जीवन में ज्ञान-विज्ञान के समन्वय का होना आवश्यक: श्री सतपाल महाराज

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संवाददाता/नई दिल्ली| रामलीला मैदान में आयोजित त्रिदिवसीय सद्भावना सम्मेलन के अवसर पर जनसमूह को सम्बोधित करते हुए समाजसेवी श्री सतपाल जी महाराज ने आध्यात्मिक जागरण को विशिष्ट महत्त्व देते हुए कहा कि अध्यात्म को जीवन में प्रकट करना होगा | उन्होंने ज्ञान-विज्ञान के समन्वय पर जोर देते हुए कहा कि आत्मिक उत्थान से हमारी बौद्धिक क्षमता का विकास होता है जिससे हमारा आत्मबल मजबूत होगा और हम देश हित में निर्णय लेने में सहायक सिद्ध होंगे| हमें अपने विचारों को हिमालय की तरह ऊँचा तथा गंगा की तरह पवित्र बनाना  होगा जिससे समाज में प्रेम, शांति तथा सद्भावना का वातावरण बन सके|

श्री महाराज ने सुप्रीम कोर्ट के अयोध्या सम्बन्धी फैसले का सम्मान करते हुए कहा कि इस फैसले से लोकतंत्र  मजबूत  हुआ है तथा हम सबको कोर्ट के फैसले का सम्मान करना चाहिए तथा सबको आपस में मिलजुल कर  देश के विकास में अपना योगदान देना चाहिए |

इस अवसर पर संस्था द्वारा पूरे भारत सहित अनेक देशो में चलाएं जा रहे “ मिशन एजुकेशन” के तत्वावधान में एक वार्षिक संगोष्ठी का भी आयोजन किया गया जिसमे देश के अनेक प्रांतों से यूथ विंग के स्वयं सेवकों ने प्रतिभाग किया|  दिल्ली प्रान्त सहित पूरे एनसीआर में प्रदूषण के बढ़ते स्तर को ध्यान में रखते हुए पर्यावरण संरक्षण पर बच्चो द्वारा चित्र कला प्रतियोगिता का आयोजन कर सभी उपस्थित जन समुदाय को पर्यावरण रक्षा हेतु जागरूक करने का प्रयास किया गया|

कार्यक्रम के मुख्य वक्ता श्री सतपाल जी महाराज और मुख्य अतिथि के रूप में मंच पर मनोज तिवारी(सांसद और दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष, भाजपा), प्रमोद गुप्ता, निगम पार्षद यमुना विहार व अन्य गणमान्य लोग उपस्थित रहे| संस्था के वरिष्ठ कार्यकर्ताओं ने महाराज जी सहित मंच पर उपस्थित सभी गणमान्य लोगो का फूल-मालाओ से स्वागत किया| मंच संचालन महात्मा हरिसंतोषानन्द द्वारा किया गया |

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