संवाददाता/गोरखपुर, 29 फरवरी। मानव उत्थान सेवा समिति शाखा गोरखपुर द्वारा चंपादेवी पार्क में आयोजित दो दिवसीय सद्भावना सम्मेलन के प्रथम दिवस पर विशाल जनसमूह को संबोधित करते हुए परमपूज्य श्री सतपाल जी महाराज ने कहा कि सम्मेलनों में सबको अध्यात्म-ज्ञान की प्रेरणा मिलती है। अध्यात्म ज्ञान का भारत में प्रचार-प्रसार करना होगा। अध्यात्म के प्रचार-प्रसार से ही भारत का सर्वांगीण विकास संभव है। अध्यात्म के प्रचार-प्रसार से ही राष्ट्रीय एकता, मानव प्रेम और पारस्परिक सौहार्द एवं सद्भावना की जागृति होगी। अध्यात्म से ही मानव का नैतिक एवं चारित्रिक उत्थान संभव है। हमारा जहां भी सत्संग होता है, हम इसी बात पर जोर देते हैं कि बाहर की सफाई के साथ-साथ अंदर की भी सफाई होनी चाहिए। जब हमारा मन स्वच्छ और निर्मल होगा तभी सद्भावना का संदेश जन-जन तक पहुंचेगा तभी वसुधैव कुटुंबकम तथा सर्वजन हिताय एवं सर्वजन सुखाय की भावना की जागृति होगी।
श्री सतपाल जी महाराज ने कहा कि भारत की सबसे बड़ी शक्ति अध्यात्म की शक्ति है। हमें अपनी आध्यात्मिक शक्ति का पुनर्जागरण करना होगा। अगर हमारे अंदर सद्भावना होगी, सुमति की भावना होगी तो हमारा रास्ता निश्चित रूप से देश को विकास के क्षेत्र में आगे बढ़ाने वाला होगा और भारत के अंदर आध्यात्मिक शक्ति की जागृति होगी तो पुनः हमारा भारतवर्ष विश्वगुरु का स्थान प्राप्त करेगा। हम कृतसंकल्प है कि भारत पुनः विश्वगुरु बने और हमारा यही प्रयास है कि अध्यात्म की शक्ति से भारत को पुनः विश्व गुरु का स्थान प्राप्त हो।
परमपूज्या माता श्री अमृता जी ने सम्मेलन में उपस्थित विशाल जनसमूह को संबोधित करते हुए कहा कि प्रत्येक शिष्य को समर्पित भाव से तन-मन और धन से गुरु महाराज की सेवा करनी चाहिए। जब शिष्य-श्रद्धा भक्ति भावना से गुरु की सेवा करता है तो उसका चंचल मन धीरे-धीरे अंतर्मुख होने लगता है।भाव से की गई सेवा इहलोक और परलोक संवारने में सहायक होता है। जितनी सेवा करेंगे उससे कई गुना गुरु महाराज जी हमें सेवा का फल प्रदान करेंगे। हमें निश्चयात्मक बुद्धि से सेवा करनी चाहिए। सेवा का फल मीठा होता है।
श्री विभु जी ने कहा कि यह मानव तन अनमोल है जो प्रभु कृपा से हमें प्राप्त हुआ है लेकिन मानव तन क्षण भंगुर भी है। इसे जीने के लिए हमें महापुरुषों का सन्मार्ग चाहिए। संत-महापुरुष मानव के चंचल मन को एकाग्र करने की क्रियात्मक विधि बताते हैं। मन की चंचलता ही अशांति का मूल कारण है। यह चंचल मन प्रभु परमात्मा के भजन-ध्यान के अभ्यास से ही एकाग्र होता है।
सम्मेलन में भजन गायक कलाकारों ने सुमधुर भजनों का गायन किया। भक्तिमय वातावरण में इस सुंदर सुंदर भजनों पर श्रद्धालु भक्त अपने आप को रोक नही पाए और जम कर झूमे। बाल कलाकारों ने सुंदर सांस्कृतिक कार्यक्रमों की प्रस्तुति की। अनेक संत-महात्माओं ने भी अपने सत्संग-प्रवचनों द्वारा जनमानस को अध्यात्म का संदेश दिया। म. हरिसंतोषानंद ने मंच का संचालन किया।इस अवसर पर सर्व श्री नारायण श्रीवास्तव, मुन्ना सिंह, केपी श्रीवास्तव, गोपाल सिंह रावत, संतोष कुमार यादव, योगेंद्र जायसवाल, परमेश्वर श्रीवास्तव, रामसजन यादव, अशोक वर्मा, ईश्वर चंद जयसवाल, विकास चौरसिया, पन्नालाल, हरेंद्र तिवारी, सुरेन्द्र सिंह, प्रहलाद सिंह, श्रीकांत प्रजापति, अमरजीत सिंह, उदय भान सिंह, आदि मौजूद थे।

































