माइक्रो आर्ट के प्रख्यात चित्रकार तथा पाँच बार विश्व रेकॉर्ड्स बना चुके
अंतर्राष्ट्रीय मानवाधिकार एवं अपराध रोधी संगठन के चेरमैन रमेश शाह के साथ धुरन्धर टाइम्स के हिम बहादुर सोनार से साक्षात्कार
टाइम्स : माइक्रो आर्ट का शुरुवात आपने कब और कैसे शुरू की ?
शाह: जब मैं पाँच वर्ष का था तब से चित्रकारी करता था इसी क्रम मे छोटे अक्षरो मे लिखता था। मुझे पता नहीं था की यह मेरी छोटी-छोटी लिखने की कला एक दिन मुझे प्रख्यात बना देगी। जब मै कक्षा सातवी मे था उस समय परीक्षा के दौरान एक छोटी सी पर्ची मे एक किताब का पूरा पेज लिखकर ले गया था। मैं उस पर्ची से नकल कर रहा था और मैं पकड़ा गया। शिक्षक ने उस पर्ची को पढ़ने की कोशिस की लेकिन कुछ समझ नही पा रहे थे। आखिर शिक्षक ने मुझे पूछ ही लिया कि तुमने इसमे लिखा क्या है ? मैंने सच बता दिया। सभी शिक्षक एक साथ एकट्ठा हो गए और आश्चर्यचकित दृष्टि से मुझे देखने लगे। इस घटना से मेरे जीवन मे माइक्रो आर्ट के बारे मे परिवर्तन आया। दार्जिलिंग सरकारी कॉलेज मे पढ़ाई के दौरान 1982 मे दार्जिलिंग के भानुभक्त भवन मे आयोजित चित्रकला प्रदर्शनी मे मेरी कलाकृति को भी स्थान मिला। उस प्रदर्शनी का उदघाटन पश्चिम बंगाल के तत्कालीन राज्यपाल बी डी पांडे जी के कर कमलों से हुआ था। मेरे द्वारा बनाया गया फ़ाइन आर्ट को काफी लोगो ने सराहना की। उसके बाद 1983 मे दार्जिलिंग मे चित्रकला प्रदर्शनी हुई उसमे मैंने हिस्सा लिया। दार्जिलिंग मे अच्छे चित्रकारों का तस्वीर मैंने देखा काफी दुखी भी हुआ। इन चित्रकारों का कोई अच्छा प्लेटफ़ार्म नहीं मिला। तब मैंने कुछ अलग करने का सोचा। उसके बाद 1994 मे काठमांडू नेपाल चला गया तथा वहा जाकर मैंने टीबेटन आर्ट थांका बनाने सीखा। यह आर्ट भी बारीकी से किया जाता है। उसके बाद 1994 मे मैंने माइक्रो आर्ट मे कदम रखा और कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। आज मुझे लोग प्रख्यात माइक्रो आर्ट के रूप मे देखते है। इस घटना से मेरा जीवन ही बदल दिया। मैंने भी अपने अंदर कि कला को पहचाना और आज मैं प्रख्यात माइक्रो आर्टिस्ट के रूप मे जाना जाता हूँ।
टाइम्स : आपको लोग प्रख्यात माइक्रो आर्ट के रूप मे देखते है। इस कला का गुरु या तालिम के बारे मे बताए ?
शाह: यह भी मेरे जीवन मे अद्भुत है मैंने इस कला को किसी के द्वारा नहीं सीखा न ही तालिम ली है। यूं कहे तो मेरा कोई गुरु नहीं है।
टाइम्स : माइक्रो आर्ट कि विशेषता क्या है ?
शाह: माइक्रो आर्ट छोटे से छोटे सूक्ष्म चिजों पर चित्रकारी की जाती है। परंतु इस आर्ट को बनाने के लिए चित्रकारी में निपूर्णता होना जरूरी है। एक चावल के दाने पर जब माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी का तस्वीर बनाते है तो वह आश्चर्य का विषय बन जाता है। कई सारे चित्र का समावेश एक छोटी सी जगह मे संरक्षित रख सकते है। यही विशेषता है माइक्रो आर्ट का।
टाइम्स : अभी तक माइक्रो आर्ट के जरिये कितने कलाकृति आपने की और आप कैसे बनाते है ?
शाह: मे रे द्वारा बनाया गया माइक्रो आर्ट का सूची काफी लंबा है। मेरे प्रमुख माइक्रो आर्ट का सूची इस प्रकार है –
- एक चावल के दाने पर .115 भारत का मानचित्र।
- एक सारसो के दाने पर विश्व का मानचित्र तथा तीन महासागर का नाम।
- एक पोस्टल पोस्टकार्ड पर 86000 बार राम नाम (पेंसिल से लिखा) इसे लिखने मे छ महीने लगा।
- विश्व का सबसे छोटा किताब नाम परिमाण 5mm x 4mm जिसमे 223 देशो का नाम और 65 विश्व विख्यात व्यक्तियों का नाम अंकित है।
- विश्व का सबसे छोटा गांधी चश्मा वजन 5 मिलीग्राम
इसके बाद एक चावल के दाने पर राष्ट्रीय गान, एक चावल के दाने पर वन्देमातरम गीत प्राय दो हज़ार से अधिक चित्र मैंने बनाया है। माइक्रो आर्ट सूक्ष्म कलकारी है। इसे बनाने के लिए अच्छा माहौल और आंखो की रोशनी का काफी ख्याल रखना पड़ता है।
टाइम्स : नव युवक युवतियो को क्या संदेश देना चाहेंगे ?
शाह: निरंतर कोशिस करते रहना चाहिए, कला हो या पढ़ाई के क्षेत्र मे एक दिन सफलता जरूर मिलेगी।
टाइम्स: आपको केंद्र व राज्य सरकार से कौन सा सम्मान मिला है ?
शाह:अच्छा प्रश्न है और दुखद भी है, मुझे अभी तक केंद्र हो या राज्य सरकार से किसी भी प्रकार का सम्मान नहीं मिला। बस लोगो का प्यार और प्रशंसा काफी मिली और इससे बड़ा सम्मान मेरे लिए कुछ नहीं हो सकता है।
यह बहुत ही दुखद है कि मुझे सरकार के तरफ से कोई सम्मान नही मिला है। मुझे जो सम्मान मिला वह जनता है जनता का मुझे बहुत सारा प्यार मिला यह मेरा सम्मान कोई कम नहीं है। मेरे कलाकारी कि जिसने भी देखा उसने सराहना की है। आज उन्ही के वजह से मैंने पाँच विश्व रेकॉर्ड्स करा पाया है। हाँ, एक ख्वाइस है कि मेरे पास जो दो हज़ार माइक्रो आर्ट बनाया है उसे सुरक्षित रखने के लिए 2008 से माइक्रो आर्ट का एक म्यूजियम के लिए प्रयासरत हूँ। इसके लिए सांसद, गवर्नर ने मेरे लिए प्रस्ताव लेकर आए थे दुखद है कि मेरे पास जमीन नही थी। मैंने पश्चिम बंगाल सरकार से आवेदन किया मुझे जमीन देने का वादा भी किया लेकिन भूमि भिभाग ने जमीन नहीं दिया। मैंने खुद एक जमीन खरीदी म्यूजियम के लिये। सिलीगुड़ी मे यह म्यूजियम बनता है तो विश्व का पहला म्यूजियम होगा। यह विश्व मे कही नही है। इससे यहा पर पर्यटन का बढ़ावा मिलेगा। उसमे सभी पश्चिम बंगाल के कलाकारो का गेलेरी हो।
टाइम्स: आगे आपने क्या सोचा है ?
शाह: सरकार मेरे कलाकृति को स्वीकृति दे और एक माइक्रो आर्ट मेउसियम के लिए मदद करे तांकि मैं इस कलाकृति को जीवित रख सकू और प्राय दो हज़ार से अधिक माइक्रो आर्ट को संरक्षित रख सकू।
संगठन का कार्य मानव अधिकार हनन को रोकना है
टाइम्स : आपने मानवाधिकार संगठन कब से शुरू किया ?
शाह: अभी मैं अंतर्राष्ट्रीय मानवाधिकार एवं अपराध रोधी संगठन का चेरमेन के पद मे हूँ । संगठन को तीन वर्ष हो रहा है। पहले जब मैं राजनीति मे था तो सामाजिक कार्य करता था। अंत मे मैं मानव अधिकार संगठन से जुड़ा। आज यह कही राज्यो मे है।
टाइम्स : देश मे कितने शाखाये मानवाधिकार के खोल चुके है?
शाह: अभी प्राय बीस राज्यो में संगठन है। पंजाब, दिल्ली, उत्तर प्रदेश, बिहार, असम, सिक्किम, पश्चिम बंगाल, जम्मू कश्मीर सहित कई राज्यो मे संगठन सक्रिय है।
टाइम्स: किन राज्यो मे सबसे अधिक क्राइम का सामना संगठन को करना पड़ रहा है ?
शाह: क्राइम तो सभी राज्यो मे होता है। उसका आकलन करना मेरा संभव नहीं है। क्राइम को रोकने के लिए विभिन्न स्थानो पर जन चेतना का जगाना का काम करते है । हमारा फोकस मानव अधिकारो का हनन पर होता है। जहा करप्शन रहता है ध्यान उस पर भी रहता है। ज़्यादातर घरेलू हिंसा के शिकार लोगो को संगठन समाधान कर रही है। महिला किसी भी रूप मे आज भी पीड़ित है। महिलाओ का अत्यधिक केस संगठन के पास आता है।
टाइम्स : घरेलू हिंसा के मामले मे समाधान करने मे कितना सक्षम हो रहे है ?
शाह: भारत एक विशाल देश है। अगर हम सोचे कि संगठन पाँच-दस केस समाधान करने से क्या फाइदा है यह गलत है। संगठन किसी भी स्थान पर पाँच केस भी समाधान करता है पूरे देश मे यह कड़ी होता है तो बहुत बड़ा उपलब्धि है। देश मे अदालत का यह हालात है कि केस को समाधान होने मे बीस वर्ष लग जाते है। न्याय मिलने मे देरी होता है। अदालत मे मामलो कि संख्या बढ़ती जा रही है। इसको हमे कम करना है। संगठन आपसी सम्झौता कराकर मामले को अपने दफ्तर पर निपटा देते है।
टाइम्स : घरेलू हिंसा से जूझ रहे महिलाए अदालत के बजाए संगठन मे समाधान के लिये आए इसके लिये महिलायेँ कितना जागृत है ?
शाह: बहुत अच्छा प्रश्न किया आपने। आजादी के सत्तर साल मे भी लोगो को अपना अधिकार के बारे मे मालूम नहीं है। कितनों को पता नही है कि मानव अधिकार है क्या ? इसलिय लोग अपना अधिकार को पहचान नही पा रहे है। यह जागरूकता संगठन कर रहा है। महिलाएं, बच्चे, बाल-मज़दूरी के अधिकारो के जन चेतना मे जगाने का काम करते है। समय पर सामाजिक कार्य ब्लड डोनेशन कैंप, निशुल्क चिकित्सा कैंप, नेत्र जांच शिविर लगाकर लोगो को जागृत करते आ रहे है।
टाइम्स : कई मुद्दे ऐसे भी आते होंगे कि पुलिस प्रसाशन से परेशानी होता हो ?
शाह: इसमे कोई परेशानी नहीं, संगठन भी भारत के संविधान के मुताबिक ही चलता है। कानून जो है वह पुलिस का मदद करता है। पुलिस प्रशासन के तरफ से सबसे ज्यादा मानव अधिकार का हनन या उलंघन होता है यह सुनने को मिलता । इसमे पुलिस और आम जनता के बीच अच्छा संबंध के लिये संगठन काम करती है। पुलिस को गलत नज़र से लोग देखते है। आज भी पुलिस मे ऐसे ऑफिसर है जो ईमानदार है। हाँ कुछ लोग करपटेड है। पुलिस के भी कई केस आता है उसे हम वही समाधान कर देते है। पुलिस भी अपने परिवार से दूर रहकर थाने मे तैनात रहते है। पुलिस को मानसिक रूप से तैयार करना हो तो सरकार को गहन चिंतन करनी होगी। जनता का सुरक्षा का ज़िम्मेदारी पुलिस प्रशासन पर होती है ।
आज तक पहाड़ो मे पानी का समस्या जस का तस
टाइम्स : हमने सुना है कि आप राजनीति से भी जुड़े है?
शाह: पहले मैंने बत्तीस वर्ष तक राजनीति किया था। छात्र जीवन से ही राजनीति मे आया। अब मैं राजनीति मे नहीं हूँ।
टाइम्स : इस बार चुनाव मे दार्जिलिंग लोकसभा का क्या समीकरण हो सकता है ?
रमेश: दार्जिलिंग मे राजनीति माहौल गंभीर है। इसमे किस पार्टी को सफलता मिलेगी यह कहना मुश्किल है। पहाड़ो मे गोर्खालैंड को लेकर काफी उथल-पुथल हुआ। उस समय हमारे वर्तमान सांसद आहलूवालिया जी दिल्ली मे डेरा डाले हुये थे। इससे पहाड़ के लोग लोग नाराज थे।
टाइम्स : आप मानव अधिकार संगठन से जुड़े है राजनीतिक के ऊपर भी समीक्षा करते है। दार्जिलिंग वासी का रुख किधर जा रहा है, वहा का जनता क्या चाहती ?
शाह: दार्जिलिंग को लेकर राजनीतिक नहीं होना चाहिए। मेरा जन्म भी मिरिक मे हुआ है। पहाड़ के राजनीतिक मे मैंने कई उथल-पुथल देखा है। जनता हमेशा राजनीतिक का शिकार हुई है। पहाड़ मे करोड़ो, अरबों का धन मिला लेकिन आज तक विकाश नही हो पाया है। पहाड़ को विकाश का जरूरत है तो सोच समझ कर वोट करना होगा। मैं 1988 मे मिरिक से सिलीगुड़ी आया। हालही मे कुछ जगह पर विकाश होता नज़र आ रहा है। पहाड़ का विकाश सबसे बड़ा मुद्दा है।
टाइम्स: विकाश नही होने से नाराज जनता वोट देने से ही इंकार कर देते है इस विषय पर क्या कहेंगे ?
शाह: पहाड़ मे बर्षों से राजनीति होता आया है। कई नेता आये कई गये। जनता के लिये किसी ने कुछ नहीं किया। आज हालत ये है कि शाम 6 बजे ड्रागीस्ट निकलते है। पहाड़ के लोगो का विकाश करना होगा। युवको को रोजगार देना होगा। जब मैं पहाड़ मे था बचपन से पहाड़ो मे पानी का समस्या देखते रहा हूँ। अभी तक किसी नेता ने समस्या का समाधान नहीं किया। कई सांसद पहाड़ मे आये लेकिन पानी का समस्या जस का तस है।
टाइम्स : आपके नज़र मे दार्जिलिंग का समाधान तथा विकाश कैसे होगा ?
शाह: हम सभी पश्चिम बंगाल सरकार मे है। दार्जिलिंग पश्चिम बंगाल के अंतर्गत आता है। जब तक यहा का सरकार से मिलकर पहाड़वासी विकाश नहीं करेंगे तो संभव नहीं है। सरकार से कंधे से कंधा मिलाकर चलना चाहिए और अपना डिमांड का मांग को पूरा करवाना चाहिए।


































