संवाददाता/नई दिल्ली। सोशल एंपावरमेंट विलेजर्स एसोसिएशन सेवा एवं राष्ट्रीय औषधीय पादप बोर्ड, आयुष मंत्रालय, भारत सरकार के सहयोग से सेवा के नर्सरी पार्क पॉकेट-सी मयूर विहार फेस-2 में औषधीय पौधारोपण एवं पौधा वितरण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। जिसमें 381 औषधीय पौधे लगाए एवं वितरित किए गए। इस अवसर पर वरिष्ठ पत्रकार एवं विख्यात लेखक हरीश चंद वर्णवाल ने कहा कि प्रकृति का संरक्षण मानवता के लिए बहुत महत्वपूर्ण है। दिल्ली और देश प्राकृतिक संकट से जूझ रहा है, हम सब जहर पी रहे हैं। उन्होंने मतस्य पुराण के श्लोक ‘दस कूप समा वापी, दस वापी समो हदः, दस हद समः पुत्रो, दस पुत्र समो दुमः’ के माध्यम से वृक्ष के महत्त्व को समझाया।
श्लोक के अनुसार 10 कुओं को खुदवाने जितना फल एक बाबड़ी में, 10 बाबड़ी को खुदवाने जितना फल एक तालाब, 10 तालाब खुदवाने जितना फल एक युगी पुत्र और 10 युगी पुत्रों के बराबर फल एक वृक्ष को तैयार करने में मिलता है। सेवा के कार्य अनुकरणीय और प्रशंसनीय है। आयुष मंत्रालय, भारत सरकार के निदेशक विक्रम सिंह ने कहा कि वृक्ष को छूने मात्र से ही शरीर का कायाकल्प हो जाता है। पहले के लोग आशीर्वाद देते थे फूलो फलो। सोंच को बड़ा करके ही पर्यावरण को बचा सकते हैं और यह हम सब की सामूहिक जिम्मेदारी है। गृह मंत्रालय के उप सचिव अखिल चंद झा ने कहा कि दिल्ली गैस चैंबर मे तब्दील हो चुका है। प्रकृति और पर्यावरण तो परमात्मा का रूप है। ऐसे में हमारी जिम्मेदारी है कि हम पेड़ पौधे लगा कर प्रदूषण को अपने स्तर पर कम करें।
विश्व युवक केंद्र के चीफ कंट्रोलर उदय शंकर सिंह ने कहा कि प्रत्येक नागरिक का कर्तव्य है कि मानवता की रक्षा के लिए पेड़-पौधे लगाए। उन्होंने कहा की डेंगू और चिकनगुनिया के होने पर गिलोय पीते हैं। क्यों न गिलोय पहले पी लें ताकि डेंगू, चिकुनगुनिया से बचे रहें। पूर्व उपसचिव विजय कुमार मिश्रा ने कहा की दादा पेड़ लगाकर चले गये हम लोग लाभ ले रहे हैं। सेवा के सचिव राकेश कुमार ने कहा कि गिलोय एंटी वायरस है जिसके सेवन से प्रदूषण के कुप्रभाव से बचा जा सकता है। शास्त्र में गिलोय को अमृता कहा गया है जो की अमृत के समान है। औषधीय पौधारोपण से पर्यावरण एवं स्वास्थ्य दोनों की रक्षा होगी।
इस अवसर पर हरड़, बहेरा, आंबला, गिलोय, इलाइची, बेल, जामुन, सहजन, हारसिंगार, कढ़ी पत्ता, पथलचूर, नीम, निर्गुन्डी, इमली, कदम, अमलतास, अर्जुन, कलाबासा, हबीकस, रमा तुलसी, श्यामा तुलसी, लॉन्ग तुलसी, कपूर तुलसी, अमेरिकन तुलसी, वन तुलसी, अनार, बैर, अमरुद, कटहल, रातरानी, सदाबहार, बैगनबेलिया, मोरपंखी और उदयपुर से लाये गये लहसुन बेल के अलावा अन्य औषधीय पौधे, फल और फूल के पौधे लगाए गए और वितरित किये गए. 2-3 महीने बाद जब ये पौधे बड़े हो जायेंगे तो इनके पत्तों के यंही अर्क बनाये जायेंगे और ह्रदय रोग, मधुमेह, घुटने के दर्द एवं अन्य प्रकार के रोगिये को पिलाकर स्वस्थ्य किये जाने की योजना है. इस अवसर पर आचार्य संजीव अग्निहोत्री, राष्ट्रप्रकाश, निर्मल वैद, डॉ डी. सी. प्रजापति, वीना भदोरिया, आर के शुक्ला आदि लोग उपस्थित थे.































