर्शनी बाई जी ने भगवान की अवतार कथा का वर्णन करते हुए कहा कि पृथ्वी पर भगवान का अवतार किसी विशेष उदेश्य के लिए होता है, धर्म की स्थापना करने के लिए और अधर्म का नाश करने के लिए होता है। जब अधर्म बढ़ जाता है, चारों ओर त्राहि-त्राहि होने लगती है, तब स्वयं भगवान नर रूप में आकर अनेक प्रकार की लीला करते है। भक्तों की रक्षा करके दुष्ट प्रवृति के दानवों का संहार करते है।
मानव धर्म के प्रणेता और आध्यात्मिक गुरू श्री सतपाल जी महाराज की परम शिष्या कथाव्यास साध्वी जी ने उपस्थित भक्तोें को समझाते हुए कहा कि भगवान के चैबीस अवतारों में सबसे ज्यादा मान्यता मर्यादा पुरूषोत्तम भगवान श्री राम और कर्मयोगी भगवान श्री कृष्ण की है। सबसे ज्यादा भक्त और मंदिर भी इन्ही महापुरूषों के है। और हमारे धर्मशास्त्रों में प्रमाण है कि जिन भक्तों ने भगवान की भक्ति की और सत्य मार्ग पर चले उनका नाम अमर हो गया। आज हम उन्हीं भक्तों की पूजा करते है।
कथा में आज के यजमान योगेश गोयल और धर्मपत्नि गीता देवी ने साध्वी दर्शनी बाई जी और सहयोगी साध्वी द्वितीया बाई जी व साध्वी धनिष्ठा बाई जी, सरीता बहन व दिल्ली से पधारे भजन गायक कलाकारों का फूल-माला और श्री राधे-कृष्ण के पट्टे से स्वागत किया।
साथ ही दिल्ली व अनेक स्थानों से पधारें हुए भजन गायक कलाकार अमर रंगीला, देवेद्र सिंह, डी.डी.चैहान ने वामन बन गये कृष्ण मुरार, आये राजा बलि के द्वार, रे मानुष क्या ढूँढे इस जग में, सब कुछ तेरे अन्दर, कभी प्यासे को पानी पिलाया नही, बाद अमृत पिलाने से क्या फायदा जैसे अनेक सुमधुर भजनों द्वारा सबको भाव विभोर कर दिया।
आज के मुख्य अतिथि पूर्व चेयरमैन प्रमोद कुमार गुप्ता ने द्वीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारम्भ किया। संजीव शर्मा, अतुल गोयल, सुनील, अंकुर शर्मा, राजकुमार, राजेश कुमार, बबलू गोयल, मुकेश, अनिल गोयल, अजय गोयल, प्रमोद गोयल, दिनेश, श्रवण, चमन, मास्टर गजराज, संदीप गोयल, देवकुमार, रामकिशन, रूचि गोयल, कमला देवी, केशवती, आदि उपस्थित थे। मंच संचालन धुरन्धर चैहान ने किया
कथा दोपहर 1 से प्रारम्भ होकर सायं 5 बजे तक चला। आरती-प्रसाद के साथ आज के कथा का विश्राम किया गया।

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