भगवान की प्राप्ति का सत्संग हरि-कथा ही एक माध्यम है-साध्वी दर्शनी बाई

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मेरठ कैंट, 30 जूलाई। मानव उत्थान सेवा समिति के तत्वावधान में वेस्ट एण्ड रोड, मंदिर मार्ग मेरठ कैंट में स्थित मानव धर्म मंदिर के प्रांगण में सात दिवसीय श्रीमद्भागवत आत्म-कथा महायज्ञ के सातवें दिन कथा व्यास साध्वी दर्शनी बाई जी ने भगवान और भक्त के बीच जो सम्बन्ध होता है वह अतुलनीय है। इसमें किसी नियम की आवश्यकता नही होती है। भक्त के मन की बात भगवान स्वयं जान लेते है। भगवान की प्राप्ति का सत्संग हरि-कथा ही एक माध्यम है। सत्संग है मानसरोवर, सुखों की खान बन्दें, सत्संग से ही मिलते है, सचमुच भगवान बन्दे। अध्यात्म-ज्ञान से ही उस परमात्मा को अपने हृदय में जानकर उसका भजन-सुमिरण करके अपना कल्याण करना है।
आध्यात्मिक गुरू परमपूज्य श्री सतपाल जी महाराज की अनुयायी और जिला मेरठ प्रभारी कथा व्यास साध्वी दर्शनी बाई जी ने कहा कि राजा परिक्षित को सात दिन तक यही कथा सुनने के बाद आत्म-तत्व की प्राप्ति हुई थी। उन्होनें अपने जीवन में भगवान के सच्चें नाम को जानकर भजन-साधना किया और राजा परिक्षित को लेने भगवान के दूत स्वर्ग से विमान लेके आ गये। यही हमारे जीवन में भी होना चाहिए।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि श्रीमान श्रृषिपाल मलिक (प्रबन्धक,बी.एस.एन.एल.) परिवार सहित कथा में पधारें और यजमान बी.एस.गुप्ता धर्मपत्नि श्रीमती मंजू देवी ने कथा व्यास साध्वी दर्शनी बाई जी और सहयोगी साध्वी धनिष्ठा बाई जी व भजन गायक कलाकारों का फूल-माला और श्री राधे-कृष्ण के पट्टे से स्वागत किया। मुख्य अतिथि का स्वागत राजेश गोयल ने किया
साथ ही साथ दिल्ली व अनेक स्थानों से पधारें हुए गायक कलाकार अमर रंगीला, सुरेन्द्र कुमार (सितारवादक), प्रकाश कुमार (तबलावादक), रवि टिकेकर और पड़ोसी देश नेपाल से पधारी हुई प्रसिद्ध भजन गायिका सरगम गायत्री ने-रे मानुष क्या ढूँढे इस जग में, सब कुछ तेरे अन्दर, सद्भावना-सद्भावना, सारे जग में हो सद्भावना, जब कोई नही आता मेरे सतगुरू आते है, अमृत प्याला नाम का तेरे घट में छलक रहा, जैसे अनेक सुमधुर भजनों द्वारा सबको भाव विभोर कर दिया। कलाकारों के सुन्दर भजनों पर सभी भक्तों ने खुब जमके ठुमके लगाये।
शाखा प्रधान देवेन्द्र सिंह, राजेश गोयल, सोनवीर, बलवीर, श्रीराम, राकेश गोयल, सतेन्द्र सिंह, भँवर सिंह, पुष्पा शर्मा, सुनीता और अनेक कार्यकर्ता मौजूद थे। कथा दोपहर 2 से प्रारम्भ होकर सायं 5 बजे तक चला। आरती-प्रसाद के साथ आज के कथा का विश्राम किया गया। आज का प्रसाद शिशपाल सिंह तोमर की तरफ से बांटा गया।

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