मानव धर्म मंदिर में श्री कृष्ण जन्मोत्सव और गुरू पूर्णिमा धूम-धाम से मनी- साध्वी दर्शनी बाई

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मेरठ कैंट, 27 जूलाई। मानव उत्थान सेवा समिति के तत्वावधान में वेस्ट एण्ड रोड, मंदिर मार्ग मेरठ कैंट में स्थित मानव धर्म मंदिर के प्रांगण में सात दिवसीय श्रीमद्भागवत आत्म-कथा महायज्ञ के चौथे दिन कथा व्यास साध्वी दर्शनी बाई जी ने भगवान श्री कृष्ण के जन्मोत्सव के प्रसंग के दौरान भक्त समुदाय को समझाया कि कारागार में भगवान श्री कृष्ण ने जन्म लिया तब जेल के सभी दरवाजे खुल गये थे। जब-जब धर्म की हानि होती है, जब अधर्म बढ़ जाता है, तब-तब पृथ्वी पर भगवान का अवतार धर्म की स्थापना करने के लिए और अधर्म का नाश करने के लिए होता है। चारों ओर त्राहि-त्राहि होने लगती है, तब स्वयं भगवान नर रूप में आकर अनेक प्रकार की लीला करते है। भक्तों की रक्षा करके कंस जैसे दुष्ट प्रवृति के दानवों का संहार करते है।
प्रसिद्ध समाजसेवी और आध्यात्मिक गुरू श्री सतपाल जी महाराज की परम शिष्या कथा व्यास साध्वी जी ने भक्तों को समझाते हुए कहा कि भगवान श्री कृष्ण ने अपनी बाल-लीलाओं द्वारा भक्तों को आनन्दीत किया और जन्म लेते ही समस्त जीवों को माया रूपी बन्धनों से मुक्त किया। भगवान श्री कृष्ण के बाल-रूप की सुन्दर झाँकियां भी निकाली गयी। समस्त भक्त समुदाय को गुरू पूर्णिमा की शुभकामना देते हुए कहा कि आज गुरूभक्त के लिए उसके जीवन का सबसे बड़ा पर्व है, जिस गुरू कृपा से हमें भगवान मिले है।
कथा में आज के यजमान लटूर सिंह चौहान धर्मपत्नि श्रीमती कमलेश देवी और सुनील बाना धर्मपत्नी श्रीमती ज्योति देवी ने कथा व्यास साध्वी दर्शनी बाई जी और सहयोगी साध्वी धनिष्ठा बाई जी, सरीता बहन व भजन गायक कलाकारों का फूल-माला और श्री राधे-कृष्ण के पट्टे से स्वागत किया। यजमानों का स्वागत संस्था के वरिष्ठ कार्यकर्ताओं ने किया।
साथ ही दिल्ली व अनेक स्थानों से पधारें हुए भजन गायक कलाकार अमर रंगीला, सुरेन्द्र कुमार (सितारवादक), प्रकाश कुमार(तबलावादक),रवि टिकेकर और पड़ोसी देश नेपाल से पधारी हुई प्रसिद्ध भजन गायिका सरगम गायत्री ने-पायो जी मैने नाम रतन धन पायो, बड़ी देर भई नन्दलाला, मैया मोरी मै नही माखन खायो, मेरे गुरू महाराज मेरी तकदीर को शमशीर बना दो, मनालो गुरू पूजा त्योहार जैसे अनेक सुमधुर भजनों द्वारा सबको भाव विभोर कर दिया।
शाखा प्रधान देवेन्द्र सिंह, सोनवीर, बलवीर, श्रीराम, राकेश गोयल, सतेन्द्र सिंह, नेपाल सिंह कपसाड़ वाले, भँवर सिंह, दिनेश, अरूण और अनेक कार्यकर्ता मौजूद थे। मंच संचालन धुरन्धर चौहान ने किया। कथा दोपहर 2 से प्रारम्भ होकर सायं 5 बजे तक चला। आरती-प्रसाद के साथ आज के कथा का विश्राम किया गया।

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