माँ और पापा की लाडली – किरण मल्होत्रा 

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 जब मैं पैदा हुई तो कितनी नादान थी।
इस दुनिया की हर बात से अंजान थी।।
चिल्लाना और रोना ही मुझे आता था।
माँ की गोद और पापा का मुस्कुराता हुआ चेहरा ही मुझे आता था।।
मम्मी पापा के प्यार में मैं इतना खोती गई।
कि पता ही नही चला कब जवान हो गई।।
जब भी रात को नींद में मैं डर जाती थी,
तो गले लगाकर सहारा दिया था आपने।
मेरी हर एक डूबती हुई नाव को किनारा दिया था आपने।।
जब भी रूठती थी तो आप झट से मना जाते थे।
मुझे रोता हुआ देखकर आपके आँखों मे से आँसू आ जाते थे।
शादी करके दुल्हन का जोड़ा पहनने को तो मेरा भी दिल करता है।
पर माँ पापा से दूर जाने से दिल डरता है।।
हाथ पकड़ कर चलना सिखाया है आपने।
आँखे तो मेरी है पर सपने देखना सिखाया है आपने।।
अगर न होती ये रीति लड़कियों के ससुराल जाने की तो पूरी जिंदगी रहलू आपके साथ।
पर अगर चली भी गई तो मेरे सर पर हमेशा रखना अपना हाथ।।

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