हिम बहादुर सोनार/सिलीगुड़ी : विद्या की देवी माँ सरस्वती को हंस पर सवार दिखाया जाता है इसका आध्यात्मिक संकेत यह है कि हर जीव के स्वर को चलाने वाली शक्ति ही सरस्वती है l हंस हमारी आत्मा है l हंस के पास यह विशेषता है कि वह दूध और पानी से दूध ग्रहण कर पानी छोड़ देता है उसी प्रकार हमारी स्वांसों को चलाने वाली आत्मा रूपी हंस वायु से ऑक्सीजन ग्रहण कर कार्बन डाइऑक्साइड छोड़ देते हैं l उसी हंस रूपी आत्मा का ज्ञान सदगुरु महाराज देकर मनुष्य को सही मायने में माँ सरस्वती की पूजन-विधि बता देते हैं l ज्ञान के रहस्य को उदघाटित करते हुए कहा कि जब हम स्वांसो में रमण करने वाली माँ सरस्वती के वाणी से परे पावन नाम को तत्वदर्शी सदगुरु से जानकर भजन करेंगे तभी हमारा जीवन कल्याण होगा l यह बातें श्रद्धालुओ भक्तों को सम्बोधित करते हुए मानव उत्थान सेवा समिति के उत्तरपुर्वांचल प्रभारी साध्वी महात्मा अखिलेश बाईजी ने सरस्वती पूजा के पावन अवसर पर दस फरवरी को विजयनगर तहसील के हुचाईमलिक शाखा में एक दिवसीय स्वर्णजयंती सद्भावना सत्संग समारोह के दौरान प्रवचन में कहा।
बसन्त पंचमी के दिन सत्संग की अविरल गंगा में डुबकी लगाकर ज्ञान रूपी मोती प्राप्त करने के लिए सिलीगुड़ी , सालूगाड़ा, सुकना, मेडिकल मोड़, खपरैल, एनजीपी सहित स्थानीय श्रद्धालु भक्तगण उपस्थित थे। मानव धर्म के प्रणेता सदगुरुदेव श्री सतपालजी महाराज के वरिष्ठ साध्वी महात्मा अखिलेश बाईजी, महात्मा अंकिता बाईजी एवं अन्य संत महात्माओं की उपस्थिति में दीप प्रज्वलित कर आध्यात्मिक कार्यक्रम की शुरुआत किया गया l आगे
साध्वी महात्मा अंकिता बाईजी ने कहा कि आज लोग अपने घर में लक्ष्मी अर्थात धन चाहते हैं पर लक्ष्मी का वाहन उल्लू है I उल्लू को दिन के प्रकाश में दिखाई नहीं देता इसीलिए मनुष्य के पास अधिक धन हो जाने से धन के अभिमान में उसकी ज्ञान-नेत्र बंद हो जाते हैं I वह धन का दुरूपयोग करने लगता हैं I पर जिसके पास विद्या की देवी सरस्वती है उसके पास लक्ष्मी और विष्णु दोनों की कृपा बरसती है I बाईजी ने सत्संग की महत्व को समझाते हुए कहा कि सत्संग मनुष्य को बगुला से हंस बना देता है l देखने में दूर से बगुला और हंस एक जैसा सफ़ेद दिखता है पर गुण में अन्तर है, हंस मोति चुगता है और बगुला मछली l उसी प्रकार सत्संग में आने से मनुष्य का विवेक जागृत होता है और उसका कर्म सुधरता है l अगर आज हर इंसान सत्संग में आने लगे तो सबके विचार और कर्म सुधरने लगेंगे तथा देश में स्वतः अमन-चैन की स्थापना हो जाएगी l
पूज्य दीक्षा बाईजी ने कहा कि आज सद्गुरु श्री सतपालजी महाराज संत महात्माओं को जगह जगह भेजकर सत्संग के द्वारा मानव का हृदय परिवर्तन करके देश में रामराज्य की स्थापना करने में लगे हैं I
पूज्य महात्मा श्री अचला बाईजी एवं बबिता बाईजी भी अपने अपने आध्यात्मिक विचारों से भक्तों को लाभान्वित किया। भजन कलाकारों ने सुमधुर भजन प्रस्तुत कर सत्संग के माहौल में चार चाँद लगा दिए l मिनाती कर्मकार ने बंगला भाषा तथा अरुणा राइ हिन्दी में भजन पेश प्रस्तुत कियाl




































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