रचना-गणतंत्र का जश्न, लेखिका-सुशीला रोहिला

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26 जनवरी 1950 की गौरव गाथा,
भीमराव अम्बेडकर की कर्म कहानी|
इतिहास के पन्नों पर है अंकित,
भारत के संविधान की कहानी||

भारत का संविधान है धर्म निरपेक्ष,
ऊच-नीच, जात-पात धर्म से विरक्त|
सब के अधिकारों का रखा ध्यान,
विश्व-भर में भारत की पहचान||

वीर सेनानी भारत माता की शान,
जल, थल, नभ में है पहचान|
करतब, कला बड़ी मिसाल,
घर घुस शत्रु का किया बेहाल||

सद्भावना का जश्न मनाओ,
नागरिकता का कानून अपनाओ|
विकास का तिरंगा लहराओ,
सब मिल एक राष्ट्र, एक ध्वज,
एक आत्मा बन कर छा जाओ,
भारत माता को विश्व गुरु बनाओ||

गणतंत्र दिवस में वो यादें छुपी,
लाखों शहीदों की है गौरव गाथा|
शत-शत नमन करते बारंबार,
शीश चरणों में झुकाए शत-बार|
बच्चा-बच्चा देशभक्त बने महान,
समर्पण का हो सब मे प्रेम-भाव|।

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