कलयुग में केवल नाम ही आधार है-साध्वी दर्शनी बाई

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कोटपुतली,जयपुर(राजस्थान)। मानव उत्थान सेवा समिति के तत्वावधान और श्री हंस सत्संग भवन, पुतली द्वारा आयोजित श्री राम मंदिर, लक्ष्मीनगर के प्रांगण में संगीतमय सात दिवसीय श्रीमद्भागवत आत्म-कथा महायज्ञ के दूसरे दिन कथा व्यास साध्वी दर्शनी बाई जी ने भगवान की अवतार कथा का वर्णन करते हुए कहा कि पृथ्वी पर भगवान का अवतार धर्म की स्थापना करने और अधर्म का नाश करने के लिए होता है। जब अधर्म बढ़ जाता है, चारों ओर त्राहि-त्राहि होने लगती है, तब स्वयं भगवान नर रूप में आकर अनेक प्रकार की लीला करते है। भक्तों की रक्षा करके दुष्ट प्रवृति के दानवों का संहार करते है।
           मानव धर्म के प्रणेता और आध्यात्मिक गुरू श्री सतपाल जी महाराज की परम शिष्या कथा व्यास साध्वी जी ने उपस्थित भक्तोें को समझाते हुए कहा कि हमारे धर्मशास्त्रों में प्रमाण है कि जिन भक्तों ने भगवान की भक्ति की और सत्य मार्ग पर चले उनका नाम अमर हो गया। आज हम उन्हीं भक्तों की पूजा करते है। कलयुग में केवल नाम ही आधार है, वामन भगवान की सुन्दर झाँकी भी निकाली गयी। सभी भक्त भगवान के दर्शन करके खुशी में झूम उठे।
            आज के यजमान श्री राजू जांगिड़ धर्मपत्नी श्रीमती माया देवी ने कथा व्यास साध्वी दर्शनी बाई जी और विभिन्न स्थानों से पधारें हुए अनेक भजन गायक कलाकारों का फूल-माला और राधे-कृष्ण के पट्टे पहनाकर स्वागत किया।
साथ ही दिल्ली व अनेक स्थानों से पधारें हुए धुरन्धर चैहान, अमर रंगीला, प्रसिद्ध भजन गायिका सरगम गायत्री ने-राजस्थानी भजन चाल्यों सखिरा आपा हरि गुण गावा, मारने वाला है भगवान, बचााने वाला है भगवान, जय-जय राम जय सियाराम, दो अक्षर का प्यारा नाम, वामन बन गये कृष्ण मुरार, आये राजा बलि के द्वार, जागो दुनिया वालो, और जानों सत्यनाम, बिना नाम जाने ना होगा कल्याण और जिस मुझे ये तो बता मुरलीवाले, तेरा जलवा कहा पर नही है जैसे सुमधुर भजनों द्वारा सबको भाव-विभोर कर दिया।
            कथा में गोवर्धन, जगदीश सैनी, लक्ष्मन, हिरालाल सैनी, घनश्याम, रामकुमार, शम्भू दयाल, रामजी लाल, सीताराम, सुणाराम, रामप्रताप, देवनारायण, प्रहलाद, दिलकौर देवी, कान्ता देवी, ललिता देवी, मीना देवी, सुलोचना देवी, संतोष देवी, उर्मिला देवी, सावित्री देवी, विधा देवी, कौशल्या देवी आदि उपस्थित रहे।

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