संवाददाता/टटीरी मण्डी, बागपत, 08 सित0। प्रसिद्ध समाजसेवी और आध्यात्मिक गुरू श्री सतपाल जी महाराज की परमशिष्या कथाव्यास साध्वी दर्शनी बाई जी ने उपस्थित श्रद्धालुओं को समझाते हुए कहा कि अध्यात्म-ज्ञान से ही मनुष्य का कल्याण सम्भव है। जब भगवान की कृपा होती है तब सच्चे संतों का सानिध्य प्राप्त होता है और आत्म-ज्ञान का बोध कराते है। जब खुद का ज्ञान हो होगा तो आपस में एकता और सद्भावना आयेगी और राष्ट्र मजबूत होगा। आइए हम सभी लोग महापुरूषों के सपने को साकार और भारत को विश्वगुरू बनायें। सध्वी जी ने बताया कि भगवान श्रीकृष्ण के कहने पर भगवान इन्द्र की पूजा छोड़कर जब गोबर्धन की पूजा करने लगे तब कुपित इन्द्र ने जलमग्न कर दिया। तब श्रीकृष्ण ने गोबर्धन पर्वत अपनी उँगली पर धारण कर ब्रजवासियों सहित समस्त जीवों की रक्षा की। तीनों लोकांे के देवी-देवता अपने धाम से वेष बदल कर आते थे और भगवान की लीला देखकर आश्चर्य चकित हो जाते थे।
मानव उत्थान सेवा समिति की शाखा श्री हंस सत्संग भवन, रेलवे रोड अग्रवाल मण्डी, टटीरी में स्थित अग्रवाल धर्मशाला के प्रांगण में संगीतमय सात दिवसीय श्रीमद्भागवत आत्म-कथा महायज्ञ के पांचवे दिन कथा व्यास साध्वी दर्शनी बाई जी ने भगवान श्रीकृष्ण के प्रसंग के दौरान भक्त समुदाय को बताया कि भगवान श्रीकृष्ण ने अर्जुन को माध्यम बनाते हुए समस्त जीवों को समझाते है कि-सर्व धर्मानपरितज्यं मामेकं शरणंब्रज, अहंत्वंसर्वपापेभ्यों मोक्षस्यामिमासुचः। अर्थात सभी धर्मो को छोड़ कर मेरी शरणागत होजा, निसन्देह ही मै तुझे सभी पापों से मुक्त कर दुंगा। भगवान श्रीकृष्ण और बलराम मथुरा गमन के उपरान्त आततायी कंस सहित बाकासुर, आकासुर और पूतना जैसे अनेक पापी आत्माओं का उद्धार किया।
कथा में आज के यजमान संदीप कुमार गोयल धर्मपत्नि श्रीमती दीपा देवी ने कथा व्यास साध्वी दर्शनी बाई जी और सहयोगी साध्वी द्वितीया बाई, साध्वी धनिष्ठा बाई जी, सेविका सरीता बहन व भजन गायक कलाकारों का फूल-माला और श्री राधे-कृष्ण के पट्टे पहनाकर स्वागत किया।
साथ ही दिल्ली से पधारें हुए भजन गायक कलाकार अमर रंगीला, दीपक कुमार, गिरिश तिवारी (कीबोर्डवादक), प्रकाश कुमार(तबलावादक)-जहां सतगुरू आते है, सारी खुशियां आती है, कोई ढूँढों रे साधो, गुरू चरणों का सहारा, जैसे अनेक सुमधुर भजनों द्वारा सबको नाचने पर मजबूर कर दिया और सबने जमके ठुमके लगाये।
राजकुमार, नेपाल चैहान, शारदा गोयल, जयनारायण, भारती गोयल, संतोष देवी, चमनलाल, बबलू गोयल, अतुल गोयल, सुनील, मुकेश, अनिल गोयल, अजय गोयल, प्रमोद गोयल, श्रवण, चमन, देवकुमार, रामकिशन, अनिता गोयल, रूचि गोयल, कमला देवी, केशवती, आदि उपस्थित थे। मंच संचालन धुरन्धर चैहान ने किया। कथा दोपहर 1 से प्रारम्भ होकर सायं 5 बजे तक चला। आरती-प्रसाद के साथ आज के कथा का विश्राम किया गया।

































