संवाददाता/हरिद्वार, 14 अप्रैल| मानव उत्थान सेवा समिति तत्वावधान में ऋषिकुल कालेज मैदान में चल रहे सद्भावना सम्मेलन के अंतिम दिन अपार जनसमुदाय को संबोधित करते हुए उत्तराखंड सरकार में कैबिनेट मंत्री व सुविख्यात समाजसेवी श्री सतपाल महाराज जी ने कहा कि जिस प्रकार भागीरथ कर्म करके स्वर्ग की धारा गंगा को धरती पर ले आया इसी प्रकार हम भी कर्म करके अपना कल्याण कर सकते है तथा राष्ट्र की उन्नति कर सकते है| उन्होंने कहा कि राष्ट्र की उन्नति के लिए हमें कर्मशील बनना होगा |
श्री महाराज जी ने बताया कि संत कबीर ने सधुक्कड़ी भाषा में जो कहा वह आज भी शोध का विषय है और विज्ञान की बिग बैंग (महाविस्फोट) थ्योरी की समझ विकसित करता है| जिस महाविस्फोट के बाद ब्रह्माण्ड का सृजन हुआ उसके बारे में संकेत करते हुए गीता में भगवान् श्रीकृष्ण कहते है कि सृष्टि के आदि में यह ज्ञान मैंने सूर्य को दिया था जो मनु, इच्छावाकू, और राजऋषियों से होते हुए इसका विस्तार हुआ| कालान्तर में यह ज्ञान लुप्त हो गया| इसी को प्रतिपादित करने के लिए मेरा प्रादुर्भाव हुआ है|
भौतिक शिक्षा के साथ-साथ आध्यात्मिक शिक्षा को जरुरी बताते हुए श्री महाराज जी ने कहा कि आज हमारे देश में शिक्षा का व्यापक प्रचार-प्रसार है| अनेक स्कूल, कालेज और विश्वविद्यालय बड़ी तेजी से खुलते जा रहे है लेकिन इस सबके बावजूद हम अपने स्वामी विवेकानंद, छत्रपति शिवाजी, महाराणा प्रताप, रानी लक्ष्मीबाई, मीरा बाई जैसी विभूतियों को पैदा नहीं कर पा रहे है| इसका एकमात्र कारण यह है कि आज हमनें ऋषि-मुनियों की शिक्षा अध्यात्मवाद को भुला दिया है|
डा.भीमराव आम्बेडकर जयंती पर अपने विचार रखते हुए श्री महाराज जी ने कहा कि जिस प्रकार महर्षि बाल्मिकी जी ने रामायण लिखी थी उसी प्रकार डा.भीमराव आम्बेडकर जी ने संबिधान लिखा जिससे भारत को अपना संबिधान और एक कानून व्यवस्था मिली |
महाराज श्री ने गीता, रामायण, आदि का हवाला देते हुए कहा कि सारा पदार्थ चाहे वह ठोस, द्रव या गैस हो एक स्पंदन है| यह धरती, आकाश, जल, वायु, सब कुछ स्पंदन है| बिजली इलेक्ट्रोन का और प्रकाश प्रोटोन का स्पंदन है| उन्होंने कहा कि इस प्रकार सारा ब्रह्माण्ड ही स्पंदन से ओत-प्रोत है| वही स्पंदन हमारे हृदय में भी है| उसी स्पंदन को योगियों ने अनहद के रूप में ध्यान अवस्था में सुना | इसी स्पंदन को गुरु नानकदेव जी ने ‘शबद’ कहा |
इस अवसर पर देश-विदेश से सम्मेलन में आये हुए मानव उत्थान सेवा समिति के सदस्यों ने श्री सतपाल महाराज, श्रीमती अमृता रावत , श्री विभु जी, श्री सुयश जी का फुल-मालाओं से स्वागत किया| कार्यक्रम का संचालन म.हरिसंतोषानंद ने किया|
































