आध्यात्मिक ज्ञान की विरासत के विस्तार से ही इस देश को दुनिया ने अपना गुरू माना- सतपाल महाराज

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नज़फगढ़, 12 नवम्बर। पंडवाला कलां स्थित श्री हंसनगर आश्रम के प्रांगण में श्री हंस जयंती के अवसर पर मानव उत्थान सेवा समिति के तत्वावधान में आयोजित दो दिवसीय सद्भावना सम्मेलन के प्रथम दिवस पर संबोधित करते हुए उत्तराखंड सरकार में कैबिनेट मंत्री व सुविख्यात समाजसेवी श्री सतपाल जी महाराज ने कहा कि आध्यात्मिक ज्ञान से ही भारत विश्व गुरु बनेगा। उन्होंने कहा कि जब अध्यात्म ज्ञान का प्रचार होगा तो देश में सदभावना होगी और तब ही राष्ट्र मजबूत होगा।
श्री महाराज ने आगे कहा कि योगीराज परमसंत श्री हंस जी महाराज ने लाखों लोगों को भारत के वेद, उपनिषद व अन्य धर्मग्रंथों में वर्णित परम प्रभु के पावन नाम एवं परम प्रकाश का ह्रदय स्थित बोध प्रदान कर उनके जीवन को निहाल किया। उन्होंने कबीर की तरह निर्भीक होकर धार्मिक पाखंड व अंधविश्वासों की पोल खोल कर सब धर्मो की एकता के लिए मानव मात्र को प्रेरित किया। आज उनकी जयंती पर हम सभी यह संकल्प ले कि हमें अध्यात्म पर चलना है और अध्यात्म ज्ञान के प्रचार में सहयोग करना है ।


उन्होंने कहा कि आज चारों ओर पर्यावरण प्रदूषण ने जीवन को दुष्कर बना दिया है, उस पर कई देशों में आपसी युद्धक तनाव के चलते विनाशकारी परमाणु हथियारों की होड़ ने धरती को नष्ट-भ्रष्ट करने के अनेक रास्ते खोल दिए हैं। इसका चहुंमुंखी नियंत्रण केवल तभी सम्भव है जब मानव अपने धर्म-कर्म को समय के सतपुरूष के सान्निध्य में समझ कर मन को काबू करे।क्योंकि प्रदूषण का असली जड़ मनुष्य का मन ही है, हमारे प्राचीन ऋषि-मुनियों को भविष्य का पूरा ज्ञान था। इसीलिए उन्होंने -‘सब सुखी हों, सब निरोगी हों और सज्जन बनें’ का उद्घोष किया था। क्योंकि भारत की प्राचीन आध्यात्मिक ज्ञान की विरासत के विस्तार से ही इस देश को दुनिया ने अपना गुरू माना, पर भौतिक प्रगति की दौड़ में हमने उस महानतम विद्या को भुला दिया। जिसके द्वारा मानव अपने वास्तविक सत्य,चेतन, आनंद स्वरूप का अनुभव प्राप्त कर जीवन के महान काया कल्प से अनेक संकटों का समाधान प्राप्त कर लेता है।


कार्यक्रम से पूर्व श्री महाराज जी, पूज्य माता श्री अमृता जी व अन्य विभूतियों का माल्यार्पण कर स्वागत किया। सम्मेलन में संत-महात्माओं व अनेक विद्वानों ने अपने विचार रखे। मंच संचालन महात्मा श्री हरिसंतोषानंद जी ने किया।

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