टेल रोटर निकलने से हुआ था हेलिकॉप्टर हादसा: वायु सेना प्रमुख

0
943

संवाददाता/गाजियाबाद : वायु सेना प्रमुख बीएस धनोआ ने कहा है कि अरुणाचल प्रदेश में हाल में जो हेलिकॉप्टर हादसे का शिकार हुआ, उसके बारे में पहली नजर में लगता है कि टेल रोटर निकल गया था। हेलीकॉप्टर के पिछले हिस्से में लगा टेल रोटर इसे सीधा बनाए रखने में मदद करता है। गाजियाबाद के हिण्डन एयरबेस पर रविवार को एयरफोर्स डे का समारोह हुआ। वायु सेना प्रमुख से इस मौके पर हेलिकॉप्टर हादसे के बारे में सवाल पूछा गया। जानकारी मिली थी कि सप्लाई उतार रहा पैराशूट हेलिकॉप्टर के रोटर से उलझ गया था और आग लग गई।

वायु सेना प्रमुख ने कहा कि हादसे के कारण पर मेरा ज्यादा कुछ कहना ठीक नहीं होगा। टेल रोटर किस वजह से निकला, इसका पता कोर्ट ऑफ इन्क्वायरी से ही चल सकेगा और जहां तक मशीन (हेलिकॉप्टर) का सवाल है, इसमें कोई समस्या नहीं है, यह आज भी उड़ रहा है। बता दें कि शुक्रवार को अरुणाचल प्रदेश में वायुसेना का एमआई 17 वी5 हेलिकॉप्टर हादसे का शिकार हो गया था, जिसमें 7 सैनिकों की मौत हो गई। रूस में बने इन हेलिकॉप्टरों को दुनिया के सबसे अडवांस्ड हेलिकॉप्टरों में गिना जाता है। एयर फोर्स डे समारोह में सूर्यकिरण ऐरोबैटिक टीम ने कलाबाजियों के साथ उड़ान भरी। इसकी अलग-अलग फॉर्मेशन को तेजस, सुखोई 30 और राफेल आदि का नाम दिया गया, जो वायुसेना के प्रमुख विमान हैं या बनने वाले हैं। एक फार्मेशन ग्रिपिन का भी था।

गौरतलब है कि वायु सेना को भारी संख्या में लड़ाकू विमानों की खरीद की जरूरत है और ग्रिपिन भी दावेदारी में है। पत्रकारों ने पूछा कि क्या यह वायुसेना की ग्रिपिन की खरीद में दिलचस्पी को जाहिर करता है। वायुसेना प्रमुख ने कहा कि सूर्य किरण के प्रदर्शन का वायु सेना की जरूरत से कोई लेना देना नहीं है। डोकलाम के बारे में पूछे गए सवाल पर उन्होंने कहा कि विदेश मंत्रालय कह चुका है कि वहां यथास्थिति कायम है। इससे पहले वायुसैनिकों को अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि हमारे सैनिक किसी भी चुनौती के लिए तैयार हैं। वायु सेना प्रमुख ने बताया कि पहली 3 महिला लड़ाकू पायलटों को मिग 21 बाइसन उड़ाने का मौका देने पर विचार हो रहा है, क्योंकि इसके ज्यादा मैनुअल होने से कौशल निखरता है। इन महिला पायलटों की ट्रेनिंग इस महीने पूरी हो सकती है। फिर 9 विमानों के साथ आई सूर्य किरण टीम एयर फोर्स डे समारोह का बड़ा आकर्षण था सूर्यकिरण एरोबैटिक टीम का प्रदर्शन। शानदार आसमानी कलाबाजियों के लिए मशहूर इस टीम का 1996 में 9 विमानों के साथ गठन किया गया था, लेकिन 2011 में विमानों की कमी से इस टीम को भंग कर दिया गया। इसके बाद फिर 2015 में यह टीम 6 विमानों के साथ सामने आई।

इस साल फिर से यह टीम अपने पूरे 9 विमानों के साथ थी। आसमानी आंख पहली बार दूसरा खास आकर्षण आसमानी आंख था, जो पहली बार एयर फोर्स डे के शो में शामिल हुआ। यह असल में एयरबोर्न अर्ली वॉर्निंग ऐंड कंट्रोल (एईडब्लू एंड सी) सिस्टम है, जो अपने सेंसरों के जरिये भारत की आसमानी सीमा के अंदर दुश्मन के लड़ाकू विमान, मिसाइल और ड्रोन घुसने की कोशिश को भांप लेने में सक्षम है। डिफेंस रिसर्च ऐंड डिवेलपमेंट ऑर्गनाइजेशन (डीआरडीओ) ने इसमें कई ऐसे सिस्टम लगाए हैं, जो देश में ही विकसित किए गए हैं। अपना एईडब्लू एंड सी सिस्टम हासिल करने में टॉप 5 देशों में भारत भी है। भारत ने इस सिस्टम के लिए 2008 में ही ब्राजील से एम्ब्रेयर विमान खरीदे थे। नेत्र को इसी साल वायुसेना में शामिल किया गया है।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here