श्री कृष्ण और रूक्मिणी का विवाह जीव और ब्रह्म के मिलन का प्रतिक है-साध्वी दर्शनी बाई

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मेरठ कैंट, 29 जूलाई। मानव उत्थान सेवा समिति के तत्वावधान में वेस्ट एण्ड रोड, मंदिर मार्ग मेरठ कैंट में स्थित मानव धर्म मंदिर के प्रांगण में सात दिवसीय श्रीमद्भागवत आत्म-कथा महायज्ञ के छठवें दिन कथा व्यास साध्वी दर्शनी बाई जी ने भगवान श्री कृष्ण और रूक्मिणी का विवाह प्रसंग सुनाते हुए कहा कि श्री कृष्ण और रूक्मिणी का विवाह जीव और ब्रह्म के मिलन का प्रतिक है। किस प्रकार जीव अपने अंशी से मिलता है तथा जीव परमात्मा से मिलने के बाद ब्रह्म में विलिन हो जाता है। भगवान ने सभी गोप-गोपिकाओं को शरण देकर सबका उद्धार किया और तरह-तरह का रास रचाया।
प्रसिद्ध समाजसेवी और आध्यात्मिक गुरू श्री सतपाल जी महाराज की परम शिष्या कथा व्यास साध्वी दर्शनी बाई जी ने समस्त जनमानस को समझाते हुए कहा कि भक्त सुदामा और भगवान श्री कृष्ण की मित्रता का उदाहरण पूरी दुनिया में एक मिशाल है। अत्यंत निर्बल और गरीब भक्त सुदामा भगवान श्री कृष्ण के परम भक्त थे। हमें भी भगवान की भक्ति करके अपना जीवन सार्थक बनाना है। उस परमात्मा को अपने हृदय में जानकर उसका भजन-सुमिरण करके अपना कल्याण करना है। भक्त सुदामा और भगवान श्री कृष्ण के प्रसंग पर पूरा वातावरण भक्तिमय हो गया था।
कथा में आज के यजमान नेपाल सिंह चौहान धर्मपत्नि श्रीमती इन्द्रेस देवी और विनित चौहान धर्मपत्नि श्रीमती शिखा देवी ने साध्वी दर्शनी बाई जी और सहयोगी साध्वी धनिष्ठा बाई जी व भजन गायक कलाकारों का फूल-माला और श्री राधे-कृष्ण के पट्टे से स्वागत किया।
साथ ही दिल्ली व अनेक स्थानों से पधारें हुए भजन गायक कलाकार अमर रंगीला, सुरेन्द्र कुमार (सितारवादक), प्रकाश कुमार(तबलावादक),रवि टिकेकर और पड़ोसी देश नेपाल से पधारी हुई प्रसिद्ध भजन गायिका सरगम गायत्री ने-आओ मेरी सखियां मुझे मेंहदी लगा दो, मुझे श्याम सुन्दर की दुल्हन बनादो, सबसे उँची प्रेम सगाई जैसे अनेक सुमधुर भजनों द्वारा सबको भाव विभोर कर दिया। कलाकारों के सुन्दर भजनों पर सबने खुब जमके ठुमके लगाये। भगवान श्री कृष्ण और रूक्मिणी विवाह तथा भक्त सुदामा की सुन्दर झाँकिया भी निकाली गयी
राजेश गोयल, सोनवीर, बलवीर, श्रीराम, राकेश गोयल, सतेन्द्र सिंह, भँवर सिंह, कुलदीप, पुष्पा शर्मा, दिव्या चौहान, पारूल, सुनीता और अनेक कार्यकर्ता मौजूद थे। मंच संचालन धुरन्धर चौहान ने किया। कथा दोपहर 2 से प्रारम्भ होकर सायं 5 बजे तक चला। आरती-प्रसाद के साथ आज के कथा का विश्राम किया गया। आज का प्रसाद शाखा प्रधान देवेन्द्र सिंह की तरफ से बांटा गया।

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